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अध्ययन : चार भारतीयों में से एक को जाति, धर्म के कारण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने में करना पड़ता है भेदभाव का सामना 

Wed, 24 Nov 2021 03:24 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 24 Nov 2021 03:24 AM IST
सार

ऑक्सफैम इंडिया ने मंगलवार को भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के साथ चुनौतियों पर अपने तेजी से सर्वेक्षण के परिणामों को साझा करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे टीकाकरण नहीं करवा सके, क्योंकि टीकाकरण केंद्र पर टीके खत्म हो गए थे। 
 

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One in four Indians face discrimination in accessing healthcare because of caste, religion according to a Study
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

एक रिपोर्ट में दावा किया कि एक तिहाई मुसलमानों, 20 प्रतिशत से अधिक दलितों, आदिवासियों और सर्वे में कुल भाग लेने वाले लोगों में 30 प्रतिशत के साथ धर्म, जाति के आधार पर या अस्पतालों में बीमारी और स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर भेदभाव किया गया। एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल ने यह जानकारी दी।

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ऑक्सफैम इंडिया ने मंगलवार को भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के साथ चुनौतियों पर अपने तेजी से सर्वेक्षण के परिणामों को साझा करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे टीकाकरण नहीं करवा सके, क्योंकि टीकाकरण केंद्र पर टीके खत्म हो गए थे। जब वे उनके पास गए तो 12 प्रतिशत लोगों ने टीका नहीं लगावाया क्योंकि वे टीके की महंगी कीमतों को वहन नहीं कर सकते थे।
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सिक्योरिंग राइट्स ऑफ पेशेंट्स इन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, नौ प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें खुद को टीका लगवाने के लिए एक दिन की मजदूरी गंवानी पड़ी। एनजीओ ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और भारत के टीकाकरण अभियान के कुछ प्रावधानों के खिलाफ मरीजों के अधिकारों को कवर करने के लिए सर्वेक्षण दो भागों में आयोजित किया गया था।

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स्वास्थ्य मंत्रालय के मरीजों के अधिकार चार्टर पर सर्वेक्षण फरवरी और अप्रैल के बीच किया गया था। जिसमें 3890 प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं।  जबकि भारत के वैक्सीन अभियान पर सर्वेक्षण अगस्त और सितंबर के बीच 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में 10,955 लोगों को कवर किया गया था। .

 

ऑक्सफैम इंडिया ने सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा, चार भारतीयों में से एक को उनकी जाति और धर्म के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में भेदभाव का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक तिहाई मुस्लिम, 20 प्रतिशत से अधिक दलित और आदिवासी लोगों, और सर्वे में शामिल 30 प्रतिशत लोगों ने धर्म, जाति के आधार पर या अस्पताल में बीमारी या स्वास्थ्य की स्थिति के आधार पर भेदभाव किए जाने के बारे में बताया। 



50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें या उनके करीबी रिश्तेदार पिछले 10 वर्षों में अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज और प्रक्रिया शुरू होने से पहले इलाज की अनुमानित लागत प्रदान नहीं की गई।
 

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