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रविशंकर प्रसाद ने कहा- सोशल मीडिया के लिए नियामक नियुक्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं
Thu, 18 Mar 2021 04:10 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 18 Mar 2021 04:10 AM IST
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रविशंकर प्रसाद (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि मंत्रालय के पास सोशल मीडिया के लिए नियामक नियुक्त करने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।
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हालांकि सरकार ने आईटी कानून के तहत इंफारमेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021 जारी किए है। इसमें सोशल मीडिया संबंधी दिशानिर्देशों के पालन की बात कही गई है।
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प्रसाद ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया गया है। मौजूदा समय में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास सोशल मीडिया के लिए एक नियामक नियुक्त करने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं है।
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सरकार ने फरवरी में फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियों और नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी को आपत्तिजनक सामग्री को 36 घंटे के अंदर हटाने और शिकायत निवारण तंत्र बनाने का निर्देश दिया था। ये दिशानिर्देश ट्विटर और व्हाट्सएप के लिए भी अनिवार्य बनाए गए थे। उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देश पर 2020 के दौरान 9849 यूआरएल/अकाउंट/वेबपेज बंद किए गए। इनमें से ज्यादातर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर थे।
सरकार के सोशल मीडिया पर नियंत्रण का प्रभाव अभिव्यक्ति की आजादी पर पड़ने को लेकर केंद्र द्वारा क्या कोई सर्वे कराया गया है, पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई अध्ययन सरकार ने कराया है। सरकार आलोचनाओं, मतभेदों का स्वागत करती है।
साथ ही सोशल मीडिया पर सवाल पूछने के लोगों के अधिकार के भी पक्ष में हैं लेकिन लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत लोगों को अभिव्यक्ति स्वतंत्रता है तो देश सुरक्षा, संप्रभुता, कानून व्यवस्था और बाहरी देशों के साथ दोस्ताना रिश्तों के हितों पर गलत असर को देखते हुए अनुच्छेद 19(2) के तहत रोक का भी प्रावधान है। साथ ही यह भी अहम है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी महिला के सम्मान से खिलवाड़, हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देने में न हो।
व्हाट्सएप को अपनी प्रस्तावित गोपनीयता नीति में बदलाव की समीक्षा करने को कहा
सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने लोकसभा में बुधवार को बताया कि सरकार ने व्हाट्सएप को अपनी प्रस्तावित गोपनीयता नीति बदलाव की समीक्षा करने को कहा है।
व्हाट्सएप को प्रस्तावित नीति में बदलाव को लेकर भारत समेत दुनियाभर में आलोचना का सामना करना पड़ा। इस नीति के तहत व्हाट्सएप उपभोक्ताओं का डाटा फेसबुक के साथ साझा करने का प्रस्ताव है। इसका विरोध हो रहा है।
ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर बने कानून
राज्यसभा में भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने मांग की कि ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर ही भारत में ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए जिससे फेसबुक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां विज्ञापन से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा खबरों की सामग्री तैयार करने वाले स्थानीय कंपनियों को मिल सके।
शून्यकाल में उन्होंने प्रिंट मीडिया और टीवी चैनलों की आर्थिक स्थिति का मामला उठाते हुए कहा कि यह सेक्टर अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।