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सूखे के बीच इस गांव में है भरपूर पानी, आखिर क्या है राज?
ब्यूरो/अमर उजाला, झांसी
Updated Sat, 30 Apr 2016 05:48 AM IST
सार
- सौर ऊर्जा प्लांट से छह साल से रोशन हो रहा गांव
- जल संरक्षण के लिए लोगों ने खेतों में खुदवा रखे हैं कुएं
- जलस्तर अच्छा होने से नहीं होती है पानी की किल्लत
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जलस्तर अच्छा होने से नहीं होती है पानी की किल्लत
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विस्तार
सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड में एक गांव ऐसा भी है, जहां न पानी की किल्लत है और न ही बिजली की। मूलभूत सुविधाओं से लैस इस गांव की खुशहाली गांव वालों की पहल और उनकी मेहनत की देन है।
फरवरी 2009 में ग्रामीण विद्युतीकरण पर काम कर रही नार्वे की स्काटेक सोलर एवं वित्तीय भारत ने बड़ागांव ब्लॉक के रमपुरा गांव में पचास लाख रुपये की लागत से 8.7 किलोवॉट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर मिनी ग्रिड पॉवर प्लांट) लगाया था। इससे पहले गांव में बिजली नहीं थी। तभी से इस सोलर प्लांट की बदौलत गांव के 75 घर रोशन हो रहे हैं।
हालांकि तीन महीने पहले गांव में बिजली के तार जरूर खिंच गए, लेकिन लोगों ने सोलर लाइट के अपने कनेक्शन नहीं हटाए हैं। सोलर प्लांट से चार रुपये की दर से 20 से 22 घंटे बिजली मिल जाती है। जबकि बिजली महकमे की आपूर्ति चौदह से सोलह घंटे ही मिल पाती है।
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गांव में पानी की कोई समस्या नहीं। यहां तीन सरकारी हैंडपंप हैं, मगर अधिकांश घरों में बोरिंग करके ही हैंडपंप लगे हैं। गांव के पास से सिमरधा नहर निकली है, जिसका पानी खेतों तक नहीं पहुंचता है। जल संरक्षण के लिए लोगों ने खेत पर कुएं खुदवा रखे हैं। इसका नतीजा यह है कि भूजल का स्तर सामान्य बना रहता है।
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फरवरी 2009 में ग्रामीण विद्युतीकरण पर काम कर रही नार्वे की स्काटेक सोलर एवं वित्तीय भारत ने बड़ागांव ब्लॉक के रमपुरा गांव में पचास लाख रुपये की लागत से 8.7 किलोवॉट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर मिनी ग्रिड पॉवर प्लांट) लगाया था। इससे पहले गांव में बिजली नहीं थी। तभी से इस सोलर प्लांट की बदौलत गांव के 75 घर रोशन हो रहे हैं।
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हालांकि तीन महीने पहले गांव में बिजली के तार जरूर खिंच गए, लेकिन लोगों ने सोलर लाइट के अपने कनेक्शन नहीं हटाए हैं। सोलर प्लांट से चार रुपये की दर से 20 से 22 घंटे बिजली मिल जाती है। जबकि बिजली महकमे की आपूर्ति चौदह से सोलह घंटे ही मिल पाती है।
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गांव में पानी की कोई समस्या नहीं। यहां तीन सरकारी हैंडपंप हैं, मगर अधिकांश घरों में बोरिंग करके ही हैंडपंप लगे हैं। गांव के पास से सिमरधा नहर निकली है, जिसका पानी खेतों तक नहीं पहुंचता है। जल संरक्षण के लिए लोगों ने खेत पर कुएं खुदवा रखे हैं। इसका नतीजा यह है कि भूजल का स्तर सामान्य बना रहता है।
थाने तक नहीं जाता गांव का विवाद
मामला थाने की जगह पंचायत के पास
- फोटो : demo pic
सौर ऊर्जा प्लांट का रखरखाव करने के लिए गांव के ही 16 लोगों की कमेटी गठित की गई है। कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम सिंह यादव ने बताया कि पिछले छह साल से प्लांट में कभी कोई दिक्कत नहीं आई। इससे होने वाली आय चौकीदार के वेतन आदि पर खर्च की जाती है।
रमपुरा गांव में अगर दो पक्षों में कभी झगड़ा हो भी जाए तो मामला थाने की जगह पंचायत के पास पहुंचता है। कैसी भी स्थिति हो, पंचायत समझौता कराने का पूरा प्रयास करती है। जो पक्ष दोषी पाया जाता है, उसे गांव के मंदिर में दो हजार रुपये तक का सहयोग करने का आग्रह किया जाता है।
पिछले डेढ़ साल से गांव में कोई झगड़ा नहीं हुआ। प्राथमिक विद्यालय रमपुरा में 40 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय के पठन-पाठन के माहौल पर भी रमपुरा ऊर्जा विकास समिति विशेष ध्यान देती है।
रमपुरा गांव में अगर दो पक्षों में कभी झगड़ा हो भी जाए तो मामला थाने की जगह पंचायत के पास पहुंचता है। कैसी भी स्थिति हो, पंचायत समझौता कराने का पूरा प्रयास करती है। जो पक्ष दोषी पाया जाता है, उसे गांव के मंदिर में दो हजार रुपये तक का सहयोग करने का आग्रह किया जाता है।
पिछले डेढ़ साल से गांव में कोई झगड़ा नहीं हुआ। प्राथमिक विद्यालय रमपुरा में 40 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय के पठन-पाठन के माहौल पर भी रमपुरा ऊर्जा विकास समिति विशेष ध्यान देती है।