फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   'Non-judicial tribunal members do not pass orders against the govt', why did Chief Justice Gavai say this?

CJI Gavai: 'गैर न्यायिक ट्रिब्यूनल सदस्य नहीं पारित करते सरकार के खिलाफ आदेश', ऐसा क्यों बोले चीफ जस्टिस गवई?

Sat, 20 Sep 2025 05:50 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sat, 20 Sep 2025 05:50 PM IST
सार

नई दिल्ली में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण 2025 के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन सीजेआई बीआर गवई ने ट्रिब्यूनल और न्याय प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर बात की। सीजेआई गवई ने कहा कि ट्रिब्यूनल के कुछ गैर न्यायिक सदस्य सरकार के खिलाफ आदेश पारित करने से बचते हैं। 

विज्ञापन
'Non-judicial tribunal members do not pass orders against the govt', why did Chief Justice Gavai say this?
बीआर गवई, सीजेआई। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई ने न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के गैर न्यायिक सदस्यों को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों के कुछ गैर-न्यायिक सदस्य सरकार के खिलाफ आदेश पारित करने से बचते हैं। इसमें से अधिकतर गैर न्यायिक सदस्य पूर्व नौकरशाह होते हैं। उनको इस पर विचार करना चाहिए। नई दिल्ली में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण 2025 के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन सीजेआई बीआर गवई ने ट्रिब्यूनल और न्याय प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर बात की। 
विज्ञापन


केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुए आयोजन में सीजेआई गवई ने कहा कि प्रशासनिक न्यायाधिकरण न्यायालयों से अलग हैं। वे कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। उनके कई सदस्य प्रशासनिक सेवाओं से आते हैं जबकि अन्य न्यायपालिका से आते हैं।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि यह विविधता एक ताकत है, जो न्यायिक कौशल और प्रशासनिक अनुभव को एक साथ लाती है। लेकिन सदस्यों को लगातार प्रशिक्षित करने की जरूरत है। साथ ही पात्रता और आचरण के समान मानकों का पालन कराना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीजेआई ने कहा, ''इससे न्यायिक सदस्य लोक प्रशासन की बारीकियों से परिचित हो सकेंगे, जबकि प्रशासनिक सदस्यों को कानूनी तर्क-वितर्क में प्रशिक्षण जरूरत होगी। मेरी बात को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि आपको पता ही नहीं होता कि आप क्या कह रहे हैं और सोशल मीडिया पर क्या आ रहा है।''

उन्होंने कहा, ''एक न्यायाधीश के रूप में मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा है कि कुछ प्रशासनिक सदस्य या प्रशासन से आने वाले कुछ न्यायाधीश... यह नहीं भूलते कि वे प्रशासन से आते हैं और सरकार के खिलाफ आदेश पारित करने से कतराते हैं। मुझे लगता है कि उन्हें इस पर विचार करना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि न्यायिक शिक्षाविदों की नियमित कार्यशालाएं, सम्मेलन और प्रशिक्षण कार्यक्रम इसमें अमूल्य साबित हो सकते हैं। यह न्यायाधिकरण के सदस्यों की प्रभावशीलता को काफी बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा अगर स्पष्ट पात्रता मानदंडों के साथ एक समान नियुक्ति प्रक्रिया लागू की जाती है तो मनमानी के सभी प्रश्न समाप्त हो जाएंगे और नागरिकों का न्यायाधिकरण में विश्वास मजबूत होगा।

https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2025/09/20/45_68cea49b5547c.jpg

ट्रिब्यूनल निर्णयों के विरुद्ध अपीलों के मुद्दे पर कही ये बात

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने ट्रिब्यूनल के फैसलों के खिलाफ बढ़ती अपीलों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) और हाईकोर्ट के निष्कर्ष एक जैसे होते हैं। फिर भी सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नौकरशाह कोई भी जोखिम लेने से डरते हैं। वे सारा दोष अदालतों पर डालना चाहते हैं।

सीजेआई ने कहा कि अगर कोई केंद्रीय एजेंसी यह तय कर सके कि मामला वास्तव में अपील योग्य है या नहीं, तो इससे अदालत में लंबित मामलों में भारी कमी आएगी। हम सभी जानते हैं कि केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सबसे बड़ी वादी है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हालांकि नागरिकों का अपील करने का अधिकार न्याय की आधारशिला है, लेकिन इस प्रक्रिया के चलते अक्सर मुकदमेबाजी कई साल तक चलती रहती है। इससे ट्रिब्यूनल की स्थापना का उद्देश्य कमजोर होता है। अनेक मामलों में तो सरकारी अधिकारी और कर्मचारी निपटारे से पहले ही सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंच जाते हैं।

https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2025/09/20/46_68cea4c558ac4.jpg

'ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तों पर किया जाए विचार'

मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने न्यायाधिकरणों के सदस्यों की समान सेवा शर्तों के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और अच्छे न्यायिक अधिकारी ट्रिब्यूनल के कार्यालयों में काम करें तो सरकार को पहल करनी होगी। सरकार को ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा शर्तों पर पुनर्विचार करना होगा।

न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों पर की टिप्पणी
सीजेआई ने अदालतों में कुछ न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के व्यवहार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें नए विधि स्नातक के लिए न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने से पहले तीन साल का अनुभव होना अनिवार्य कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि राज्यों और उच्च न्यायालयों से आंकड़े मांगे गए थे। इसमें पाया गया कि नए विधि स्नातक जिनके पास न्यायालय का कोई अनुभव या अनुभव नहीं था। पहले ही दिन कुर्सी उनके सिर पर चढ़ जाती थी और वे 40 वर्ष और 50 वर्ष के अनुभव वाले वकीलों को धमकाते या परेशान करते थे।

सीजेआई ने कहा, "न्यायाधीशों के रूप में हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि जज और वकील दोनों ही न्याय के स्वर्णिम रथ के दो पहियों की तरह हैं। कोई भी श्रेष्ठ या कोई भी निम्न नहीं है। जब तक जज और वकील दोनों मिलकर काम नहीं करते, न्याय प्रशासन ठीक से काम नहीं कर सकता।"

https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2025/09/20/47_68cea4fec1bb5.jpg

'न्याय के विश्वास को लेकर कोर्ट आते हैं वादी'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी वादी अदालत में इस विश्वास के साथ आते हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा। उनके निर्णय को प्रभावित नहीं किया जाएगा। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे इस जिम्मेदारी का सम्मान न केवल आधिकारिक स्थानों के भीतर, बल्कि बाहर भी करें। कई मायनों में हमारी भूमिकाएं एक नेता की तरह हैं जो हमारे द्वारा निर्धारित परिणामों के माध्यम से कई हजार नागरिकों के जीवन को आकार देंगे।  उन्होंने न्याय वितरण प्रणाली में कैट और राज्य ट्रिब्यूनल के योगदान की सराहना की। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने भी कहा कि न्यायाधिकरण लंबित मुकदमों को कम करने में मदद करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed