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अमर्त्य सेन बोले- बंगाली संस्कृति से नहीं जुड़ा ‘जय श्रीराम’, भाजपा ने पूछा सवाल
Sat, 06 Jul 2019 12:31 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Nilesh Kumar
Updated Sat, 06 Jul 2019 12:31 AM IST
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Amartya sen
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने शुक्रवार को कहा कि मां दुर्गा के विपरीत, ‘जय श्री राम’ का नारा बंगाली संस्कृति से जुड़ा नहीं है। इस नारे को केवल ‘लोगों को पीटने के बहाने’ के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। वहीं भाजपा ने इसपर पलटवार करते हुए कहा है कि हर गांव में यह नारा लगाया जाता है।
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अमर्त्य सेन ने यहां जादवपुर विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में कहा कि ‘माँ दुर्गा’ ही बंगालियों के जीवन में सर्वव्यापी है। उन्होंने कहा कि ‘जय श्री राम’ का नारा बंगाली संस्कृति से जुड़ा नहीं है और रामनवमी भी अभी ‘लोकप्रिय हो रही है’, इससे पहले उन्होंने यह नारा कभी नहीं सुना था।
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West Bengal BJP President Dilip Ghosh on Amartya Sen remark ‘Jai Shri Ram slogan has no association with Bengali culture’: Amartya Sen probably doesn’t know Bengal. Does he know about Bengali or Indian culture? Jai Shri Ram is chanted in very village. Now entire Bengal says it. pic.twitter.com/7BumOIb5YY
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 6, 2019
उन्होंने कहा कि ‘मैंने अपने चार वर्षीय पोते से पूछा कि तुम्हारा पसंदीदा देवता कौन है? तो उसने जवाब दिया कि मां दुर्गा है। मां दुर्गा हमारे जीवन में कितनी सर्वव्यापी हैं।’ अर्थशास्त्री ने कहा कि मुझे लगता है कि ‘जय श्री राम’ के नारे लोगों को पीटने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।’
अमर्त्य सेन के बयान पर बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने पलटवार करते हुए कहा, 'अमर्त्य सेन शायद बंगाल को नहीं जानते हैं। क्या वह बंगाली और भारतीय संस्कृति को जानते हैं? जय श्रीराम हर गांव में बोला जाता है। अब इसे पूरा बंगाल कहता है।'
सेन की यह टिप्पणी देश के एक वर्ग द्वारा एक खास वर्ग को ‘जय श्री राम’ का जाप करने के लिए बोलने और ऐसा ना करने पर उनकी पिटाई करने की पृष्ठभूमि में आई है। गरीबी पर सेन ने कहा कि ’केवल गरीब लोगों का आय स्तर बढ़ने से उनकी दुर्दशा कम नहीं होगी, बुनियादी स्वास्थ्य सेवा, उचित शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से गरीबी को कम किया जा सकता है।’