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नोबेल सम्मानित अभिजीत बनर्जी ने जिस नोटबंदी का किया था विरोध, उससे फेक करेंसी पर नहीं लगी रोक

Tue, 15 Oct 2019 04:58 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 15 Oct 2019 04:58 PM IST
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Nobel awardee in economics abhijit banerjee oppose demonetisation, failed to stop fake currency
Abhijit Banerjee - फोटो : पीटीआई
देश में जब नोटबंदी लागू हुई तो केंद्र सरकार का तर्क था कि इससे आतंकवाद पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और नकली करेंसी पर रोक लगेगी। इस बात को जनता के दिमाग में बैठा दिया गया। प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी, जिन्हें एक दिन पहले ही 2019 के नोबेल पुरस्कार (अर्थशास्त्र) के लिए चुना गया है, उन्होंने नोटबंदी को सही नहीं बताया था। साल 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद अभिजीत बनर्जी के कई लेखों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि नोटबंदी जिस मकसद से लाई जा रही है, उसके पूरा होने में संदेह है।
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विपक्ष ने भी सरकार पर यह कहते हुए लगातार हमले जारी रखे कि नोटबंदी से न तो आतंकवाद खत्म हुआ और न ही नकली करेंसी।

90 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली नोट

पिछले चार वर्षों में 90 करोड़ से ज्यादा मूल्य के नकली नोट पकड़े गए हैं। इसी अवधि में 4614 मामले दर्ज हुए, तो वहीं 4926 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके बावजूद नकली करंसी चलाकर आतंकियों को मदद पहुंचाई जा रही है। एनआईए का कहना है कि नकली करेंसी पाकिस्तान की उच्च गुणवत्ता वाली प्रेस में छपती हैं। इसके बाद दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में बने आत्मनिर्भर आपराधिक नेटवर्क के जरिए देश में कई रास्तों से नकली नोट पहुंचाए जाते हैं।

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दिल्ली बनी नकली करेंसी का केंद्र

केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से लेकर 2015 तक केवल दिल्ली की बात करें, तो यहां पर सबसे ज्यादा 50 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोट पकड़े गए थे। एक दशक के आंकडे़ देखें, तो नकली करेंसी को लेकर ज्यादातर समय में दिल्ली ही देश में टॉप पर रही है। इसके बाद गुजरात, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र आदि राज्यों में भी बड़े पैमाने पर नकली करेंसी के मामले सामने आए हैं।

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पाक करेंसी और नकली करेंसी की स्याही एक

दिल्ली पुलिस एवं आरबीआई की विभिन्न शाखाओं के पकड़े गए नकली नोटों की गुणवत्ता इतनी ज्यादा उच्च होती है कि उन्हें आसानी से नहीं पहचाना जा सकता। नकली करेंसी के मामले में दर्ज हुई 368 से ज्यादा एफआईआर और 300 से अधिक आरोपियों से की गई पूछताछ में सामने आया है कि पिछले कई वर्षों से नकली नोटों में भारतीय करेंसी वाले तमाम सुरक्षा भेद डाले गए हैं। इन्हें केवल तकनीकी बारीकियों को समझने वाले बैंक कर्मचारी या फिर जांच एजेंसियां ही पकड़ पाती हैं।


दिल्ली या दूसरे राज्यों में जितनी भी नकली करेंसी पकड़ी गई है, वह पाकिस्तान की उच्च गुणवत्ता वाली प्रेस में छपी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तो पहले ही अपनी जांच रिपोर्ट में कह चुकी है कि नकली नोट बनाने के लिए जिस स्याही का इस्तेमाल किया गया है, उसका इस्तेमाल पाकिस्तानी करेंसी छापने के लिए किया जाता है।

जमीनी बॉर्डर और समुद्र के रास्ते पहुंचती है फेक करेंसी

इस करेंसी को दिल्ली तक लाने के लिए दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में बने आत्मनिर्भर आपराधिक नेटवर्क की मदद ली जाती है। जिन देशों से नकली नोट भारतीय सीमा में लाए जाते हैं, उनमें नेपाल, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका व संयुक्त अरब अमीरात शामिल है। जमीनी बॉर्डर और समुद्र के रास्ते यह करेंसी आसानी से दिल्ली तक पहुंच जाती है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में इस करेंसी को करीब 57 जगहों पर चलाया जाता है। यहीं से इसे दूसरे राज्यों में भेजते हैं। नकली करेंसी के मार्फत ही जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को मदद पहुंचाई जाती है। केंद्र व राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाएं साझा करने के लिए गृह मंत्रालय ने विशेष समन्वय केंद्र स्थापित किया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और एनआईए प्रमुख वाईसी मोदी भी कह चुके हैं कि आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए जरुरी है कि पहले उनकी सप्लाई चेन तोड़ी जाए। आतंकियों के मददगार, जो पर्दे के पीछे रह कर उन्हें हथियार और रुपया पैसा देते हैं, अब उनकी कमर तोड़ने का वक्त आ गया है। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) एक्ट के नए प्रावधान अब उन लोगों को कानून के शिकंजे में ला देंगे, जो आतंकियों की मदद करते हुए भी मौजूदा कानून के हल्के प्रावधानों का फायदा उठाकर बचते आ रहे थे। अब इस कानून के जरिए आतंकवादी गतिविधियों में अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल लोगों को सबक सिखाया जा सकेगा।

 

नोटबंदी से पहले किस राज्य में जब्त हुई कितनी नकली करंसी

वर्ष 2012

दिल्ली- 21 करोड़ (कुल नोट 440815)
तमिलनाडु- 4.50 करोड
उत्तरप्रदेश- 3.50 करोड़
कर्नाटक- 3 करोड़
महाराष्ट्र- 2.50 करोड़

