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Op Sindoor Timeline: जब भारत ने एक रात में मारे 100+ आतंकी, जानें कैसे PAK सेना की तबाही तक पहुंच गई थी बात
Thu, 07 May 2026 05:57 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 07 May 2026 05:57 AM IST
सार
पहलगाम के बायसरन में पिछले साल 22 अप्रैल को पर्यटकों पर हुए कायरतापूर्ण हमले मे भारत के कई निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। देश गहरे सदमे में था। इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने पहले आतंक के पनाहगार पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके बाद देश में ही छिपे पहलगाम के गुनहगारों को मार गिराने के लिए धैर्य और तकनीक की मदद से ऑपरेशन महादेव चलाया।
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ऑपरेशन सिंदूर का एक साल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत की तरफ से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को शुरू हुए आज एक साल हो गए हैं। 22 अप्रैल 2025 को जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी तो पाकिस्तान की इस नापाक साजिश और उसकी हरकतों को भारत ने यूं ही नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि एक बार फिर पाकिस्तान में घुसकर कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इतना ही नहीं, जब पाकिस्तानी सेना ने अपनी पनाह में रहने वाले आतंकियों को बचाने की कोशिश की तो भारत ने उसके सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया और उसे भारी नुकसान पहुंचाया।
हालांकि, भारत की यह कार्रवाई सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर तक ही सीमित नहीं रही थी, बल्कि पहलगाम में आतंकी हमले के गुनहगार आतंकियों को मार गिराने के लिए भारतीय सुरक्षाबलों ने एक और अभियान- ऑपरेशन महादेव को भी अंजाम दिया था। इसके जरिए ही कई महीनों तक फरार रहने वाले मासूमों के हत्यारों को मार गिराया गया था।
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हालांकि, भारत की यह कार्रवाई सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर तक ही सीमित नहीं रही थी, बल्कि पहलगाम में आतंकी हमले के गुनहगार आतंकियों को मार गिराने के लिए भारतीय सुरक्षाबलों ने एक और अभियान- ऑपरेशन महादेव को भी अंजाम दिया था। इसके जरिए ही कई महीनों तक फरार रहने वाले मासूमों के हत्यारों को मार गिराया गया था।
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भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला कैसे लिया था? ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने कैसे पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया? इसके बाद जब पाकिस्तानी सेना ने भारत से जंग छेड़ने की कोशिश की तो कैसे हमारी सेना ने दुश्मन के अहम ठिकानों को निशाना बनाकर उसे नेस्तनाबूत कर दिया? आइये जानते हैं...
पहलगाम आतंकी हमला जिस दिन हुआ, उस दिन पीएम मोदी सऊदी अरब में थे। आतंकी घटना की सूचना मिलने के बाद प्रधानमंत्री तुरंत ही दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। अगले दिन यानी 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक की, जिसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब पसरा था मातम, तब क्या-क्या हुआ?
23 अप्रैल 2025पहलगाम आतंकी हमला जिस दिन हुआ, उस दिन पीएम मोदी सऊदी अरब में थे। आतंकी घटना की सूचना मिलने के बाद प्रधानमंत्री तुरंत ही दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए। अगले दिन यानी 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक की, जिसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया।
इसके अलावा अटारी सीमा बंद कर दी गई, पाकिस्तानियों के सार्क वीजा रद्द कर दिए गए और पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी गई।
इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर का दौरा किया और उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की। जांच में मदद के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) घटनास्थल पर पहुंची और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकियों के स्केच जारी किए।
24 अप्रैल 2025
इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर का दौरा किया और उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की। जांच में मदद के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) घटनास्थल पर पहुंची और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकियों के स्केच जारी किए।
24 अप्रैल 2025
- भारत के कड़े कदमों के जवाब में पाकिस्तान ने शिमला समझौते को निलंबित कर दिया, भारतीय उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, व्यापार के लिए वाघा सीमा बंद कर दी और भारतीयों के सार्क वीजा रोक दिए।
- केंद्र सरकार ने विपक्ष को जानकारी देने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसी दिन उधमपुर के बसंतगढ़ में एक मुठभेड़ हुई जिसमें एक भारतीय सैनिक शहीद हो गया। रात के समय नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर दोनों देशों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई।
25 अप्रैल-6 मई 2025
सीमा पर तनाव और सीजफायर उल्लंघन: नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन और गोलाबारी की गई, जिसका भारतीय बलों ने मुस्तैदी से जवाब दिया। 25 अप्रैल को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कश्मीर का दौरा कर सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया।
26 अप्रैल 2025
इस बीच पहले पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले द रेजिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी लेने के अपने पहले बयान से पलटी मारते हुए हमले में अपनी भूमिका से इनकार कर दिया।
