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Bombay High Court: 'विशालगढ़ किला परिसर में किसी भी घर को ध्वस्त नहीं किया गया', हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार

Mon, 29 Jul 2024 11:26 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 29 Jul 2024 11:26 PM IST
सार

Bombay High Court: पुलिस ने एक हलफनामे में दावा किया कि भारी बारिश और कम दृश्यता के चलते 14 जुलाई को विशालगढ़ किला इलाके में 'अतिक्रमण' के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करना उनके कर्मियों के लिए मुश्किल था।

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No residential structures demolished in Vishalgad Fort premises: Maharashtra govt to HC
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि उसने इस महीने कोल्हापुर जिले के विशालगढ़ किले में किसी भी घर को ध्वस्त नहीं किया है। मराठा साम्राज्य से जुड़ा सदियों पुराना यह इलाका विरोध प्रदर्शन का स्थल बन गया था। 

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पुलिस ने अदालत में क्या कहा
कोल्हापुर पुलिस ने एक हलफनामे में यह भी दावा किया कि भारी बारिश और कम दृश्यता के चलते 14 जुलाई को विशालगढ़ किला इलाके में 'अतिक्रमण' के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करना उनके कर्मियों के लिए मुश्किल था। पुलिस ने कहा कि हिंसक आंदोलन में कथित संलिप्तता के लिए पूर्व सांसद छत्रपति संभीजीराजे, कार्यकर्ता रवींद्र पडवाल और बंदा सालुंखे सहित सौ से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। 
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स्थानीय निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी पीठ
हलफनामा न्यायमूर्ति बीपी कोलोबावाला और न्यायमूर्तिक फिर्दोष पूनीवाला की पीठ के समक्ष दायर किया गया था। पीठ क्षेत्र के निवासियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जिनमें दावा किया गया था कि निषेधाज्ञा के बावजूद अधिकारियों ने किले के कई आवासीय परिसरों को ध्वस्त किया। याचिकाओं में भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस द्वारा निष्क्रियता का भी आरोप लगाया गया है। उनके घरों में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई थी। 
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पीठ ने हलफनामा दायर करने को कहा
महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने पीठ को बताया कि एक सरकारी परिपत्र (सर्कुलर) के अनुसार मानसून के मौसम के बीच कोई भी आवासीय परिसर ध्वस्त नहीं किया गया। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील एस.बी.तालेकर ने दावा किया कि कुछ मकान ध्वस्त किए गए। पीठ ने तालेकर को इसको लेकर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। पीठ ने पिछले हफ्ते पुलिस से इस बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी कि उसने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। हलफनामे में पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। 


किले की मार्च की योजना बना रहे थे कुछ समूह: पुलिस
पुलिस ने हलफनामे में इस बात पर जोर दिया कि उसने अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए। हलफनामे में पुलिस ने दावा किया कि लोगों के समूहों को किले की ओर मार्च करने से रोकने के लिए विभिन्न स्थानों पर नाके लगाए गए थे। पुलिस ने इस तरह के मार्च के लिए अनुमति नहीं दी थी। यह जानकारी थी कि कुछ लोगों के समूह अभी भी किले की ओर से मार्च करने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने कहा, 14 जुलाई को भारी बारिश हुई थी। कोहरा बना हुआ था। कम दृश्यता थी और अधिकारियों के लिए उचित करार्रवाई करना मुश्किल था। फिर भी इस अनिश्चित स्थिति में ये अधिकारी कानून और व्यवस्था को बनाए रखने की अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे। 

 

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