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सुप्रीम कोर्ट: 'मीडिया चैनल को विनियमित करने के लिए मजबूत तंत्र मौजूद', सरकार ने शीर्ष अदालत से कहा

Tue, 19 Sep 2023 11:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 19 Sep 2023 11:20 PM IST
सार

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि केंद्र ने हमेशा पत्रकारिता की आजादी की रक्षा की है और इस क्षेत्र में आत्म-संयम एवं आत्म-नियमन को बढ़ावा देने की नीति को प्रोत्साहित किया है।

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No statutory void, strong mechanism to regulate media channels: Center in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निजी टेलीविजन चैनल की सामग्री के नियमन के लिए कोई वैधानिक शून्यता नहीं है, बल्कि एक मजबूत तंत्र मौजूद है। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल करते हुए यह बात कही।   

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सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हलफनामे में कहा कि केंद्र ने हमेशा पत्रकारिता की आजादी की रक्षा की है और इस क्षेत्र में आत्म-संयम एवं आत्म-नियमन को बढ़ावा देने की नीति को प्रोत्साहित किया है। केंद्र ने कहा कि उसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि मीडिया संस्थान और पत्रकार समाज के प्रति अपनी महत्वपू्ण भूमिका और जिम्मेदारियों को स्वीकार करें और खुद के द्वारा विकसित तरीकों के जिरए अपने कामकाज के मानकों को ऊंचा उठाएं। 
 

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हलफनामे में आगे कहा गया कि यह सुनिश्चित करता है कि मीडिया के कामकाज में सरकारी अधिकारियों हस्तक्षेप कम से कम हो और केवल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ही सरकार का वैधानिक तंत्र काम करता है।
 

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इसमें कहा,'जहां तक गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के प्रसारण के नियमन और दर्शकों के लिए शिकायत निवारण तंत्र का सवाल है, इसमें कोई वैधानिक शून्यता नहीं है। निजी टेलीविजन चैनल की सामग्री के विनियमन का एक मजबूत तंत्र है जो कि केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित किया गया है।'
 

मंत्रालय ने कहा, इस प्रकार केंद्र सरकार ने शुरुआत से ही जानबूझकर खुद पर आत्म-संयम लगाया है और मीडिया संस्थानों और पत्रकारों द्वारा स्व-नियमन के तंत्र को बढ़ावा देने के लिए संयम की व्यवस्था अपनाई है।यह हलफनामा बंबई उच्च न्यायालय की जनवरी 2021 की टिप्पणियों के खिलाफ न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) की याचिका के जवाब में दायर किया गया।
 

उच्च न्यायालय ने कहा था कि ‘मीडिया ट्रायल’ अदालत की अवमानना है। अदालत ने प्रेस से आग्रह किया था कि वह लक्ष्मण रेखा को पार न करे, क्योंकि उसे कुछ समाचार चैनल द्वारा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की कवरेज ‘अवमाननापूर्ण’ लगी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि मौजूदा स्व-नियामक तंत्र वैधानिक तंत्र का स्वरूप नहीं ले सकता है।
 

हालांकि, मंत्रालय ने हलफनामे में कहा कि सरकार के दृष्टिकोण को न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) जैसे स्वैच्छिक संघों द्वारा गलत समझा गया, जिसने जोर दिया कि केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से बनाए जा सकने वाले वैधानिक नियमों के बजाय, सरकार को इसे समाचार प्रसारण के क्षेत्र में एकमात्र प्राधिकरण के रूप में मान्यता देनी चाहिए।

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