अयोध्या: सुब्रह्मण्यम ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को घेरा, ओवैसी ने श्री श्री पर उठाए सवाल
- यह बड़ा सम्मान: श्री श्री रविशंकर
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला नेक नीयत वाला: मायावती
- मध्यस्थ निष्पक्ष हो तो निकल सकता रास्ता: ओवैसी
- सुप्रीम कोर्ट की अच्छी पहल, निकल सकता है हल: सतेंद्र दास
- पहले भी पहल, नहीं हुआ कोई फायदा: स्वामी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उच्चतम न्यायालय ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को शुक्रवार को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला को मध्यस्थता के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस समिति में आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर और उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्रीराम पंचू शामिल हैं। श्री श्री रविशंकर की निष्पक्षता को लेकर हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अदालत को उनकी जगह किसी तटस्थ शख्स को समिति में शामिल करना चाहिए था।
वहीं हर मामले पर अपनी बेबाक राय रखने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेश पर कहा, 'यह दुखद है कि केवल दो प्रधानमंत्रियों ने अयोध्या विवाद को सुलझाने की कोशिश की है। एक थे राजीव गांधी और दूसरे नरसिम्हा राव। दोनों कांग्रेस के थे। लेकिन आज इटली के प्रभाव में आकर कांग्रेस इस मामले को घुमा रही है।'
पैनल चीफ नियुक्त किए गए सेवानिवृत्त न्यायाधीश इब्राहिम कलीफुल्ला ने कहा, 'मैं समझता हूं कि उच्चतम न्यायालय ने मेरी अध्यक्षता में एक मध्यस्थता समिति बनाई है। मुझे अभी ऑर्डर की कॉपी नहीं मिली है। मैं कह सकता हूं कि अगर समिति का गठन किया गया है तो हम इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।'
मध्यस्थता समिति के सदस्य आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने कहा, 'सबका सम्मान करना, सपनों को साकार करना, सदियों के संघर्ष का सुखांत करना और समाज में समरसता बनाए रखना- इस लक्ष्य की ओर सबको चलना है।'
वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने अदालत के आदेश पर कहा, 'हम पहले ही कह चुके हैं कि हम मध्यस्थता में सहयोग करेंगे। अब हमें जो भी कहना है वह हम बाहर नहीं बल्कि मध्यस्थता पैनल के सामने कहेंगे।'
केंद्रीय मंत्री उमा भारती का कहना है कि मंदिर वहीं बनना चाहिए जहां भगवान राम का जन्म हुआ। उन्होंने कहा, 'मैं उच्चतम न्यायालय के आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगी। मैं अदालत द्वारा नामित मध्यस्थों पर टिप्पणी नहीं करना चाहती। लेकिन एक हिंदू होने के नाते मैं सोचती हूं कि मंदिर वहीं बनना चाहिए जहां भगवान राम का जन्म हुआ है।'
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने अदालत के आदेश पर कहा, 'श्री श्री रविशंकर जिन्हें कि मध्यस्थ के तौर पर नियुक्त किया गया है उन्होंने पहले यह बयान दिया था कि 'अगर अयोध्या पर मुसलमानों ने अपना दावा नहीं छोड़ा, तो भारत सीरिया बन जाएगा।' बेहतर होता यदि न्यायालय किसी तटस्थ व्यक्ति की नियुक्त करता।'
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर कहा,
'उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सवाल खड़े नहीं कर सकते। अतीत में एक समाधान पर पहुंचने की कोशिश की गई लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। भगवान राम का कोई भी भक्त या संत राम मंदिर के निर्माण में देरी नहीं चाहते हैं।'
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अदालत के फैसले पर कहा, 'अयोध्या मामले का सभी पक्षों को स्वीकार्य तौर पर निपटारे के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा फैजाबाद में बंद कमरे में बैठकर मध्यस्थता कराने का जो आदेश आज पारित किया है वह नेक नीयत पर आधारित ईमानदार प्रयास लगता है, इसलिए बीएसपी उसका स्वागत करती है।'
It is an irony that only two Prime Ministers did anything to advance the cause of building the Ram Temple in Ayodhya: Rajiv Gandhi and Narasimha Rao both Congress. And yet Congress now has turned 180 degrees today. Italian has nfluence!!
— Subramanian Swamy (@Swamy39) March 8, 2019