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Hindi News ›   India News ›   Now you can listen bhajans or watch videos during MRI in India

अब फिल्म देखते या भजन सुनते हुए करवा सकते हैं MRI, नहीं होगी घबराहट

Thu, 22 Aug 2019 08:38 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 22 Aug 2019 08:38 PM IST
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Now you can listen bhajans or watch videos during MRI in India
MRI Technology - फोटो : Signa Architect GE

बदलते वक्त के साथ इलाज का तरीका भी बदल रहा है। नई तकनीक के आने से अब इलाज भी पहले जैसा कष्टदायक नहीं रहा है। अब भारत में भी ऐसी नई तकनीक वाली एमआरआई मशीनें आ गई हैं, जिनमें एमआरआई के दौरान अब आप अपनी मनपसंद फिल्में देख सकते हैं। यू-ट्यूब पर मनचाहे गाने सुन सकते हैं यहां तक कि ध्यान लगाने के लिए गायत्री मंत्र का जाप भी सुन सकते हैं।

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नई मशीन में नहीं होती घुटन

जीई कंपनी ने नई एमआरआई तकनीक लॉन्च की है, जिसे देश में सबसे पहले दिल्ली के बीएलके अस्पताल उपलब्ध कराया गया है। इस तकनीकी को सिग्ना आर्टिस्ट एमआरआई सिस्टम नाम दिया गया है। बीएलके अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. प्रेम कुमार गणेशन ने अमर उजाला को बताया कि एमआरआई कराने के लिए पेशेंट को मशीन के रिक्त गोलाकार भाग में अंदर डाला जाता है, जिसे तकनीकी भाषा में गाएंट्री कहा जाता है। इस 'वाइड बोर सिस्टम' में जाने से कई मरीज घबराते हैं और जरुरी होने पर भी एमआरआई नहीं करवाते। लेकिन नई तकनीकी में गाएंट्री का व्यास 70 सेंटीमीटर कर दिया गया है, जिससे खुलेपन का अहसास होता है और इससे मरीज को घबराहट नहीं होती। वहीं सामान्य एमआरआई मशीनों में व्यास केवल 60 सेंटीमीटर होता है, जिसमें मरीजों को घुटन महसूस होती थी।

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सुन सकते हैं वीडियो, गाना या भजन

उन्होंने बताया कि गाएंट्री के सामने टीवी पैनल लगा रहता है, जिस पर मरीज अपना मनपसंद वीडियो, गाना या भजन चला सकता है। इस तरह उसका 'इन बोर एक्सपीरियंस' बहुत अच्छा रहता है और एमआरआई का बेहतर परिणाम मिलता है। अब तक की एमआरआई तकनीकी में आधे घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है, जबकि नई तकनीक से पांच मिनट से पंद्रह मिनट के बीच एमआरआई हो जाता है। नई तकनीकी में घुटने या कूल्हे के बदले जाने की स्थिति में बाद में आई किसी कमी का पता लगाने के लिए भी एमआरआई से सही स्थिति का पता लगाया जा सकेगा, जबकि पूर्व तकनीकी में मेटल आर्टिफैक्ट के कारण इमेजिंग खराब हो जाती है।

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आसपास की स्क्रीन देती है प्राकृतिक अहसास

नई तकनीकी में एमआरआई कराने आए व्यक्ति को यह अहसास कराने की कोशिश होती है कि वह बिल्कुल सामान्य है और उसे खुश रखने के लिए पूरी तरह से प्राकृतिक वातावरण देने की कोशिश होती है। इसके लिए आधुनिक तकनीक से आसपास की दीवारों पर प्राकृतिक माहौल दिखाया जाता है। छत पर भी एक पैनल लगा होता है, जिसमें अंतरिक्ष या किसी प्राकृतिक चित्रण का सामान्य अहसास देने की कोशिश की जाती है। इस तरह व्यक्ति पूरी तरह सामान्य प्राकृतिक वातावरण में होने का अनुभव करता है और एमआरआई कराने से घबराता नहीं है।

नए सॉफ्टवेयर से बेहतर परिणाम

नई तकनीकी से एमआरआई के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। इसके दौरान अब एमआरआई के दौरान व्यक्ति के हिलने-डुलने से भी कोई अंतर नहीं आता, जबकि इसके पहले व्यक्ति में हलचल होने से इमेजिंग प्रभावित हो जाती थी। इस नई तकनीकी के आने के बाद भी एमआरआई की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। 

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