वर्ष 2013              

दिल्ली- 10.25 करोड़ (कुल नोट 215092)
महाराष्ट्र- 6 करोड़
तमिलनाडु- 3.78 करोड़
आंध्रप्रदेश- 3.57 करोड़
गुजरात- 2.90 करोड़ 

वर्ष 2014

दिल्ली- 9 करोड़ (कुल नोट 183405)
महाराष्ट्र- 5.98 करोड़
गुजरात- 3.21 करोड़
तमिलनाडु- 3.08 करोड़
उत्तरप्रदेश- 3.01 करोड़ 

2015 (जनवरी से दिसंबर तक जब्त हुए नकली नोट)

दिल्ली- 5 करोड़ 15 लाख रुपये के मूल्य की करेंसी    
महाराष्ट्र- 1 करोड़ 72 लाख 
गुजरात- 1 करोड़ 59 लाख  

हरियाणा- 1 करोड़ 30 लाख 

उत्तर प्रदेश- 1 करोड़ 25 लाख 

नकली नोटों की संख्या

1000 रुपये के 88979 नोट

500 रुपये के 118315 नोट

100 रुपये के 65172 नोट

इस साल कुल 15.48 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई। 1100 मामले दर्ज हुए और 1178 आरोपी पुलिस गिरफ़्त में आए  

2016 (जनवरी से दिसंबर तक जब्त हुए नकली नोट)

पश्चिम बंगाल- 6 करोड़ 74 लाख रुपये के मूल्य की करेंसी    

दिल्ली- 5 करोड़ 98 लाख रुपये    

महाराष्ट्र- 2 करोड़ 77 लाख 

गुजरात- 2 करोड़ 38 लाख  

आंध्रप्रदेश- 1 करोड़ 35 लाख 

नकली नोटों की संख्या

2000 रुपये के 5262 नोट

1000 रुपये के 123721 नोट

500 रुपये के 210131 नोट

100 रुपये के 60689 नोट

इस साल कुल 24.61 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई। 1398 मामले दर्ज हुए और 1376 आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया 

2017 (जनवरी से दिसंबर तक जब्त हुए नकली नोट)

गुजरात- 9 करोड़ 8 लाख लाख रुपये के मूल्य की करेंसी    
दिल्ली- 6 करोड़ 78 लाख रुपये    

उत्तर प्रदेश- 2 करोड़ 86 लाख 

पश्चिम बंगाल- 1 करोड़ 93 लाख रुपये के मूल्य की करेंसी    

केरल- 1 करोड़ 30 लाख 

नकली नोटों की संख्या:

2000 रुपये के 74898 नोट

1000 रुपये के 65731 नोट

500 रुपये के 102815 नोट

100 रुपये के 92778 नोट

इस साल कुल 28.10 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई। 978 मामले दर्ज हुए और 1046 आरोपी गिरफ़्तार हुए 

2018 (जनवरी से दिसंबर तक जब्त हुए नकली नोट)

दिल्ली- 3 करोड़ 63 लाख रुपये 

तमिलनाडु- 2 करोड़ 84 लाख    

पश्चिम बंगाल- 2 करोड़ 8 लाख 

कर्नाटक- 1 करोड़ 71 लाख    

उत्तरप्रदेश- 1 करोड़ 33 लाख 

केरल- 1 करोड़ 30 लाख/ गुजरात-1 करोड़ 23 लाख  

सभी राज्यों में नकली नोटों की कुल संख्या

2000 रुपये के 54674 नोट

1000 रुपये के 27068 नोट

500 रुपये के 33605 नोट (नए)

500 रुपये के 25874 नोट (पुराने)

100 रुपये के 84008 नोट

इस साल कुल 17.75 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई, 884 मामले दर्ज हुए और 969 आरोपियों को गिरफ्तार किए गया

2019 (जनवरी से 18 जून तक जब्त हुए नकली नोट)

महाराष्ट्र- 1 करोड़ 65 लाख रुपये 

गुजरात- 87 लाख 49 हजार 

तमिलनाडु- 65 लाख 76 हजार    

पश्चिम बंगाल- 82 लाख 43 हजार 

कर्नाटक- 1 करोड़ 71 लाख    

उत्तरप्रदेश- 1 करोड़ 33 लाख 

सभी राज्यों में नकली नोटों की कुल संख्या:

2000 रुपये के 20068 नोट

1000 रुपये के 1215 नोट 

500 रुपये के 1692 नोट (नए)

500 रुपये के 13513 नोट (पुराने)

100 रुपये के 10682 नोट 

इस साल कुल 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई, 254 सौ मामले दर्ज हुए और 357 आरोपी गिरफ़्तार किए गए 

क्या कहते हैं गृह राज्य मंत्री

करेंसी नोटों अथवा बैंक नोटों की जालसाजी, भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 489 के तहत एक अपराध है। उच्च गुणवत्ता वाली जाली भारतीय करेंसी का निर्माण अथवा तस्करी या परिचालन के माध्यम से भारत की मौद्रिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाना विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 की धारा 15 के तहत यह एक आतंकवादी अपराध है। इन दोनों ही मामलों में अधिकतम सजा उम्रकैद है। एनआईए की ओर से जांचे गए उच्च गुणवत्ता वाली भारतीय जाली करेंसी के मामलों की सुनवाई विशेष एनआईए न्यायालयों में होती है। यहां पर नियमित तौर पर सुनवाई की जाती है। नकली करेंसी के प्रवाह को पूरी तरह खत्म करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सीमा पार से आने वाली नकली भारतीय करेंसी को लेकर भी केंद्र सरकार सचेत है।

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