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किस्सा: उस कंपकंपाती रात में सोनिया ने ममता बनर्जी के लिए 10 जनपथ के दरवाजे खुलवाए थे, कभी मीठी तो कभी तल्ख रिश्ते की कहानी
Wed, 28 Jul 2021 07:58 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Wed, 28 Jul 2021 07:58 PM IST
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ममता बनर्जी और सोनिया गांधी (फाइल फोटो)
विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पांच दिनों के दिल्ली दौरे पर है। मंगलवार 27 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद बुधवार शाम वे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलीं। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा काफी तेज है। इस मुलाकात के बाद ममता ने भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होने का आव्हान किया। सोनिया-ममता की ये मुलाकात कई मायनों में अहम है। ऐसे में सोनिया-ममता के रिश्तों के इतिहास पर एक निगाह डालना दिलचस्प होगा।
फाइटर मानी जाने वाली ममता बनर्जी ने आज भारतीय राजनीति में अपनी जो जगह बनाई है, उसके लिए कांग्रेस खासकर सोनिया गांधी को हमेशा इस बात का मलाल रहा कि काश ममता कांग्रेस छोड़कर न जातीं! सोनिया को पहले ही अंदाजा हो गया था कि ममता बड़ी नेता बनने वाली हैं। इसलिए उनकी भरसक कोशिश रही कि ममता पार्टी छोड़कर न जाएं। सोनिया और ममता के रिश्तों से जुड़ी कुछ दिलचस्प किस्सों पर नजर डालते हैं।
जब रात में खुला था ममता के लिए दस जनपथ का दरवाजा
बात उस समय की है जब स्व. प्रणब मुखर्जी और ममता बनर्जी के बीच नहीं बन रही थी। ममता को लगता था कि प्रणब मुखर्जी ने उनके विरोध में मोर्चा खोल दिया है। ममता की महत्वाकांक्षा पश्चिम बंगाल चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने की थी। वे पहले प्रणब मुखर्जी को अपने बड़े भाई के समान मानती थीं लेकिन अपने ही खिलाफ हो रहे विरोध को देखते हुए उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का मन बना लिया था। उस समय सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में नहीं थीं लेकिन वे ममता को कांग्रेस में ही रहने के लिए रोकना चाहती थीं। बताया जाता है कि ममता से इस मुद्दे पर बात करने के लिए उन्होंने 22 दिसंबर 1997 की कंपकंपाती रात में दस जनपथ के दरवाजे खुलवाए थे।
सोनिया से मुलाकात के बाद ममता ने उनसे कहा कि आपका ख्याल रखते हुए मैंने कई दिनों तक इंतजार किया है। सीताराम केसरी जी (तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष) मुझे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने को तैयार नहीं है। अब देर हो गई है, तृणमूल इसका जवाब देगी। ममता केवल इस शर्त पर कांग्रेस में लौटने को तैयार थीं कि सोनिया गांधी पार्टी की कमान संभाल लें। हालांकि सोनिया ने 1998 में जब पार्टी की कमान संभाल ली तब तक ममता बनर्जी तृममूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल में अलग पहचान बना चुकी थीं।
जब सोनिया ने पूछा था कांग्रेस में कब लौटोगी?
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से ममता बनर्जी के बहुत अच्छे रिश्ते थे। राजीव गांधी ने उन्हें अपना पूरा समर्थन दिया था और उन पर भरोसा जताया था। राजीव गांधी ने ही उन्हें यूथ कांग्रेस का महासचिव भी बनाया था। इस नाते सोनिया गांधी से भी ममता के करीबी रिश्ते रहे। राजनीति के जानकार कहते हैं कि कभी-कभी लगता था जैसे दोनों के बीच भावनात्मक रिश्ता रहा है। इसकी एक झलक तब देखने को मिली थी जब ममता बनर्जी एनडीए की मंत्री के तौर पर राष्ट्रपति भवन में शपथ ले रही थीं। दोनों पहले गले मिलीं। फिर सोनिया गांधी ने उन्हें बधाई देते हुए पूछा-कांग्रेस में कब लौटोगी? सोनिया ने यह सवाल तो पूछ लिया लेकिन उन्हें मालूम था कि ममता बनर्जी अब बहुत आगे निकल चुकी हैं और उन्होंने भारतीय राजनीति में अपना कद बढ़ा लिया है इसलिए अब उनका लौट कर कांग्रेस में आना मुश्किल है।
विदेश मूल के मुद्दे पर ममता ने दिया सोनिया का साथ
ममता भले ही कांग्रेस में न लौटीं लेकिन राजीव गांधी की वजह से सोनिया गांधी के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता बना रहा। ममता ने भी सोनिया का साथ तब दिया जब विदेशी मूलके मुद्दे पर विरोधियों ने सोनिया को जाम कर घेर रखा था। ममता ने एनडीए के उस विधेयक को पारित नहीं होने दिया जिसमें विदेशी मूल के किसी व्यक्ति को देश के सबसे बड़े पद पर बैठने पर रोक लगाने का प्रस्ताव था।
गांधी परिवार से रिश्तों में दूरी कब आई?
सोनिया-राहुल से ममता बनर्जी की दूरी पिछले कुछ सालों से शुरू हुई है। जब से राहुल गांधी पार्टी के मसलों पर फैसले लेने लगे थे। हालांकि इसकी शुरुआत 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही हो गई थी। 2009 से पहले एनडीए का हिस्सा रहीं ममता बनर्जी ने इस चुनाव में यूपीए का साथ दिया, लेकिन इस दौरान कांग्रेस और टीएमसी के रिश्ते खराब ही होते गए। साल 2011 में वे यूपीए से अलग हो गईं और 2012 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बन गईं।
ममता के शपथ ग्रहण समारोह में सोनिया-राहुल को भी बुलाया गया, पर दोनों नेताओं ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम का हवाला देकर वहां जाने से मना कर दिया। इससे ममता के मन में सोनिया-राहुल के लिए खटास भर गई। खटास भरे रिश्तों के बीच 2016 में ममता बनर्जी ने राहुल गांधी को गठबंधन करने का प्रस्ताव दिया जिसे राहुल ने अनसुना कर दिया। ममता अब तक मानती हैं कि प्रणब मुखर्जी ने ही दोनों को शपथ ग्रहण समारोह में जाने से मना कर दिया था।