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ओडिशा में खाकी शर्मसार: शिकायत करने गई तो थानेदार ने दी सात साल जेल की धमकी, बेहोश हुई नाबालिग लड़की
Sun, 17 May 2026 10:38 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, बारीपदा।
पीटीआई, बारीपदा।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 17 May 2026 10:38 PM IST
सार
रक्षक ही भक्षक बन जाए तो जनता न्याय के लिए कहां जाए? ओडिशा में एक नाबालिग पीड़िता को इंसाफ देने के बजाय खाकी ने इस कदर डराया कि वह अस्पताल पहुंच गई। अब देखना यह है कि सीसीटीवी की जांच के बाद इस लापरवाह अधिकारी पर कानून का डंडा कब चलता है?
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ओडिशा पुलिस ( प्रतीकात्मत तस्वीर)
- फोटो : PTI
विस्तार
ओडिशा के मयूरभंज जिले से खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। मोराडा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गई एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की पुलिस अधिकारी की धमकी सुनकर बेहोश हो गई। आरोपी पुलिस अधिकारी ने नाबालिग को धमकी दी थी कि यदि उसकी प्रताड़ना की शिकायत झूठी निकली तो उसे सात साल की जेल की सजा काटनी होगी। इस घटना के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ गई। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मनचले की हरकतों से परेशान थी पीड़िता
पीड़ित नाबालिग लड़की ने हाल ही में कक्षा 10 की परीक्षा पास की है। एक स्थानीय युवक उसे लगातार शादी का प्रस्ताव देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। आरोपी की हरकतों से तंग आकर नाबालिग अपनी मां के साथ मोराडा थाने पहुंची थी। पीड़िता की मां का आरोप है कि मोराडा थाने के प्रभारी निरीक्षक सुमीत सोरेन ने उनकी शिकायत लिखने के बजाय उनकी बेटी से असंबंधित और अजीबो-गरीब सवाल पूछे। पुलिस अधिकारी ने न्याय देने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद भड़का आईआईसी
थाने से मदद न मिलने पर पीड़ित परिवार ने बेटनोटी की एसडीपीओ मिनाती बिस्वाल से फोन पर संपर्क किया। एसडीपीओ के कड़े निर्देश के बाद मोराडा थाना पुलिस ने प्राथमिकी तो दर्ज कर ली, लेकिन आईआईसी सुमीत सोरेन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बयान दर्ज करने के दौरान अधिकारी ने नाबालिग पर चिल्लाते हुए शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। अधिकारी ने लड़की को धमकी दी कि झूठी शिकायत करने पर उसे सात साल के लिए जेल भेज दिया जाएगा।
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यह भी पढ़ें: बंगाल: 'गोहत्या से बचें मुसलमान, गाय को घोषित करें राष्ट्रीय पशु', कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम की अपील
थाने से निकलते ही गिरी नाबालिग
थाने के भीतर मिली इस धमकी और मानसिक प्रताड़ना को नाबालिग बर्दाश्त नहीं कर पाई। पुलिस स्टेशन से बाहर आते ही वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में उसे बारीपदा के जिला मुख्यालय अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस घटना को लेकर मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजद के जिला अध्यक्ष सुदाम मरांडी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल जाकर पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की। मरांडी ने कहा कि महिला पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में नाबालिग को डराना-धमकाना कानूनन अपराध है। उन्होंने आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सीसीटीवी फुटेज से होगी मामले की जांच
मयूरभंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार गोचायत ने बताया कि आरोपी युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया गया है।
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मनचले की हरकतों से परेशान थी पीड़िता
पीड़ित नाबालिग लड़की ने हाल ही में कक्षा 10 की परीक्षा पास की है। एक स्थानीय युवक उसे लगातार शादी का प्रस्ताव देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। आरोपी की हरकतों से तंग आकर नाबालिग अपनी मां के साथ मोराडा थाने पहुंची थी। पीड़िता की मां का आरोप है कि मोराडा थाने के प्रभारी निरीक्षक सुमीत सोरेन ने उनकी शिकायत लिखने के बजाय उनकी बेटी से असंबंधित और अजीबो-गरीब सवाल पूछे। पुलिस अधिकारी ने न्याय देने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
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वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद भड़का आईआईसी
थाने से मदद न मिलने पर पीड़ित परिवार ने बेटनोटी की एसडीपीओ मिनाती बिस्वाल से फोन पर संपर्क किया। एसडीपीओ के कड़े निर्देश के बाद मोराडा थाना पुलिस ने प्राथमिकी तो दर्ज कर ली, लेकिन आईआईसी सुमीत सोरेन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बयान दर्ज करने के दौरान अधिकारी ने नाबालिग पर चिल्लाते हुए शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। अधिकारी ने लड़की को धमकी दी कि झूठी शिकायत करने पर उसे सात साल के लिए जेल भेज दिया जाएगा।
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थाने से निकलते ही गिरी नाबालिग
थाने के भीतर मिली इस धमकी और मानसिक प्रताड़ना को नाबालिग बर्दाश्त नहीं कर पाई। पुलिस स्टेशन से बाहर आते ही वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में उसे बारीपदा के जिला मुख्यालय अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस घटना को लेकर मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजद के जिला अध्यक्ष सुदाम मरांडी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल जाकर पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की। मरांडी ने कहा कि महिला पुलिस अधिकारी की अनुपस्थिति में नाबालिग को डराना-धमकाना कानूनन अपराध है। उन्होंने आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सीसीटीवी फुटेज से होगी मामले की जांच
मयूरभंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार गोचायत ने बताया कि आरोपी युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया गया है।