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भारत में सिर्फ 29 फीसदी महिला इंटरनेट उपभोक्ता: यूनिसेफ
Updated Tue, 12 Dec 2017 11:43 AM IST
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यूनीसेफ
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भारत में इंटरनेट के इस्तेमाल पर अभी भी पुरुषों का वर्चस्व है और सिर्फ 29 फीसदी महिलाएं ऑनलाइन उपभोक्ता हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन से इस डिजिटल लिंगभेद का खुलासा हुआ है। यूनिसेफ की ‘डिजिटल युग में बच्चों की स्थिति’ पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर कई तरह की पाबंदियां रहती हैं क्योंकि वे लड़कियां हैं।
अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2017 में वैश्विक स्तर पर महिलाओं के मुकाबले 12 फीसदी अधिक पुरुषों ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया जबकि भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या एक तिहाई से भी कम पाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल युग से लड़कियों को वंचित रखने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जारी रिपोर्ट में कहा गया कि विश्वभर में इंटरनेट का उपयोग करने वाले 3 लोगों में से 1 बच्चा है।
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रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि डिजिटल युग बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद नहीं है उनके लिए भी जो गरीबी के साथ आगे बढ़ रहे हैं या फिर किसी तरह की मानवीय आपदाओं से आगे बढ़े हैं। रिपोर्ट में ये भी बताने की कोशिश की गई है कि विश्व 346 मिलियन युवाओं के पास नेट का एक्सेस नहीं है। वहीं ये भी बताया गया है कि 10 में से 9 बच्चे कनाडा, फ्रांस, नीदरलैंड, रसियन फेडरेशन और यूएस में सबसे ज्यादा बच्चों के साथ शारीरिक उत्पीड़न के मामले में दर्ज किए गए हैं।
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अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2017 में वैश्विक स्तर पर महिलाओं के मुकाबले 12 फीसदी अधिक पुरुषों ने इंटरनेट का इस्तेमाल किया जबकि भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या एक तिहाई से भी कम पाई गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल युग से लड़कियों को वंचित रखने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जारी रिपोर्ट में कहा गया कि विश्वभर में इंटरनेट का उपयोग करने वाले 3 लोगों में से 1 बच्चा है।
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रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि डिजिटल युग बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद नहीं है उनके लिए भी जो गरीबी के साथ आगे बढ़ रहे हैं या फिर किसी तरह की मानवीय आपदाओं से आगे बढ़े हैं। रिपोर्ट में ये भी बताने की कोशिश की गई है कि विश्व 346 मिलियन युवाओं के पास नेट का एक्सेस नहीं है। वहीं ये भी बताया गया है कि 10 में से 9 बच्चे कनाडा, फ्रांस, नीदरलैंड, रसियन फेडरेशन और यूएस में सबसे ज्यादा बच्चों के साथ शारीरिक उत्पीड़न के मामले में दर्ज किए गए हैं।
बच्चों के साथ छेड़-छाड़ पर रोक कलेक्टिव एक्शन के द्वारा ही रोका जा सकता है जिसमें सरकार, प्राइवेट सेक्टर, बच्चों के लिए काम रही संस्थाओं और एकेडमिक, परिवार और बच्चों को आगे आना होगा।
भारत में इंटरनेट युग के बारे में भारत में यूनिसेफ की रिप्रजेंटेटिव डॉ. यास्मिन अली हक ने कहा कि भारत आईटी हब के रूप में पॉपुलर है इसमें ये मायने नहीं रखता है कि वो कहां रहते हैं, यहां हर लड़की और लड़के को डिजिटल का फायदा दिए जाने की कोशिश की जा रही है।