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Bombay High Court: 'मां को बच्ची से न मिलने देना क्रूरता और उत्पीड़न', कोर्ट ने महिला को सौंपी बेटी की कस्टडी

Thu, 12 Dec 2024 05:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 12 Dec 2024 05:05 PM IST
सार

Bombay High Court:  बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने कहा कि चार साल की बच्ची को उसकी मां से दूर रखना मानसिक उत्पीड़न और क्रूरता के समान है, क्योंकि इससे मां के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा।

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Not allowing mother to meet child amounts to cruelty and harassment, says HC
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अगर किसी मां को उसके बच्चे से मिलने से रोका जाता है, तो इसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत क्रूरता और उत्पीड़न माना जाएगा। कोर्ट ने जालना जिले की एक महिला के ससुरालवालों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार किया। 
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मां के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि महिला को उसकी चार साल की बेटी से दूर रखा जा रहा है, जो कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ है। जस्टिस विभा कंकरणवाडी और जस्टिस रोहित जोशी की पीठ ने कहा, चार साल की बच्ची को उसकी मां से दूर रखना मानसिक उत्पीड़न और क्रूरता के समान है, क्योंकि इससे मां के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार का व्यवहार आईपीसी की धारा 498-ए के मुताबिक क्रूरता के तहत आता है। 
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ससुरालवालों ने की थी प्राथमिकी रद्द करने की मांग 
कोर्ट ने यह भी बताया कि लगातार उत्पीड़न हो रहा है और इस तरह से अपराध जारी है। इस वजह से कोर्ट ने यह कहते हुए प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया कि यह मामला कोर्ट के दखल के लिए उपयुक्त नहीं है। महिला के ससुर, सास और बहन ने 2022 में जालना जिले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। महिला ने आरोप लगाया कि उसने 2019 में शादी की थी और 2020 में एक बेटी को जन्म दिया था। लेकिन उसके पति और ससुरालवाले उससे पैसों की मांग करने लगे और शारीरिक व मानसिक रूप से उसे परेशान करने लगे। 
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हाईकोर्ट ने महिला को सौंपी बच्ची की हिरासत
महिला का कहना था कि मई 2022 में उसे ससुराल से बाहर निकाल दिया गया और उसकी बेटी को भी साथ जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद महिला ने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में अपनी बेटी की हिरासत के लिए आवेदन किया। 2023 में कोर्ट ने महिला के पक्ष में आदेश दिया कि बच्ची की हिरासत मां को दी जाए। लेकिन यह आदेश अभी तक लागू नहीं हुआ और बच्ची पति के पास ही रही। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि बच्ची पिता के पास थी। लेकिन ससुरालवाले उसे छिपाने में मदद कर रहे थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग न्यायिक आदेशों का सम्मान नहीं करते, उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। सास, ससुर और बहन ने इन आरोपों को झूठा बताया और कहा कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। 
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