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उपलब्धि: ओडिशा के वैज्ञानिकों ने खोजी स्नेक ईल की एक नई प्रजाति, नाम रखा- ओफिचथस सूर्याई
Sun, 16 Jun 2024 08:29 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 16 Jun 2024 08:29 PM IST
सार
Ophichthus Suryai: एक नई सर्प ईल प्रजाति की खोज ओडिशा के गोपालपुर में की गई है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिकों ने एक नई प्रजाति की खोजी है।
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ओडिशा के वैज्ञानिकों ने खोजी स्नेक ईल की एक नई प्रजाति
- फोटो : zsi.gov.in
विस्तार
ओडिशा के गंजम जिले के गोपालपुर में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिकों ने राज्य के कई मुहाना पारिस्थितिकी प्रणालियों से स्नेक ईल की एक नई प्रजाति की खोजी है। गोपालपुर के जेडएसआई के मुहाना जीवविज्ञान क्षेत्रीय केंद्र (ईबीआरसी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक अनिल महापात्रा ने बताया कि राज्य मत्स्य विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक सूर्य कुमार मोहंती के सम्मान में नई प्रजाति का नाम 'ओफिचथस सूर्याई' रखा गया है।
बालासोर में वैज्ञानिकों ने इकट्ठा किए थे कई नमूने
बालासोर जिले के तलसारा में सुवर्णरेखा नदी, जगतसिंहपुर जिले के पारादीप और गंजम जिले के सुनापुर के पास बाहुदा नदी से वैज्ञानिकों ने बीते साल अलग-अलग वक्त पर कम से कम छह नमूने इकट्ठा किए थे। खोज का नेतृत्व करने वैज्ञानिक अनिल महापात्रा का कहना है कि जेडएसआई की प्रयोगशाला में गहन अध्ययन और डीएनए सहित कई परीक्षण करने के बाद हमने पुष्टि की कि यह एक नई प्रजाति थी।
नई प्रजाति की है खास पहचान- वैज्ञानिक
वैज्ञानिक अनिल महापात्रा ने कहा कि नई प्रजाति को इसके निकट सहयोगी समकक्षों ओफिचथस एलेनी, ओफिचथस जोफिस्टियस और ओफिचथस अल्टीपेनिस और इस वंश के अन्य सदस्यों से इस आधार पर अलग पहचाना जा सकता है। नई प्रजाति का पृष्ठीय पंख मूल (डीएफओ) गिल खोलने के ठीक ऊपर या थोड़ा आगे होता है।
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ओफिचथस वंश से हैं संबंधित- अनिल महापात्रा
इसकी अनूठी कशेरुकाओं की संख्या और मैक्सिला और मैंडिबल दोनों पर कई पंक्तियों वाले दांतों का पैटर्न होता है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि वे ओफिचथस वंश से संबंधित हैं। इसी साल 13 जून को ओफिचथस सूर्याई की इस नई प्रजाति की खासियतों को एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका बुलेटिन ऑफ मरीन साइंस ने अपने नवीनतम संस्करण में छापा था।
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बालासोर में वैज्ञानिकों ने इकट्ठा किए थे कई नमूने
बालासोर जिले के तलसारा में सुवर्णरेखा नदी, जगतसिंहपुर जिले के पारादीप और गंजम जिले के सुनापुर के पास बाहुदा नदी से वैज्ञानिकों ने बीते साल अलग-अलग वक्त पर कम से कम छह नमूने इकट्ठा किए थे। खोज का नेतृत्व करने वैज्ञानिक अनिल महापात्रा का कहना है कि जेडएसआई की प्रयोगशाला में गहन अध्ययन और डीएनए सहित कई परीक्षण करने के बाद हमने पुष्टि की कि यह एक नई प्रजाति थी।
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नई प्रजाति की है खास पहचान- वैज्ञानिक
वैज्ञानिक अनिल महापात्रा ने कहा कि नई प्रजाति को इसके निकट सहयोगी समकक्षों ओफिचथस एलेनी, ओफिचथस जोफिस्टियस और ओफिचथस अल्टीपेनिस और इस वंश के अन्य सदस्यों से इस आधार पर अलग पहचाना जा सकता है। नई प्रजाति का पृष्ठीय पंख मूल (डीएफओ) गिल खोलने के ठीक ऊपर या थोड़ा आगे होता है।
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ओफिचथस वंश से हैं संबंधित- अनिल महापात्रा
इसकी अनूठी कशेरुकाओं की संख्या और मैक्सिला और मैंडिबल दोनों पर कई पंक्तियों वाले दांतों का पैटर्न होता है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि वे ओफिचथस वंश से संबंधित हैं। इसी साल 13 जून को ओफिचथस सूर्याई की इस नई प्रजाति की खासियतों को एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका बुलेटिन ऑफ मरीन साइंस ने अपने नवीनतम संस्करण में छापा था।