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Bombay HC: 'हवाई अड्डों पर किसी को नहीं होनी चाहिए परेशानी', व्हीलचेयर और अन्य सुविधाओं की कमी पर हाईकोर्ट

Mon, 21 Apr 2025 03:08 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 21 Apr 2025 03:08 PM IST
सार

Bombay HC: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हवाई अड्डों पर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि यह मानवीय जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। कोर्ट ने डीजीसीए और एयरलाइनों से कहा कि वे खुद आगे आकर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाएं दें और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो।

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Nobody should suffer at airports: HC on lack of wheelchairs and other facilities
बंबंई उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश के हवाई अड्डों पर बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए व्हीलचेयर और दूसरी जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा इंसानों की जिंदगी से जुड़ा है। 

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जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने कहा, व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं समय पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि यात्रियों को तकलीफों से बचाया जा सके। कोर्ट ने विमानन निदेशालय (डीजीसीए) और एयरलाइन कंपनियों को खुद आगे आकर ये सुविधाएं देनी चाहिए। हम चाहते हैं कि इस मामले में भारत एक मिसाल  पेश करे। 
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कोर्ट ने कहा, हमें मानव जीवन की चिंता है। किसी को भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए। हवाई अड्डा प्रबंधन प्राधिकरण और सभी एयरलाइन को संवेदनशील होने की आवश्यकता है। हमें इन मुद्दों को लेकर बहुत संवेदनशील होना होगा। हम चाहते हैं कि भारत में एयरलाइन के सभी उच्चतम अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू किया जाए। 

दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था हाईकोर्ट
पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें से एक याचिका एक वरिष्ठ नागरिक और उनकी बेटी की ओर से दायर की गई थी। जबकि दूसरी याचिका एक 53 वर्षीय व्यक्ति की ओर से दायर की गई थी। इस याचिका मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर व्हीलचेयर और अन्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया था। 

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'कोई अचानक बीमार पड़ जाए, तो क्या होगा?'
डीजीसीए ने कोर्ट को बताया कि व्हीलचेयर की कमी ओवरबुकिंग और कुछ और कारणों की वजह से है। लेकिन कोर्ट ने यह सफाई मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, आप यह नहीं कह सकते कि व्हीलचेयर नहीं थे, इसलिए नहीं दे पाए। कोई भी यात्री हवाई अड्डे पर बिल्कुल ठीक आ सकता है लेकिन वहां अचानक बीमार पड़ सकता है। फिर क्या होगा? ऐसे में मदद तो तुरंत मिलनी चाहिए। ये संवेदनशील मामला है। 
'लापरवाही पर एयरलाइन पर लगाया जाए जुर्माना'
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक-दो लोगों की समस्या नहीं है, बल्कि हर दिन हजारों यात्री पूरे देश में इसी परेशानी का सामना करते हैं। देरी किसी सामान्य यात्री के लिए तो ठीक है, लेकिन बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए यह बहुत बड़ी तकलीफ बन जाता है। कोर्ट ने डीजीसीए को निर्देश दिया कि एयरलाइनों की लापरवाही पर भारी जुर्माना लगाया जाए। पीठ ने कहा, अगर कोई यात्री विमान में मर जाता है या कोई और हादसा होता है, तो यह सीधे-सीधे एयरलाइन की लापरवाही है। यह मानव अधिकारों का उल्लंघन है। 

कोर्ट ने विदेश का दिया उदाहरण
अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने कहा, वहां बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सबसे पहले सम्मान और सुविधा दी जाती है। लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं हो रहा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट अब विशेषज्ञों की कमेटी एक बनाने की सोच रही है, जो इन मुद्दों पर बैठक कर रिपोर्ट तैयार करेगी। फिर डीजीसीए उस पर आगे के दिशानिर्देश बना सकेगा। कोर्ट इस मामले में मंगलवार को अगला आदेश देगी। 

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