कूटनीतिक मोर्चे पर पाक चारों खाने चित, दक्षिण कोरिया ने किया भारत का समर्थन
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किरकिरी से बचने के लिए भारत की ओर से किए गए सर्जिकल स्ट्राइक को नकारने वाले पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर बुरी तरह से मुंह की खानी पड़ी है। सर्जिकल स्ट्राइक की सार्वजनिक घोषणा के बाद जहां चीन और उसके स्वाभाविक मित्र माने जाने वाले देशों ने चुप्पी साध कर पाक को झटका दिया है, वहीं बांग्लादेश के बाद अफगानिस्तान और दक्षिण कोरिया ने भारत की कार्रवाई का खुल कर समर्थन किया है।
इस बीच, श्रीलंका ने भी बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान की तरह सार्क सम्मेलन से दूरी बना कर दक्षिण एशिया में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम को और मजबूत बनाया है। पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका अमेरिका की ओर से मिला है।
अमेरिका ने सर्जिकल स्ट्राइक मामले में पाकिस्तान के पक्ष में बिना एक शब्द बोले उसे आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की नसीहत दी है। बांग्लादेश के बाद सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन करते हुए अफगानिस्तान के राजदूत शैदा मोहम्मद अब्दाली ने इसे आत्मरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया। अब्दाली ने कहा कि भारत को आत्मरक्षा करने का हक है, वह भी तब जब दुनिया को पता है कि पाकिस्तान में आतंकियों को प्रश्रय और प्रशिक्षण मिल रहा है।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दक्षिण कोरिया भारत के साथ
इस बीच, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से मुलाकात में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क ग्युन हे ने भारत की कार्रवाई का समर्थन किया। इस मुलाकात में महाजन ने उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी दी। इस पर ग्युन हे ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दक्षिण कोरिया भारत के साथ है।
पाकिस्तान को भारत की कार्रवाई पर अमेरिकी हस्तक्षेप के साथ चीन सहित अरब देशों के अपने स्वाभाविक मित्र देशों से समर्थन की उम्मीद थी। मगर चीन, कतर, बहरीन, सऊदी अरब जैसे देशों ने चुप्पी साध कर पाकिस्तान को निराश किया है।
अमेरिका ने जहां पाकिस्तान को आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए कहा है, वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन ने सीधे सीधे पाक में आतंकवादियों के अनियंत्रित होने की बात कह कर उसके जख्मों पर नमक छिड़क दिया है।