इस बीच पाकिस्तान की संसद के उच्च सदन (सीनेट) ने एक प्रस्ताव पारित कर सिंधु जल संधि के निलंबन की आलोचना की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की।
सीमा पर तनाव और सीजफायर उल्लंघन: नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान की तरफ से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन और गोलाबारी की गई, जिसका भारतीय बलों ने मुस्तैदी से जवाब दिया। 25 अप्रैल को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कश्मीर का दौरा कर सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया।
26 अप्रैल 2025
इस बीच पहले पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले द रेजिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) ने हमले की जिम्मेदारी लेने के अपने पहले बयान से पलटी मारते हुए हमले में अपनी भूमिका से इनकार कर दिया।
इस बीच पाकिस्तान की संसद के उच्च सदन (सीनेट) ने एक प्रस्ताव पारित कर सिंधु जल संधि के निलंबन की आलोचना की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की।
27 अप्रैल 2025
गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने आधिकारिक तौर पर इस आतंकी हमले की जांच अपने हाथ में ले ली। इस बीच भारतीय नौसेना ने अपनी मारक क्षमता का कड़ा संदेश देने के लिए एंटी-शिप फायरिंग का सफल परीक्षण किया।
28 अप्रैल 2025
28 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया।
30 अप्रैल 2025
गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने आधिकारिक तौर पर इस आतंकी हमले की जांच अपने हाथ में ले ली। इस बीच भारतीय नौसेना ने अपनी मारक क्षमता का कड़ा संदेश देने के लिए एंटी-शिप फायरिंग का सफल परीक्षण किया।
28 अप्रैल 2025
28 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया।
30 अप्रैल 2025
- 30 अप्रैल को नियंत्रण रेखा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी दोनों देशों के बीच गोलीबारी की घटना हुई।
- 30 अप्रैल को ही भारत के विदेश मंत्रालय ने 45 देशों के राजदूतों को इस आतंकी हमले की पूरी जानकारी दी।
हलचल का दौर और फिर ऑपरेशन सिंदूर
7 मई 2025
7 मई की तड़के सुबह भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया। भारतीय बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद नौ आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर सटीक एयरस्ट्राइक की। इसमें कई आतंकी मारे गए और आतंकी ढांचों को तबाह कर दिया गया। भारत के इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकी भी मारे गए थे।
ये भी पढ़ें: 22 अप्रैल को आतंकियों ने कैसे दहलाया पहलगाम: आतंकी कहां हुए थे फरार, सुरक्षाबल क्यों नहीं रोक पाए, जानें सबकुछ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन की सफलता के बाद स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक नया रक्षा सिद्धांत स्थापित किया है- 'कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले की भारी कीमत आतंकियों के साथ-साथ उनके आकाओं (पाकिस्तान) को भी चुकानी होगी, और भारत परमाणु धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।'
भारत की आतंकियों के खिलाफ हुई इस बड़ी कार्रवाई से अचानक आतंकियों का पनाहगाह पाकिस्तान बौखला गया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने 7 मई की रात से लेकर 9 मई तक भारत के कई हिस्सों (जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात आदि के शहरी क्षेत्रों) पर मिसाइलों और करीब 300-400 ड्रोनों से हमला किया। हालांकि, उसकी मिसाइलें और ड्रोन्स भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों के आगे नाकाम सिद्ध हुईं।
मजेदार बात यह है कि जहां पाकिस्तान का एक भी हमला भारत को कोई नुकसान पहुंचाने में असफल रहा तो वहीं भारतीय वायुसेना ने सटीक हमलों से पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियों को नाकाम कर दिया और एक के बाद एक 11 एयरबेस को तबाह कर दिया। पाकिस्तान के कुल 13 सैन्य ठिकानों पर भारत ने इस दौरान हमला किया। इसमें उसके रनवे से लेकर जहाजों के बंकरों तक को निशाना बनाया गया, जिसके चलते पाकिस्तानी वायुसेना की क्षमताएं लगभग क्षीण हो गईं। आखिरकार भारत का किरना हिल्स के पास एक एयरबेस पर किया गया हमला निर्णायक सिद्ध हुआ और पाकिस्तान युद्ध विराम कराने की अपील लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंच गया।
कैसे हुआ ऑपरेशन सिंदूर का अंत?
ऑपरेशन सिंदूर का अंत 10 मई 2025 को हुआ, जब भारत के लगातार हमलों के चलते पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद मांगी। युद्ध के बीच एक मौका ऐसा आया था, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कह दिया था कि वह इस युद्ध में पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। हालांकि, बाद में जब पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने युद्ध विराम की अपील की तो भारत ने अपने लक्ष्यों के पूरे होने के चलते इस पर सहमति जता दी।10 मई 2025 को दोपहर 3:30 बजे पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) ने सीधे अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और आगे हमले सह पाने में अपनी असमर्थता स्वीकार करते हुए भारत से सैन्य कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई। यह तय किया गया कि 10 मई की शाम 5 बजे से जल, थल और आकाश में सभी सैन्य कार्रवाई रोक दी जाएगी। यह सीजफायर कोई औपचारिक या कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता नहीं था, बल्कि केवल एक मौखिक सैन्य समझ थी।
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