ओमिक्रॉन वायरस: डेल्टा के मुकाबले यह सिर्फ 24 घंटे में करता है संक्रमित, लेकिन लक्षण सामान्य फ्लू जैसे
दिल्ली एम्स में गैस्ट्रोइंट्रोलोजी विभाग और एम्स में कोविड वार्ड के डॉक्टर अनन्य गुप्ता कहते हैं कि इस बदले हुए स्वरूप की खासियत यही है कि यह बहुत एग्रेसिव है। यानी बहुत सक्रियता के साथ यह न सिर्फ लोगों को संक्रमित कर रहा है बल्कि 24 घंटे के भीतर उसके लक्षण भी सामने आ रहे हैं...
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कोरोना वायरस का बदला स्वरूप ओमिक्रॉन कितनी तेज गति से संक्रमण फैलाता है, इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर एक दिन में लक्षण सामने आने लगते हैं और व्यक्ति बीमार हो जाता है। जबकि डेल्टा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर सामने वाले व्यक्ति में कम से कम पांच से छह दिन लगते थे। लेकिन एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदले हुए वायरस की यही मारक क्षमता उसका सबसे कमजोर पहलू भी है। इसलिए डरने की और पैनिक होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, लेकिन अलर्ट और सजग रहना बेहद जरूरी है।
वैक्सीन लेने वालों पर कोई खास असर नहीं
दिल्ली एम्स में गैस्ट्रोइंट्रोलोजी विभाग और एम्स में कोविड वार्ड के डॉक्टर अनन्य गुप्ता कहते हैं कि इस बदले हुए स्वरूप की खासियत यही है कि यह बहुत एग्रेसिव है। यानी बहुत सक्रियता के साथ यह न सिर्फ लोगों को संक्रमित कर रहा है बल्कि 24 घंटे के भीतर उसके लक्षण भी सामने आ रहे हैं। हालांकि एम्स के कोरोना वार्ड में दाखिल मरीज और यहां इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों की स्टडी के बाद इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह बहुत कम घातक है। खासकर जिन लोगों ने डबल वैक्सीन लगवाई है अगर वह इस वायरस से संक्रमित हो गए हैं, तो उन्हें अस्पताल आने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है। वे कहते हैं इसके अलावा एम्स पहुंच रहे मरीजों के आधार पर एक बात और देखी गई है कि जो लोग पहले एक बार कोविड से संक्रमित हो चुके हैं और वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं, उन पर यह वायरस कोई असर नहीं दिखा पा रहा है।
गले और ऊपरी हिस्से तक ही ओमिक्रॉन का असर
डॉक्टर अनन्य कहते हैं कि धीरे-धीरे डेल्टा की जगह ओमिक्रॉन ले रहा है। जो इस महामारी और उसके डर को खत्म करने के लिए सही है। उनके मुताबिक इस बीमारी में जोड़ों का दर्द, पीठ दर्द, सिरदर्द, नाक बहना सबसे आम लक्षण हैं। जबकि इसके विपरीत डेल्टा वायरस में बुखार सबसे आम और महत्वपूर्ण लक्षण था। इसके अलावा डेल्टा में जोड़ों का दर्द और पीठ दर्द कम था। एम्स के अपने शोध से भी पता चला है कि म्यूटेंट वायरस ओमिक्रॉन 70 फीसदी से ज्यादा गले के ऊपरी हिस्से में ही रुक जाता है। बहुत कम फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे एंटीबॉडी बनाने और इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए शरीर को पर्याप्त समय मिल जाता है। नतीजतन मरीज को आईसीयू और वेंटिलेटर की ज़रूरत न के बराबर पड़ रही है।
ओमिक्रॉन से जुड़े राहत भरे तथ्य
एम्स में गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी के डॉक्टर अनन्य कहते हैं कि दुनिया भर में हुए ओमिक्रॉन पर शोध में बहुत राहत भरे तथ्य सामने आये हैं जिसमें यह प्रमुख हैं -
- बर्लिन में हुए शोध बताते हैं कि ओमिक्रॉन में सांस की नलियों में संक्रमण की संभावना कम होती है।
- ब्रिटेन में हुए अध्ययन से पता चलता है कि ओमिक्रॉन वायरल संक्रमण के लक्षण फ्लू की तरह हैं।
- हांगकांग में हुए शोध बताते हैं कि ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्तियों में गंभीर संक्रमण कम होते हैं।
- केप टाउन में ओमिक्रॉन पर हुए शोध से पता चलता है कि इसके लक्षण तीन दिन के भीतर ही खत्म हो जाते हैं। उसी से यह हार्ड इम्युनिटी बनाता है।