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Odisha: ओडिशा में नष्ट किया गया एक टन गांजा, पिछले साल राज्य पुलिस की एसटीएफ ने किया था जब्त
Wed, 31 Aug 2022 04:26 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 31 Aug 2022 04:26 PM IST
सार
अधिकारी ने कहा कि 2021 में एक मामले में आरोपियों से जब्त किए गए गांजे को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 52 ए के मुताबिक सभी उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नष्ट किया गया है।
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ओडिशा में एक टन गांजा नष्ट किया गया
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
ओडिशा के अधिकारियों ने उस एक टन गांजे को नष्ट कर दिया है जिसे राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा जब्त किया गया था। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि 2021 में एक मामले में आरोपियों से जब्त किए गए गांजे को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 52 ए के मुताबिक सभी उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नष्ट किया गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फोरेंसिक साइंस लेब्रोरेटरीज के वैज्ञानिकों और सदस्यों की मौजूदगी में भुवनेश्वर एसटीएफ के एसपी, खुर्दा के आबकारी अधीक्षक, खुर्दा के डीएसपी और एसटीएफ के नेतृत्व में ड्रग डिस्पोजल कमेटी के निर्णय के अनुसार कार्रवाई की गई।
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जब्त ड्रग्स को पहले संबंधित अदालत द्वारा प्रमाणित किया गया और निपटान/विनाश के लिए ड्रग डिस्पोजल कमेटी को सौंप दिया गया। अधिकारी ने कहा, ओडिशा में यह अब तक पहला प्री-ट्रायल डिस्पोजल केस है, जहां एनडीपीएस अधिनियम, 185 की धारा 52ए के तहत प्रतिबंधित गांजे को नष्ट कर दिया गया है।
इससे पहले जून 2022 में एसटीएफ ने 8.5 किलोग्राम से ज्यादा ब्राउन शुगर को नष्ट किया था। इस निपटान/विनाश के लिए कई अन्य मामले (एसटीएफ और जिला पुलिस स्तर पर) प्रक्रियाधीन हैं। कम से कम 4,500 क्विंटन (450 टन) गांजा और 104 किलोग्राम ब्राउन शुगर विभिन्न अदालतों/पुलिस थानों में नष्ट होने की प्रतीक्षा में है।
अधिकारी ने कहा कि उम्मीद है कि जब्त किए गए अधिकांश ड्रग्स को तीन से छह महीने के भीतर नष्ट कर दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि ओडिशा पुलिस द्वारा नशीले पदार्थों, विशेष रूप से गांजा और ब्राउन शुगर (जिसे हेरोइन/स्मैक के रूप में भी जाना जाता है) जैसे नशीले पदार्थों का बड़े पैमाने पर पुलिस स्टेशनों और कोर्ट मलखाना में भारी संग्रह किया गया है।
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अधिकारी ने कहा कि 2021 में एक मामले में आरोपियों से जब्त किए गए गांजे को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 52 ए के मुताबिक सभी उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नष्ट किया गया है।
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उन्होंने कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फोरेंसिक साइंस लेब्रोरेटरीज के वैज्ञानिकों और सदस्यों की मौजूदगी में भुवनेश्वर एसटीएफ के एसपी, खुर्दा के आबकारी अधीक्षक, खुर्दा के डीएसपी और एसटीएफ के नेतृत्व में ड्रग डिस्पोजल कमेटी के निर्णय के अनुसार कार्रवाई की गई।
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जब्त ड्रग्स को पहले संबंधित अदालत द्वारा प्रमाणित किया गया और निपटान/विनाश के लिए ड्रग डिस्पोजल कमेटी को सौंप दिया गया। अधिकारी ने कहा, ओडिशा में यह अब तक पहला प्री-ट्रायल डिस्पोजल केस है, जहां एनडीपीएस अधिनियम, 185 की धारा 52ए के तहत प्रतिबंधित गांजे को नष्ट कर दिया गया है।
इससे पहले जून 2022 में एसटीएफ ने 8.5 किलोग्राम से ज्यादा ब्राउन शुगर को नष्ट किया था। इस निपटान/विनाश के लिए कई अन्य मामले (एसटीएफ और जिला पुलिस स्तर पर) प्रक्रियाधीन हैं। कम से कम 4,500 क्विंटन (450 टन) गांजा और 104 किलोग्राम ब्राउन शुगर विभिन्न अदालतों/पुलिस थानों में नष्ट होने की प्रतीक्षा में है।
अधिकारी ने कहा कि उम्मीद है कि जब्त किए गए अधिकांश ड्रग्स को तीन से छह महीने के भीतर नष्ट कर दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि ओडिशा पुलिस द्वारा नशीले पदार्थों, विशेष रूप से गांजा और ब्राउन शुगर (जिसे हेरोइन/स्मैक के रूप में भी जाना जाता है) जैसे नशीले पदार्थों का बड़े पैमाने पर पुलिस स्टेशनों और कोर्ट मलखाना में भारी संग्रह किया गया है।