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Nuh Violence: हरियाणा के चुनावों से पहले यह मुद्दा हुआ क्लीन बोल्ड! तीन दंगों से बदला सियासी नजरिया

Fri, 04 Aug 2023 06:34 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 04 Aug 2023 06:34 PM IST
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सार
Nuh Violence: हरियाणा के गुर्जर समाज कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुदेश कुमार कहते हैं कि इन दंगों ने हरियाणा की छवि को पूरी तरीके से धूमिल कर दिया था। वह कहते हैं कि इन दंगों की आड़ में किए जाने वाले मकसद से भलीभांति वाकिफ हो चुके हैं...
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Nuh Violence: Caste communities rejected politics in Haryana Nuh riots
Nuh Violence - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

हरियाणा के नूंह दंगों में जातिगत समुदायों ने सियासत के उसे मुद्दे को क्लीन बोर्ड कर दिया, जिसके दम पर हरियाणा में चुनावों से पहले की राजनीति गर्म होने लगी थी। नूंह दंगों के दौरान ही राजनीतिक दलों की ओर से यह कहा जाने लगा था कि विधानसभा चुनावों से पहले पूरे दंगे कहीं सियासी रुख की ओर न चल पड़ें। लेकिन दो जाति समुदायों के बीच में हुई हिंसा में सबसे पहले जाट समुदाय ने अपना स्टैंड क्लियर किया। अब हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश और राजस्थान के गुर्जर समुदाय ने दो सियासी दलों के बीच हुई हिंसा पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि जिन दो समुदायों के बीच में हिंसा हुई है, वह हमारे अपने हैं। उनके समुदाय का न इस हिंसा में कोई समर्थन होगा और ना ही वह किसी राजनैतिक दल के सियासी हथियार बनने वाले हैं। गुर्जर और जाट समुदाय से जुड़े लोगों का कहना है कि हरियाणा में बीते कुछ सालों में हुए तीन दंगों के बीच में हमने अपनों को ही खोया है। इसलिए नूंह में हुए दंगे का पूरा विरोध करते हैं।

तीन दंगों ने बदली हरियाणा की सियासी चाल

बीते कुछ सालों में जाट आंदोलन से लेकर राम रहीम की गिरफ्तारी और रामपाल मामले में तीन बड़े दंगे हुए। हरियाणा के गुर्जर समाज कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुदेश कुमार कहते हैं कि इन दंगों ने हरियाणा की छवि को पूरी तरीके से धूमिल कर दिया था। वह कहते हैं कि इन दंगों की आड़ में किए जाने वाले मकसद से भलीभांति वाकिफ हो चुके हैं। इसलिए नूंह में हुई हिंसा में उनके समाज के लोग न सिर्फ इसका विरोध करते हैं, बल्कि आपसी भाईचारे को कायम रखने के लिए सरकार से सख्त से सख्त कदम उठाने के लिए भी मांग कर रहे हैं। गुर्जर समाज कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष सुदेश का मानना है कि उनके समाज के लोग अब इतना आगे निकल चुके हैं कि वह इन दंगों और आपसी फसादों में बिल्कुल नहीं पड़ना चाहते हैं। क्योंकि इन दंगों से सिर्फ और सिर्फ सियासत साधी जाती है। और वह नहीं चाहते हैं कि उनके समाज के लोग किसी भी राजनीतिक दल के लिए सियासी हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएं।

सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि नूंह में हुए दंगों का असर राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में भी बढ़ने की बात कही जा रही थी। यही वजह है कि अपने-अपने जाति समुदाय के लोगों ने इस हिंसा में बहुत समझदारी का परिचय देते हुए अपने समाज को इन सब से दूर रहने की अपील की। राजस्थान के नदबई से विधायक और प्रमुख गुर्जर नेता जोगेंद्र अवाना आरोप लगाते हैं कि यह तो हरियाणा में भाजपा सरकार ने जानबूझकर माहौल खराब करने के लिए दंगे करवाएं हैं। उनका कहना है कि हरियाणा में हुई इस हिंसा का असर राजस्थान के अलवर और भरतपुर जैसे जिलों में भी हो सकता था। लेकिन उन्होंने अपने समुदाय से जुड़े हुए लोगों से अपील करते हुए इसे सियासी दंगा बताते हुए न सिर्फ शांति की अपील की, बल्कि हिंदू और मुसलमानों से भी शांति बनाए रखने की बात कही। अवाना कहते हैं कि अब हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर प्रदेश के गुर्जरों को पता चल गया है कि दंगों की आड़ में कितनी सियासत हो रही है। यही वजह है कि हरियाणा में हुए बीते कुछ सालों के तीन दंगों से सबक लेते हुए सभी जाति समुदाय में हुई हिंसा का न सिर्फ भारी विरोध किया, बल्कि उसके पीछे के सभी सियासी मक़सदों का बायकाट भी किया है।

पश्चिमी यूपी में भी ऐसे क्लीन बोल्ड हुआ मुद्दा

हरियाणा में हुई हिंसा के बाद जिन राज्यों में इसके असर का अनुमान जताया जा रहा था कि उन सभी जगहों पर फिलहाल यह मामला बिल्कुल बढ़ता हुआ नहीं दिख रहा हैं। सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए रविंद्र गुर्जर कहते हैं कि अलग-अलग जाति समुदाय के प्रमुख नेताओं ने इस मामले में जितनी समझदारी दिखाई, अगर वह हकीकत में जमीन पर ही उतरी रहे, तो सियासी दलों का जातिगत एजेंडा पूरी तरीके से फेल हो जाएगा। इसी तरीके से उत्तर प्रदेश के सरधना से विधायक अतुल प्रधान ने भी अपील करते हुए गुर्जर समाज के लोगों से कहा कि वह इस तरीके के दंगों में बिल्कुल न फंसे। वह कहते हैं कि उनके समुदाय के युवाओं को बरगला कर कुछ राजनीतिक एजेंडे साधे जा रहे हैं। इसलिए वह नहीं चाहते हैं कि उनके समुदाय से जुड़े हुए लोग किसी भी राजनीतिक दल के लिए महज एक इस्तेमाल किए जाने वाले समुदाय के तौर पर जाने पहचाने जाएं।

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