महाराष्ट्र: ऑनलाइन क्लास के लिए 50 किलोमीटर की यात्रा करने को मजबूर हैं 200 बच्चे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Sat, 22 Aug 2020 02:37 PM IST
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ऑनलाइन क्लास (फाइल फोटो)
ऑनलाइन क्लास (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

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महाराष्ट्र के तटीय गांवों से ऑनलाइन कक्षा लेने के लिए लगभग 200 बच्चों को खराब इंटरनेट की वजह से रोजाना 50 किलोमीटर की यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है। पहले कोरोना वायरस महामारी और फिर चक्रवाती तूफान निसर्ग से प्रभावित हुए दूरदराज के गांवों के बच्चों को जून की शुरुआत से इंटरनेट संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ये बच्चे रत्नागिरी जिले के तटीय इलाकों में रहते हैं।
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हालांकि जब इंटरनेट की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो एक बच्चा आखिरकार मदद के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के पास पहुंचा। आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानोंगो ने कहा कि बच्चों को यह सुनिश्चित किया गया कि इंटरनेट सेवा जल्द से जल्द बहाल कर दी जाएगी। इसके लिए आयोग क्षेत्र के जिलाधिकारी और सेलुलर कंपनियों के पास पहुंचा। 
क्षेत्र के जिलाधिकारी को लिखे पत्र में कानोंगो ने जोर देकर कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समस्या का जल्द से जल्द समाधान हो। उन्होंने जिलाधिकारी को 25 जुलाई को लिखे पत्र में कहा, ‘आयोग ने रत्नागिरी जिले के तटीय क्षेत्रों में खराब और बाधित नेटवर्क कनेक्टिविटी के संबंध में प्राप्त एक शिकायत का संज्ञान लिया है। खासतौर से पिन कोड 415714 में, जहां तीन जून, 2020 को चक्रवाती तूफान निसर्ग ने दस्तक दी थी। तब से वहां के निवासियों के पास मोबाइल और डाटा कनेक्टिविटी नहीं है।’

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उन्होंने आगे कहा, ‘परिणामस्वरूप कोरोना लॉकडाउन के कारण लगभग 200 छात्रों को ऑनलाइन शैक्षणिक गतिविधियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा छात्र ऑनलाइन शिक्षा के लिए जरूरी डाटा कनेक्टिविटी के इस्तेमाल हेतु रोजाना लगभग 50 किलोमीटर की यात्रा करने का दर्द सहन रहे हैं।’ उन्होंने मामले पर रत्नागिरी के जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।

प्रियांक ने पत्र में कहा, 'मैं इस मामले में रत्नागिरि के जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और संबंधित सेलुलर सेवा प्रदाता को उचित निर्देश जारी करें ताकि इंटरनेट कनेक्टिविटी जल्द से जल्द बहाल हो सके और कोई भी बच्चा अपनी शिक्षा के कारण अनुचित दबाव या तनाव का शिकार न हो।'
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