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सुप्रीम कोर्ट का 1971 और 1987 के बीच भारत में पैदा हुए लोगों की नागरिकता की स्थिति पर आदेश सुरक्षित
Thu, 08 Aug 2019 05:49 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 08 Aug 2019 05:49 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने असम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) मामले पर गुरुवार को 1971 और 1987 के बीच भारत में पैदा हुए लोगों की नागरिकता की स्थिति पर आदेश सुरक्षित रखा। इन लोगों को एनआरसी सूची में शामिल नहीं किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "हमारे आदेशों और निर्णयों के बारे में दूसरे क्या कहते हैं, हम उससे परेशान नहीं होंगे। हम एनआरसी की अंतिम सूची आने तक उसकी देखरेख करते रहेंगे, जिसके लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है।"
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बता दें कि 23 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी प्रकाशित करने की तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दी थी। अदालत ने अंतिम सूची तैयार करने के लिए एनआरसी कोऑर्डिनेटर को 31 अगस्त तक का समय दिया है।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर केंद्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। केंद्र और राज्य सरकार ने मांग की थी कि एनआरसी डाटा के 20 फीसदी ड्राफ्ट की दोबारा जांच की जाए। याचिका में सरकार ने कहा था कि ऐसा पता चला है कि ड्राफ्ट से कई भारतीय नागरिक बाहर हो गए हैं और अवैध बांग्लादेशियों को इसमें शामिल किया गया है।
दोनों सरकारों ने एनआरसी की डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाने का आग्रह किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इतनी जल्दी एनआरसी संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन रखी थी। बीते साल 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट से बाहर रखे गए 10 फीसदी लोगों का दोबारा सत्यापन कराने का आदेश दिया था।
बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में ये सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यहां के अधिकतर मूल निवासियों को सूची से बाहर कर दिया गया है। बीते साल अगस्त माह में एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ था जिससे राज्य के 40 लाख लोग बाहर हो गए थे। इसके बाद एनआरसी कोऑर्डिनेटर ऑफिस को 36.2 लाख आवेदन नामों के शामिल करने के लिए और दो लाख आवेदन बाहर करने के लिए मिले थे।
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सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "हमारे आदेशों और निर्णयों के बारे में दूसरे क्या कहते हैं, हम उससे परेशान नहीं होंगे। हम एनआरसी की अंतिम सूची आने तक उसकी देखरेख करते रहेंगे, जिसके लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है।"
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The Supreme Court Bench says, 'We will not be bothered by what others say about our orders and judgments. We will continue to oversee NRC finalised as per the scheduled date of August 31.' #NRC https://t.co/ZVDyV0oZKl
— ANI (@ANI) August 8, 2019
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बता दें कि 23 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी प्रकाशित करने की तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दी थी। अदालत ने अंतिम सूची तैयार करने के लिए एनआरसी कोऑर्डिनेटर को 31 अगस्त तक का समय दिया है।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर केंद्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। केंद्र और राज्य सरकार ने मांग की थी कि एनआरसी डाटा के 20 फीसदी ड्राफ्ट की दोबारा जांच की जाए। याचिका में सरकार ने कहा था कि ऐसा पता चला है कि ड्राफ्ट से कई भारतीय नागरिक बाहर हो गए हैं और अवैध बांग्लादेशियों को इसमें शामिल किया गया है।
दोनों सरकारों ने एनआरसी की डेडलाइन 31 जुलाई से बढ़ाने का आग्रह किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इतनी जल्दी एनआरसी संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन रखी थी। बीते साल 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट से बाहर रखे गए 10 फीसदी लोगों का दोबारा सत्यापन कराने का आदेश दिया था।
असम सरकार का तर्क
असम सरकार के अनुसार राज्य के कई मूल निवासियों ने एनआरसी की सूची में अपना नाम नहीं पाया, क्योंकि उनके पास दस्तावेजों की कमी थी। न ही इन लोगों ने एनआरसी में खुद को शामिल करने के लिए कोई आवेदन किया। केवल इतना ही नहीं इनमें से कई लोगों को विदेशी भी माना जा रहा है, जो यहां काम कर रहे हैं। वहीं कई विदेशी होने के बावजूद एनआरसी अधिकारियों के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि रिश्वत लेकर एनआरसी अधिकारी विदेशियों का नाम इसमें शामिल कर रहे हैं।बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में ये सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यहां के अधिकतर मूल निवासियों को सूची से बाहर कर दिया गया है। बीते साल अगस्त माह में एनआरसी का अंतिम ड्राफ्ट प्रकाशित हुआ था जिससे राज्य के 40 लाख लोग बाहर हो गए थे। इसके बाद एनआरसी कोऑर्डिनेटर ऑफिस को 36.2 लाख आवेदन नामों के शामिल करने के लिए और दो लाख आवेदन बाहर करने के लिए मिले थे।