दुनिया के 2.4 अरब लोगों को चाहिए शौचालय, भारत की गंदगी से भर जाएंगे 8 ओलिंपिक स्विमिंग पूल
- सरकार ने स्वच्छ भारत के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपए का बजट रखा है।
- भारत में 60.4 फीसदी लोगों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
- भारत में हर रोज निकलने वाला कूड़ा और गंदगी ओलिंपिक स्विमिंग पूल के आकार के 8 स्विमिंग पूल भर सकती है।
- दुनियाभर के 2.4 अरब लोगों के पास शौचालय की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है।
- शौचालयों के बिना जीवन गुजारने वाले शहरी लोगों की संख्या के मामले में विश्व में भारत शीर्ष पर है।
विस्तार
देश की मोदी सरकार ने स्वच्छता की अलख जगाने के लिए 2014 में गांधी जयंती के दिन स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। तब से अबतक इस अभियान में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए है। सरकार इन दिनों सबको शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने की नीति पर काम कर रही है। सरकार ने स्वच्छ भारत के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपए का बजट रखा है।
भारत के अलावा बाकि दुनिया की तस्वीर भी ज्यादा अलग नहीं दिखती। आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर के 2.4 अरब लोगों के पास शौचालय की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो स्थिति में मामूली सुधार नजर आता है। पिछले साल 2.5 अरब लोग बिना शौचालय के रह रहे थे। डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ की साझा रिपोर्ट भी इसी बात कि तस्दीक करती है, वैश्विक स्तर पर हर दस में से एक व्यक्ति खुले में शौच जाने को मजबूर है।
सरकार के प्रयासों से देशभर में पिछले चार साल में बड़ा बदलाव आया है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के अनुसार 89 फीसदी भारतीयों के पास अब शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। 2014 में यह आंकड़ा महज 40 फीसदी था। इस साल के अंत तक 11.5 करोड़ शौचालय निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अबतक आठ करोड़ से ज्यादा शौचालय बन चुके हैं। देश जहां एक ओर अंतरिक्ष के क्षेत्र में अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है वहीं यहां खुले में शौच करने वालों की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है।
स्वच्छता के क्षेत्र में काम करने वाले ब्रिटेन के एक गैर सरकारी संगठन, वॉटरऐड की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षित और निजी शौचालयों के बिना जीवन गुजारने वाले शहरी लोगों की संख्या के मामले में विश्व में भारत शीर्ष पर है।
देश में शौचालय की पहुंच
| लोग (प्रतिशत) | साल |
| 50.6% | 2015-16 |
| 64.2% | 2016-17 |
| 82.6% | 2017-18 |
| 88.9% | 2018-19 |
दक्षिण एशिया के आठ देशों में भारत सातवें नंबर पर
शहरों की गंदगी भर सकती है आठ ओलिंपिक स्विमिंग पूल
आठ करोड़ शौचालयों के निर्माण के बावजूद अब भी 15.7 करोड़ लोग बिना शौचालय के जीवन बिता रहें हैं। शहरी इलाकों में खुले में शौच जाने वालों की संख्या 4 करोड़ 10 लाख है। वर्ल्ड टॉयलेट डे पर जारी एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर रोज निकलने वाला कूड़ा और गंदगी ओलिंपिक स्विमिंग पूल के आकार के 8 स्विमिंग पूल भर सकती है। साथ ही इस रिपोर्ट में भारत के गांवों से शहरों में हो रहे पलायन को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। तेजी से शहरों का रूप ले रहे इलाकों में 38 करोड़ 10 लाख लोग रह रहे हैं। यह जनसंख्या पश्चिमी यूरोप की जनसंख्या के लगभग बराबर है।