अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए लगेगा इस 'मसाला' बांड का तड़का, जानिए कैसे करेगा काम
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने शुक्रवार को कहा कि उसने भारतीय कंपनियों की ओर से जारी किए जाने वाले मसाला बांड और विदेशी मुद्रा बांड को लेकर लंदन स्टॉक के साथ अनुबंध किया गया है। इसके तहत मसाला बांड और विदेशी मुद्रा बांड को लेकर दोनों एक्सचेंजों में सूचीबद्धता व्यवस्थित की जाएगी। एनएसई ने कहा कि दोनों पक्षों ने भारत में 2019 में छोटे एवं मध्यम उपक्रमों को पूंजी जुटाने में मदद के लिए एलिट-एलएसईजी व्यवसाय समर्थन पहल शुरू करने पर भी सहमति जताई है। सहमति पत्र पर एनएसई के प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विक्रम लिमये तथा लंदन स्टॉक एक्सचेंज पीएलसी के सीईओ निखिल राठी ने हस्ताक्षर किए।
क्या है मसाला बांड
मसाला बांड भारतीय रुपए में विदेशों में जारी किया जाने वाला बांड हैं। इसे भारतीय कंपनियां विदेशों में निवेश के लिए जारी करती हैं। इस बांड का नाम भारतीय मसालों पर रखा गया है। मसाला बांड से पहसे भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेश के लिए जो बांड जारी करती थीं, वह डॉलर में हुआ करता था। उन स्थितियों में डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव होने पर इसका खामियाजा भारतीय कंपनियों को भुगतना पड़ता था।
यह है मसाला बांड की विशेषता
मसाला बांड के माध्यम से भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजार में निवेश करना काफी सहूलियत भरा होता है। साथ ही इस बांड को जारी करने वाली कंपनियों पर करेंसी रिस्क भी न के बराबर रहता है। इस बांड के माध्यम से यदि विदेशी निवेशक भारतीय कंपनी में निवेश करता है तो करेंसी रिस्क उस पर ही रहता है। भारतीय कंपनियों की ओर से जारी किए जाने वाले बाकी बांड्स की सरह मसाला बांड का मैच्योरिटी पीरियड तीन साल, पांच साल, सात साल और 10 साल है।