अब बिना वारंट साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर सकेंगे सब-इंस्पेक्टर
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केंद्र सरकार देश में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए आईटी एक्ट में अहम संशोधन करने जा रही है। इसके तहत सब-इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस अधिकारियों को अधिकार प्रदान करने जा रही है। इसके तहत वे किसी व्यक्ति या स्थान की जांच, निरीक्षण या वाजिब कारण होने पर बिना वारंट संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकता है।
सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में जल्द संसद में संशोधित बिल पेश करेगी। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय बिल का मसौदा तैयार कर चुका है। इसमें अन्य मंत्रालयों द्वारा की गई सिफारिशों को शामिल किया है। इससे पहले यह शक्तियां पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) स्तर के अधिकारियों को प्राप्त हैं।
माना जा रहा है कि इसके चलते साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई की गति बहुत धीमी है। इसकी वजह डीएसपी स्तर के अधिकारियों पर तमाम प्रशासनिक जिम्मेदारियों का होना होता हैं। इस वजह से कई मामलों में संदिग्ध या अपराधी बचकर निकल जाता है।
कार्रवाई करने वाले अधिकारी को संरक्षण
आईटी एक्ट संशोधन में साइबर अपराध के मामले में कार्रवाई करने वाले सब-इंस्पेक्टर को संरक्षण भी मुहैया कराने का प्रावधान होगा। वाजिब कारण होने की स्थिति में संदिग्ध व्यक्ति, कंपनी या अन्य कोई जवाबी कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
अश्लील सामग्री अन्य लोगों को भेजने पर मुकदमा
संशोधन में अश्लील सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए नए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को शामिल किया गया है। इसके तहत अश्लील सामग्री को डाउनलोड कर अन्य लोगों को भेजने वालों के खिलाफ पुलिस आसानी से मुकदमा दर्ज कर सकेगी। मौजूदा समय इंटरनेट पर चलने वाले विभिन्न एप पर अश्लील सामग्री का धड़ल्ले से प्रसार होता है। इसके खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान कानून में नहीं है।