बिना ठोस संकेत के चीन के साथ नहीं होगी शीर्ष स्तरीय कूटनीतिक वार्ता

हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Tue, 23 Jun 2020 07:24 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

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भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक वार्ता के लिए फिलहाल जल्दबाजी में नहीं है। भारत चाहता है कि इस स्तर की बातचीत से पहले बीच का रास्ता निकलने का कोई ठोस संकेत मिले। उसकी निगाहें दोनों देशों के बीच जारी सैन्य स्तर की वार्ता पर है।
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सूत्रों का कहना है कि सैन्य स्तर की बातचीत से मिले संकेत से ही भविष्य में शीर्ष स्तरीय कूटनीतिक वार्ता का भविष्य तय होगा। भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध के दौरान रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने तटस्थ भूमिका निभाई थी। मगर इस बार स्थिति दूसरी है। रूस फिलहाल एलएसी पर तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका में है।
उसकी कोशिश दोनों देशों को कूटनीतिक वार्ता की मेज पर लाने की है। इसलिए मंगलवार को भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि दोनों ही पक्ष कह रहे हैं कि इस बैठक में कोरोना केंद्रित ही बातचीत होगी।
सरकार के एक सूत्र के मुताबिक, तनाव के चरम पर होने के बावजूद भारत ने कूटनीतिक बातचीत का विकल्प खुला रखा है। 23 जून की बैठक का स्थगित न होना इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है। एलएसी पर तनातनी के बावजूद भारत और चीन इस बैठक के लिए सहमत हुए। हालांकि भारत इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले फूंक फूंक कर कदम उठा रहा है।

भारत चाहता है कि शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक बातचीत का सिलसिला तब शुरू हो जब सैन्य स्तर की जारी बातचीत में एक रोड मैप तैयार हो जाए। इससे कूटनीतिक बातचीत के बाद तनाव खत्म होने की मजबूत संभावना बनेगी। बिना ठोस संकेत के इस तरह की बैठक को भारत तवज्जो नहीं देना चाहता।
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नरम रुख का नहीं देना चाहता संकेत

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