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शहरी विकास के लिए अब खुले हाथ से नहीं मिलेगा पैसा, ग्रांट के लिए राज्यों को साफ करनी होगी हवा!

Wed, 24 Jun 2020 04:55 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 24 Jun 2020 04:55 PM IST
सार

वित्त आयोग ने इस ग्रांट के अतिरिक्त 29250 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया है। इसमें शहरों की दो श्रेणी तय की गई हैं। 50 मिलियन से अधिक जनसंख्या वाली अर्बन लोकल बॉडी (दिल्ली व श्रीनगर को छोड़कर) और दूसरा, ऐसे शहर जिनकी जनसंख्या एक मिलियन से कम है...

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Now grant will not get easily for urban development, states will have to clean the air for assistance
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के दौरान साफ-सफाई को लेकर केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें सचेत हो रही हैं। केंद्र की तरफ से विभिन्न राज्यों की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को जो ग्रांट दी जाती है, उसे जारी करने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है।
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अब खुले हाथ से ग्रांट जारी नहीं होगी। राज्यों को इसके लिए कुछ शर्तों का पालन करना पड़ेगा। 15वें वित्त आयोग ने अगले पांच साल में दी जाने वाली ग्रांट की दो श्रेणी बना दी हैं।

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पहली श्रेणी में विभिन्न राज्यों की वे अर्बन लोकल बॉडी आएंगी, जहां पर 50 मिलियन से अधिक जनसंख्या है। जबकि दूसरी श्रेणी वाले शहरों की जनसंख्या एक मिलियन से कम रहेगी।
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साथ ही अब एक विशेष ग्रांट भी रहेगी, जिसके लिए 9229 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। यह ग्रांट उन शहरों को मिलेगी, जहां परिवेशी वायु गुणवत्ता का स्तर बेहतर होगा।

दूसरा, वहां सॉलिड वाटर मेनेजमेंट सिस्टम की वर्किंग देखी जाएगी। दो मंत्रालयों को यह जिम्मेदारी दी गई है।
 

2017 में गठित 15वें वित्त आयोग ने 2020 से 2025 तक स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को ग्रांट जारी करने की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के दो अंश हैं।



पहला, 2020 से 2021 के लिए ग्रांट देना और दूसरे अंश में 2021-22 से लेकर 2025-26 तक की ग्रांट शामिल है। दिसंबर 2019 को ये रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी गई थी।

अब वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग इस रिपोर्ट पर अमल करेगा। 28 राज्यों की अर्बन लोकल बॉडी को 90 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। हालांकि इसके लिए राज्यों को साफ-सफाई को लेकर कई तरह की शर्तें पूरी करनी होंगी।

वित्त आयोग ने इस ग्रांट के अतिरिक्त 29250 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया है। इसमें शहरों की दो श्रेणी तय की गई हैं। 50 मिलियन से अधिक जनसंख्या वाली अर्बन लोकल बॉडी (दिल्ली व श्रीनगर को छोड़कर) और दूसरा, ऐसे शहर जिनकी जनसंख्या एक मिलियन से कम है।

वित्त आयोग ने 50 मिलियन प्लस वाली अर्बन लोकल बॉडी को 2020-21 में 9229 करोड़ रुपये देने की बात कही है। इसमें 4400 करोड़ रुपये बेहतर परिवेशी वायु गुणवत्ता के लिए और 4829 करोड़ रुपये सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट एंड सेनिटेशन के लिए दिए जाएंगे।

ये दो मंत्रालय सौंपेंगे गुणवत्ता रिपोर्ट

परिवेशी वायु गुणवत्ता के स्तर की जांच करने की जिम्मेदारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दी गई है। यह मंत्रालय बतौर नोडल एजेंसी हर साल व प्रत्येक शहर के हिसाब से पीएम 10 और पीएम 2.5 की रिपोर्ट तैयार करेगा।





ये रिपोर्ट 2020 से लेकर 2025 तक बनाई जाएगी। इसी तरह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड सेनिटेशन के लिए शहरी विकास मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह मंत्रालय स्वच्छता के तय मापदंडों के अनुसार सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट एंड सैनिटेशन की स्थिति जांचेगा।

इसके तहत 2021 के लिए 4829 रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उक्त दोनों मंत्रालयों की रिपोर्ट के आधार पर ही 9229 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाएगी। बाकी बचे 20021 करोड़ रुपये अर्बन लोकल बॉडी के दूसरे कार्य जैसे वेतन व प्रबंधन के लिए रहेंगे।

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