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मरीज की आवाज बताएगी कोरोना वायरस का शरीर पर कितना है असर

Thu, 01 Oct 2020 04:57 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 01 Oct 2020 04:57 AM IST
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now the voice of patients will tell, how much effect on body from corona virus
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित वॉइस टेस्टिंग की जांच शुरू की गई है। एक सितंबर को शुरू हुई जांच के दौरान अब तक मुंबई में एक हजार कोरोना मरीजों की वॉइस टेस्टिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

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इस प्रक्रिया के तहत मरीज के आवाज से यह पता लगाया जा सकेगा कि कोरोना से संक्रमित होने पर मरीज के लिए कितना रिस्क है और उसके शरीर पर क्या असर पड़ता है।

मुंबई पश्चिमी उपनगर के नेस्को कोविड सेंटर में मरीजों के आवाज के नमूने लिए जा रहे हैं। कोविड सेंटर की डीन डॉ. नीलम अंद्राडे ने बताया कि मरीजों के आवाज के नमूने का डाटा इकट्ठा किया जा रहा है। आगामी 15 अक्तूबर तक 2000 कोरोना मरीजों के आवाज का डाटा इकट्ठा कर लिया जाएगा।
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इसके बाद आवाज के नमूने को इस्रायल की वेकेलिस हेल्थकेयर कंपनी के पास भेजा जाएगा जिसकी रिपोर्ट छह महीने में आएगी। डॉ. अंद्राडे ने बताया कि कोविड सेंटर में आनेवाले उन्हीं लोगों की वाइस टेस्टिंग की जांच रही है जो कोविड-19 पॉजिटिव है। यह एक तरह का रिसर्च है। इसमें मरीज की पूरी जानकारी इकट्ठा की जा रही है।
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मसलन, कोरोना संक्रमित मरीज की आवाज में क्या बदलाव आया और आवाज में कितनी कंपन है आदि का स्क्रीनिंग टूल बनाया जाएगा। यह पूरा सैम्पल डाटा के साथ इस्रायल की कंपनी को भेजा जा रहा है।

वहां रिसर्च कर वॉइस सैम्पल को मैच कराया जाएगा उसके बाद रिपोर्ट तैयार होगी। इसके बाद पता चलेगा कि कोरोना से मरीज को कितना रिस्क है और इसका उसके शरीर पर क्या असर पड़ सकता है।

कोरोना मरीज की तीन बार होती है जांच
डॉ. नीलम ने बताया कि एक कोरोना संक्रमित मरीज का इस मशीन से तीन बार टेस्टिंग हो रही है। इसमें कोविड सेंटर में आने के पहले दिन, तीसरे दिन और डिस्चार्ज होनेवाले दिन टेस्टिंग होती है। डॉ. नीलम ने बताया कि कोविड सेंटर को दो टेस्टिंग मशीन उपलब्ध कराए गए हैं, जिसे लेकर दो डॉक्टर सेंटर में मरीजों की जांच कर रहे हैं।


अमेरिका और इस्रायल में शुरू है यह प्रयोग
कोरोना टेस्टिंग के लिए इस तकनीक का प्रयोग अमेरिका व इस्रायल जैसे देशों में शुरू किया गया है। डॉ. अंद्राडे ने बताया कि जब किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखाई देते है, तो उन्हें सांस लेने में कठिनाई होती है। ये सभी प्रक्रियाएं फेफड़ों की मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं। इससे फेफड़ों की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है और मरीज की आवाज बदल जाती है। अब तक जांच में यह सामने आ चुका है।
 

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