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प्रधानमंत्री की अपील पर किसान संगठन बोले- दर्द और मरहम दोनों मोदी के हाथों में हैं...
Mon, 08 Feb 2021 06:22 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 08 Feb 2021 06:22 PM IST
सार
टिकैत ने कहा, अगर सरकार हमसे बातचीत करना चाहती है, तो हम भी तैयार हैं। लेकिन हमारा पंच भी वही है और मंच भी वही है। हम सरकार से हर स्तर पर चर्चा के लिए तैयार हैं...
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Pm Modi discussed the prevailing situation in Uttarakhand with MPs from Uttarakhand
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन 75 दिन से जारी हैं। इस बीच राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान संगठनों से आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार हर स्तर पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव पर किसान संगठनों का कहना है कि हम भी सरकार से चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार वार्ता के लिए संदेश तो भेजे। सरकार नया प्रस्ताव सुलझाने वाला दे, न की लटकाने वाला। हमारा दर्द और महरम दोनों सरकार के हाथों में है।
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किसान नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला से चर्चा में कहा, सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है जो ये कानून वापस नहीं ले रही है। सरकार सभी लोगों से चर्चा कर दोबारा नया बिल लेकर संसद में आए। सरकार अगर आज पुराना बिल अभी वापस लेती है तो ये आंदोलन शाम को ही खत्म हो जाएगा।
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टिकैत ने आगे कहा, अगर सरकार हमसे बातचीत करना चाहती है, तो हम भी तैयार हैं। लेकिन हमारा पंच भी वही है और मंच भी वही है। हम सरकार से हर स्तर पर चर्चा के लिए तैयार हैं। जिस तरह से पहले वार्ता होती आई है उसी तरह से ही फिर से वार्ता करे तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। सरकर हमे संदेश भेजे हम लोग दिन तय कर चर्चा के लिए राजी हो जाएंगे।
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किसान नेता हन्नान मौला ने अमर उजाला से कहा, जो प्रस्ताव हमें स्वीकार नहीं है उस पर दबाव डालने से क्या फायदा। अगर सरकार हमें कोई नया प्रस्ताव दे, तो हम दोबारा से विचार करने के लिए तैयार हैं। लाखों किसानों का दुख-दर्द न समझकर सरकार बोल रही है कि दुख भूल जाओ और दर्द भूल जाओ। दर्द का महरम क्या है सरकार वह बताए। सरकार सात माह से एक ही बात दोहरा रही है। बार-बार एक ही बात बोलने से समस्या का समाधान नहीं होगा। बैठक में सरकार गतिरोध सुलझाने वाला प्रस्ताव दे न की लटकाने वाला।
सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देते हुए राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा, केंद्र सरकार और किसानो के बीच चर्चा के रास्ते कभी बंद नहीं हुए हैं। कृषि मंत्री लगातार संपर्क में हैं। किसान संगठनों को संदेश देते हुए पीएम ने आगे कहा कि नए कृषि कानून देश में बड़ा परिवर्तन लाने वाला साबित होंगे। ये कानून लागू होने का मतलब कतई नहीं है कि बाद में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता।
भविष्य में भी कहीं कोई कमी नजर आए तो उसे सुधारा जाएगा। पीएम मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि एमएसपी है, था और रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने ये भी अपील की कि जो बुजुर्ग आंदोलन में बैठे हैं, उन्हें घर जाना चाहिए। वह आंदोलन खत्म करें और चर्चा आगे चलती रहे। ये हमें तय करना होगा कि हम समस्या का हिस्सा बनेंगे या समाधान का माध्यम। सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई, जो भी बताया गया वो आंदोलन को लेकर बताया गया लेकिन मूल बात पर चर्चा नहीं हुई।
किसान संगठनों से चर्चा करने वाली सरकार की टीम के सदस्य और मंत्री पीयूष गोयल भी किसानों से दोबारा चर्चा करने की बात को दोहरा चुके हैं। रेलमंत्री गोयल ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए सरकार तैयार है। सरकार वार्ता से ही समस्या का समाधान निकलना चाहती है। यदि इन कानूनों में कोई कमी लग रही है तो सरकार को बताना चाहिए। किसान संगठन कुछ नए प्रस्ताव लेकर आते हैं तो सरकार उनके साथ दो बार चर्चा के लिए तैयार है। सरकार किसानों को तारीख पर तारीख नहीं बल्कि, प्रस्ताव पर प्रस्ताव दे रही है।
अभी तक कृषि कानूनों के मसले पर किसान संगठनों और भारत सरकार के बीच करीब एक दर्जन से ज्यादा बार चर्चा हो चुकी है। पिछली दफा हुई बैठक में केंद्र ने किसान संगठनों से कहा था कि सरकार के प्रस्ताव को मान लिया जाए। सरकार ने किसानों से कृषि कानूनों को कुछ समय तक टालने की बात कही थी, लेकिन किसान संगठन उस पर भी राजी नहीं हुए थे। इसके बाद से ही दोनों पक्षों की तरफ से सख्त रुख अपनाया गया। 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद किसान संगठन बैकफुट पर नजर आ रहे हैं।