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एक्सक्लूसिव: अब यूनिवर्सिटी की मार्कशीट में ऑनलाइन फर्जीवाड़ा
धर्मेंद्र त्यागी/अमर उजाला, आगरा
Updated Wed, 04 May 2016 03:46 AM IST
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डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में इस बार मार्कशीट का आनलाइन फर्जीवाड़ा सामने आया है। वेबसाइट पर मार्कशीट में अंक बढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे भी मामले हैं जिनमें पहले अपलोड की गई मार्कशीट में छात्र की सेकेंड डिवीजन थी, जबकि दूसरी बार में फर्स्ट हो गई।
यूनिवर्सिटी के अफसर यह जानकर हैरान रह गए कि अंक एक नहीं, सभी विषयों में बढ़ाए गए हैं। वो भी दस से लेकर 20 तक। 13 के 33 और 18 के 28 किए गए हैं। इस छात्र को पिछले साल 49 फीसदी अंक मिले थे, लेकिन बेवसाइट पर रिजल्ट बदल दिए जाने से 60 फीसदी हो गए हैं।
विवि. सूत्रों ने बताया कि बीएससी में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हैं। मामला 2014 के रिजल्ट का है। इसका रिजल्ट उसी साल 21 अक्तूबर को जारी किया गया था। ऐसे भी मामले है जिनमें पांच-पांच विषयों में नंबर बढ़े हुए हैं। सांख्यिकी में13 को 33, गणित में 18 को 38 और कंप्यूटर साइंस में 27 को 37 किया गया है।
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यूनिवर्सिटी के अफसर यह जानकर हैरान रह गए कि अंक एक नहीं, सभी विषयों में बढ़ाए गए हैं। वो भी दस से लेकर 20 तक। 13 के 33 और 18 के 28 किए गए हैं। इस छात्र को पिछले साल 49 फीसदी अंक मिले थे, लेकिन बेवसाइट पर रिजल्ट बदल दिए जाने से 60 फीसदी हो गए हैं।
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विवि. सूत्रों ने बताया कि बीएससी में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे हैं। मामला 2014 के रिजल्ट का है। इसका रिजल्ट उसी साल 21 अक्तूबर को जारी किया गया था। ऐसे भी मामले है जिनमें पांच-पांच विषयों में नंबर बढ़े हुए हैं। सांख्यिकी में13 को 33, गणित में 18 को 38 और कंप्यूटर साइंस में 27 को 37 किया गया है।
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वेबसाइट पर सेकेंड डिवीजन को फर्स्ट डिवीजन में बदला गया
2015 की मार्कशीट में कुल योग 289 है जबकि 2016 में फिर से अपलोड की गई मार्कशीट में 362 हो गया है। एक अन्य विद्यार्थी की मार्कशीट में कुल योग 294 को 364 किया गया है। बता दें, यूनिवर्सिटी फर्जीवाड़ों के लिए बदनाम है। बीएड में हुई धांधली की जांच एसआईटी कर रही है।
नंबर कम होने पर देना होता री-एग्जाम
विवि की नियमावली के रूप से भी संभव नहीं। अंक कम आने पर अभ्यर्थी को री-एक्जाम का फार्म भरना होता है। यही भी दो विषयों के तीन पेपर में फार्म भरे जाने की छूट है। वेबसाइट से प्रिंट मार्कशीट में इंगित किया है मार्कशीट में अभ्यर्थी के नाम, पिता, कालेज संबंधी जानकारी में गड़बड़ी होने पर कालेज या विश्वविद्यालय में एप्पलीकेशन देनी होती है।
- मामला गंभीर है, यह गड़बड़ी नंबर फीडिंग में हुई है या फिर फर्जीवाड़े का खेल है। इस मामले की उच्चतरीय जांच कराई जाएगी। केएन सिंह, परीक्षा नियंत्रक
- अलग-अलग नंबरों की मार्कशीट का क्या मामला है। इसकी रिपोर्ट परीक्षा नियंत्रक से मांगी जाएगी है। प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति
कार्य करने वाली एजेंसी जांच के दायरे में
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड मार्कशीट में नंबरों के खेल के बाद रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी जांच की जद में आ गई है। इससे पहले यहां ब्लैंक मार्कशीट बाजार में बिकने का भी मामला सामने आया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी जांच में रुचि नहीं दिखाई।
नंबर कम होने पर देना होता री-एग्जाम
विवि की नियमावली के रूप से भी संभव नहीं। अंक कम आने पर अभ्यर्थी को री-एक्जाम का फार्म भरना होता है। यही भी दो विषयों के तीन पेपर में फार्म भरे जाने की छूट है। वेबसाइट से प्रिंट मार्कशीट में इंगित किया है मार्कशीट में अभ्यर्थी के नाम, पिता, कालेज संबंधी जानकारी में गड़बड़ी होने पर कालेज या विश्वविद्यालय में एप्पलीकेशन देनी होती है।
- मामला गंभीर है, यह गड़बड़ी नंबर फीडिंग में हुई है या फिर फर्जीवाड़े का खेल है। इस मामले की उच्चतरीय जांच कराई जाएगी। केएन सिंह, परीक्षा नियंत्रक
- अलग-अलग नंबरों की मार्कशीट का क्या मामला है। इसकी रिपोर्ट परीक्षा नियंत्रक से मांगी जाएगी है। प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति
कार्य करने वाली एजेंसी जांच के दायरे में
विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड मार्कशीट में नंबरों के खेल के बाद रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी जांच की जद में आ गई है। इससे पहले यहां ब्लैंक मार्कशीट बाजार में बिकने का भी मामला सामने आया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी जांच में रुचि नहीं दिखाई।