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पूजा स्थल विशेष प्रावधान कानून की वैधता को चुनौती देने वाली सुब्रमण्यम की याचिका पर केंद्र को नोटिस
Sat, 27 Mar 2021 04:03 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 27 Mar 2021 04:03 AM IST
सार
- सरकार को नोटिस जारी नोटिस में कहा गया कि यह कानून मनमाना और अतार्किक है
- पीठ ने स्वामी की याचिका पर केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया
- भाजपा सांसद ने याचिका में कहा है कि 1991 का यह कानून असांविधानिक और असंगत है
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supreme court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 1991 के पूजा स्थल विशेष प्रावधान कानून (प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट) की वैधता को चुनौती देने वाली भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि यह कानून मनमाना और अतार्किक है क्योंकि 1991 का यह कानून कहता है कि देश में सभी धार्मिक स्थलों की स्थिति वैसे ही रहेगी जो 15 अगस्त 1947 को थी।
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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वामी की याचिका पर केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया है। भाजपा सांसद ने याचिका में कहा है कि 1991 का यह कानून असांविधानिक और असंगत है। साथ ही यह संविधान के मूल ढांचे के विपरीत है क्योंकि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से रोकता है।
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याचिका में कहा गया है कि यह कानून वैसे धार्मिक स्थलों पर पूजा करने से रोकता है जिन्हें विदेशी आक्रांताओं ने किसी और स्थल में तब्दील कर दिया था। इन धार्मिक स्थलों के प्रति हिंदुओं की गहरी आस्था है। अपनी याचिका में स्वामी ने 12 ज्योर्तिलिंग में से एक वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर का हवाला भी दिया है।
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कहा गया है कि सर्वप्रथम वर्ष 1194 में कुतुुबुद्दीन बक की सेना ने मंदिर को ध्वस्त किया। बाद में औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर उस जगह पर मस्जिद बनवाई। मंदिर का अवशेष इस स्थल पर देखा जा सकता है। गत 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी कुमार उपाध्याय की इस तरह की याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।