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अब मोबाइल एप से किसान जान सकेंगे बासमती उगाने के तरीके

Thu, 11 Aug 2016 03:58 AM IST
मोहित कुमार/ अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार/ अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 11 Aug 2016 03:58 AM IST
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Now app will help in cultivation of Basmati
बासमती - फोटो : Getty Images

किसानों को अब मोबाइल के जरिए बासमती धान की खेती की पूरी जानकारी देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए एक खास तरह का मोबाइल एप (एपराइजा) तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों को धान की फसल में प्रयोग किए जाने वाले सही रसायन, मात्रा और प्रयोग करने की विधि की जानकारी दी जाएगी।

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मानक के अनुसार किसान रसायनों का प्रयोग करेंगे तो विश्व स्तर पर बासमती मानक पर खरा उतरेगा। एपीडा और बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मोदीपुरम (बीईडीएफ) मिलकर इस मोबाइल एप को किसानों के लिए तैयार करा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस एप (एपराइजा) के तैयार होने के बाद किसानों को समय समय पर बासमती धान की खेती की उन्नत तरीकों की जानकारी मिलेगी।
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ऐसा होने से किसान को फसल की चिंता अधिक नहीं रहेगी। एप के माध्यम से सूचना मिलने पर वह समय से फसल में खाद पानी लगा सकेगा। यही नहीं किसानों को पता चल जाएगा कि उसे कौन सा कीटनाशक या अन्य रसायन इस्तेमाल करना है, ताकि उसकी फसल सभी मानकों पर खरा उतरे।
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ऐसा होने से उसे बाजार में फसल के दाम सामान्य फसल के मुकाबले अधिक मिलेंगे।  यूपी, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों के साथ में मिलकर इसे तैयार किया जा रहा है। जिसमें विभिन्न देशों में प्रयोग करने पर बासमती की जानकारी ले सकेंगे। यूरोपियन फेडरेशन ऑफ राइस इंपोर्टस से किसानों को बताया जाएगा कि कितना रसायन डालना है। इसकी पूरी जानकारी बीईडीएफ के पास में रहेगी।

भारत में ऐसा एप पहली बार बन रहा है 

Now app will help in cultivation of Basmati
एप

एप में हरियाणा, पंजाब, मेरठ, जम्मू के कृषि विवि को शामिल किया गया है। इसमें हरियाणा कृषि विवि ने कमेटी भी बना दी है, अन्य जगहों पर काम चल रहा है। इसके बनने से बासमती की पूरी जानकारी मोबाइल पर रहेगी। इस मामले में अभी तक हरियाणा आगे है।

मोदीपुरम कृषि विवि ने भी अभी कोई शुरूआत नहीं की है। चावल का साइंटिफिक नाम ओराइजा सरायवा है। इसका इंडियन नाम एपराइजा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए नया एप तैयार किया जा रहा है। किसानों को स्मार्ट मोबाइल फोन से जोड़ा जाएगा। जिससे पूरी जानकारी मोबाइल एप पर रहेगी। इसके लिए किसानों को जागरूक भी किया जाएगा।

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