{"_id":"5a4690ef4f1c1bcf6d8b6dcf","slug":"not-easy-to-travel-ahead-of-triple-talaq-bills","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आसान नहीं तीन तलाक बिल के आगे का सफर ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
आसान नहीं तीन तलाक बिल के आगे का सफर
गुंजन कुमार / नई दिल्ली
Updated Sat, 30 Dec 2017 07:59 AM IST
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तीन तलाक
एक साथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को अवैध व अपराध मानने वाले मुसलिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल 2017 को राज्यसभा में मौजूदा स्वरूप में पास कराना सरकार के लिए टेढी खीर साबित हो सकती है। बृहस्पतिवार को एनडीए की बहुमत वाली लोकसभा ने इस विधेयक को विपक्ष के संशोधनों और आपत्तियों को दरकिनार करते हुए ध्वनिमत से हरी झंडी दे दी थी।
लेकिन उच्च सदन में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए अल्प मत में है। हालांकि विपक्ष इस बिल के सीधे विरोध में नहीं है। बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जता रहा विपक्ष इसे राज्यसभा में पहुंचने का इंतजार कर रहा है। उच्च सदन में यह विधेयक मंगलवार को पेश होना है।
पढ़ें- तीन तलाकः बिल पास होते ही सोशल मीडिया पर जश्न का दौर, लोगों ने दी ये प्रतिक्रियाएं
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कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक राज्यसभा का गणित सरकार के पक्ष में नहीं है। लिहाजा विपक्ष अपनी आपत्तियों के साथ सरकार को घेरेगा। ज्यादा उम्मीद है कि बिल में बदलाव की विपक्ष की मांग पर विचार के लिए बिल को प्रवर समिति को भेज दिया जाएगा। गौरतलब है कि लोकसभा में इसे संसद की स्थाई समिति को भेजे जाने की विपक्ष की मांग को सरकार ने ठुकरा दिया था। सरकार के लिए मुश्किल यह है कि कमोबेश सभी दलों के बिल के समर्थन में होने के बावजूद सभी की कुछ प्रावधानों को ले कर आपत्तियां हैं।
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लेकिन उच्च सदन में भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए अल्प मत में है। हालांकि विपक्ष इस बिल के सीधे विरोध में नहीं है। बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जता रहा विपक्ष इसे राज्यसभा में पहुंचने का इंतजार कर रहा है। उच्च सदन में यह विधेयक मंगलवार को पेश होना है।
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कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक राज्यसभा का गणित सरकार के पक्ष में नहीं है। लिहाजा विपक्ष अपनी आपत्तियों के साथ सरकार को घेरेगा। ज्यादा उम्मीद है कि बिल में बदलाव की विपक्ष की मांग पर विचार के लिए बिल को प्रवर समिति को भेज दिया जाएगा। गौरतलब है कि लोकसभा में इसे संसद की स्थाई समिति को भेजे जाने की विपक्ष की मांग को सरकार ने ठुकरा दिया था। सरकार के लिए मुश्किल यह है कि कमोबेश सभी दलों के बिल के समर्थन में होने के बावजूद सभी की कुछ प्रावधानों को ले कर आपत्तियां हैं।
बिल पास कराने के लिए 50% से एक ज्यादा यानि कुल 123 मतों की जरुरत होगी
एक-दूसरे को मिठाई खिलातीं महिलाएं
- फोटो : amar ujala
245 सदस्यीय राज्य सभा में एनडीए का संख्या बल 88 है। यह बिल पास कराने के लिए उसे पचास फीसदी से एक ज्यादा यानि कुल 123 मतों की जरुरत होगी। सरकार की चुनौती है कि वह बाकी बचा 35 मत कैसे अपने पक्ष में करे। एकजुट विपक्ष के प्रावधानों में बदलाव की मांग को देखते हुए फिलहाल यह मुश्किल दिख रहा है।
उधर राजनीति के मद्देनजर सरकार को यह बिल पास कराने की जल्दी नहीं है। लोकसभा में बिल पास कराकर सरकार ने मुसलिम महिला की आजादी के पैरोकार होने का संदेश दे दिया है। अब राज्यसभा में बिल पास नहीं होने का ठीकरा विपक्ष के सर ही फूटेगा।
उधर राजनीति के मद्देनजर सरकार को यह बिल पास कराने की जल्दी नहीं है। लोकसभा में बिल पास कराकर सरकार ने मुसलिम महिला की आजादी के पैरोकार होने का संदेश दे दिया है। अब राज्यसभा में बिल पास नहीं होने का ठीकरा विपक्ष के सर ही फूटेगा।