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कच्चा तेल प्रति डॉलर बढ़त से 6,160 करोड़ बढ़ेगा आयात खर्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Sat, 24 Nov 2018 06:43 AM IST
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oil production
भारत अगर कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश बना रहा, तो कच्चे तेल के प्रति बैरल भाव में एक डॉलर के बदलाव से भी देश के आयात बिल पर 6,160 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा। यह बात रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग ने कही। रेटिंग एजेंसी के अनुसार अगर ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) और उसके सहयोगी दल अपनी आपूर्ति रोकने का निर्णय ले, तो तेल के भाव में फिर से तेजी आ जाएगी।
एजेंसी ने कहा कि इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा जैसा की वह अपने मांग की 80 फीसदी पूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है, और तेल की प्रति बैरल की कीमतों में एक डॉलर का भी फेरबदल देश के आयात बिल को 6,160 करोड़ रुपये बढ़ा या घटा सकता है।
गिरते कीमत को थामने के लिए 2019 में उत्पादन में कटौती कर सकता है ओपेक
एजेंसी के अनुसार, कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड आयल की कीमत तेजी के साथ अपने चार वर्ष के उच्चतम स्तर 86.07 डॉलर प्रति बैरल पर बीते चार अक्तूबर को पहुंची। तेल की कीमतों में यह बढ़त ईरान से होने वाले तेल की आपूर्ति में कमी आने कारण हुई थी। हालांकि मध्य अक्तूबर से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी।
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कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट 12 अक्तूबर को थम गई और कच्चे तेल का भाव फिर से तेज हुआ। भाव में आई यह तेजी सऊदी अरब द्वारा तेल निर्यात 5,00,000 बैरल प्रति दिन घटाने की घोषणा के बाद आई। अनुमान यह भी है कि 2019 में ओपेक अपने उत्पादन में कटौती करेगा।
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एजेंसी ने कहा कि इससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा जैसा की वह अपने मांग की 80 फीसदी पूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है, और तेल की प्रति बैरल की कीमतों में एक डॉलर का भी फेरबदल देश के आयात बिल को 6,160 करोड़ रुपये बढ़ा या घटा सकता है।
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गिरते कीमत को थामने के लिए 2019 में उत्पादन में कटौती कर सकता है ओपेक
एजेंसी के अनुसार, कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड आयल की कीमत तेजी के साथ अपने चार वर्ष के उच्चतम स्तर 86.07 डॉलर प्रति बैरल पर बीते चार अक्तूबर को पहुंची। तेल की कीमतों में यह बढ़त ईरान से होने वाले तेल की आपूर्ति में कमी आने कारण हुई थी। हालांकि मध्य अक्तूबर से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी।
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कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट 12 अक्तूबर को थम गई और कच्चे तेल का भाव फिर से तेज हुआ। भाव में आई यह तेजी सऊदी अरब द्वारा तेल निर्यात 5,00,000 बैरल प्रति दिन घटाने की घोषणा के बाद आई। अनुमान यह भी है कि 2019 में ओपेक अपने उत्पादन में कटौती करेगा।