2000 रु. के नोट पर सरकार ने लिया एक बड़ा फैसला
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नोटबंदी के बाद 2000 रुपये का नोट जब सामने आया तो जनमानस में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। जानकारों ने 2000 रुपये का नोट लाने पर सरकार को यह कहते हुए भी घेरा कि बड़े नोट से रिश्वत के लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा। खुद सरकार में शामिल कई लोग पहले कह चुके थे कि देश को भ्रष्टाचटार मुक्त बनाने के लिए छोटे नोटों पर अमल किया जाना चाहिए। नोटबंदी के दौरान और उसके बाद से लगातार लगाए जा रहे उन कयासों पर अब वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब देकर विराम लगा दिया है कि 2000 का नोट बंद नहीं किया जाएगा।
9 नवंबर 2016 को पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बंद किए जाने के बाद 2000 रुपये का नोट सरकार की तरफ से जारी किया गया था। जेटली ने लोकसभा में अपने लिखित जवाब में साफ कहा इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है कि 2000 रुपये का नोट चलन से बाहर होगा।
नोटबंदी से देश की जीडीपी को फायदा!
जेटली ने कहा कि 10 दिसंबर 2016 के आंकड़ों के मुताबिक पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बैंकों में लौटने से भारतीय रिजर्व बैंक में करीब 12.44 लाख करोड़ रुपये जमा हुए थे।
समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक जेटली ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि नोटबंदी और उसके बाद अमल किए गए उपायों से नकली नोटों पर लगाम लगी। उन्होंने बताया कि 3 मार्च 2017 तक 12 लाख करोड़ की भारतीय मुद्रा चलन में आई और 27 जनवरी तक यह आंकड़ा 9.921 लाख करोड़ का था।
पुराने नोटों को बंद करने के बारे में जेटली ने कहा कि इससे देश में एक 'सामान्य स्थिति' बनेगी, जिससे जीडीपी दुरुस्त होगी। जेटली ने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद बैंकों में लेन-देन बढ़ा है, ब्याज दरों में भी कमी आई है। बैंकों से ग्राहकों को और सहूलियत मिले, ऐसे हालात बने हैं।