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Madras HC: मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हाथियों का अधिग्रहण नहीं कर पाएंगे निजी व्यक्ति और धार्मिक संस्थान
Wed, 01 Mar 2023 12:52 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 01 Mar 2023 12:52 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा, 'अब यह निर्णय लेने का समय आ गया है कि कैद में रखे गए ऐसे सभी हाथियों (मंदिरों और निजी स्वामित्व वाले) को सरकारी पुनर्वास शिविरों में स्थानांतरित कर दिया जाए। सरकार, पर्यावरण और वन विभाग के सचिव, मानव संसाधन और सीई के सचिव के साथ समन्वय कर सकते हैं।'
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हाथी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने हाथियों के संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि अब तमिलनाडु में निजी व्यक्ति और धार्मिक संस्थान हाथियों का अधिग्रहण नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने इसपर पूरी तरह से रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार, पर्यावरण और वन विभाग को सभी मंदिरों और अन्य निजी स्वामित्व वाले हाथियों का निरीक्षण करने को भी कहा है।
कोर्ट ने कहा, 'अब यह निर्णय लेने का समय आ गया है कि कैद में रखे गए ऐसे सभी हाथियों (मंदिरों और निजी स्वामित्व वाले) को सरकारी पुनर्वास शिविरों में स्थानांतरित कर दिया जाए। सरकार, पर्यावरण और वन विभाग के सचिव, मानव संसाधन और सीई के सचिव के साथ समन्वय कर सकते हैं।'
कोर्ट ने 60 साल की हथिनी 'जयमाला' की कस्टडी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि हथिनी जयमाला को उसके महावत से अलग नहीं किया जा सकता है। इसलिए उसे महावत के अधीन ही रखना चाहिए।
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न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन हाल ही में जयमाला हथिनी को देखने पहुंचे थे। उस वक्त उन्होंने उसके शरीर पर चोटें पाईं थीं। उन्होंने विरुधुनगर के जिला कलेक्टर को पशुपालन विभाग की मदद से हाथी की देखभाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जयमाला को आजीवन देखभाल के लिए सरकारी हाथी पुनर्वास शिविर में स्थानांतरित कर दिया जाए क्योंकि हाथी की उम्र 60 साल से अधिक है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल पिछले साल सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो तमिलनाडु में रह रही एक हथिनी जयमाला का था। जिसमें कहा गया कि जयमाला को प्रताड़ित किया जा रहा है। उसे कई बार बुरी तरह से पीटा गया। वीडियो में जयमाला के माथे के पास घाव नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इसका विरोध शुरू किया। केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस वीडियो पर एक ट्वीट करके कहा कि हाथी पूरी तरह ठीक है और मारपीट का वीडियो बहुत पुराना है।
असम सरकार ने किया था दावा
हथिनी का वीडियो वायरल होने पर असम सरकार ने इसपर दावा किया था। असम का दावा है कि यह हाथी उनका है। उन्होंने तमिलनाडु को जयमाला सहित नौ हाथियों को लीज पर दिया था। असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एमके यादव ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट में दायर याचिका में हमने कहा है कि हाथी जयमाला हमारी है और हमने तमिलनाडु से इसे वापस करने को कहा है। हमने ये हाथी लीज पर तमिलनाडु को दिए थे। उन्होंने कहा कि गिफ्ट और लीज के मामले में कोई कानूनी बंधन नहीं होता है। हमने उनसे पहले भी अपने हाथी वापस मांगे थे। हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने हथिनी को वापस करने से इनकार कर दिया था। इसी के बाद मामला कोर्ट में पहुंचा।
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कोर्ट ने कहा, 'अब यह निर्णय लेने का समय आ गया है कि कैद में रखे गए ऐसे सभी हाथियों (मंदिरों और निजी स्वामित्व वाले) को सरकारी पुनर्वास शिविरों में स्थानांतरित कर दिया जाए। सरकार, पर्यावरण और वन विभाग के सचिव, मानव संसाधन और सीई के सचिव के साथ समन्वय कर सकते हैं।'
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कोर्ट ने 60 साल की हथिनी 'जयमाला' की कस्टडी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि हथिनी जयमाला को उसके महावत से अलग नहीं किया जा सकता है। इसलिए उसे महावत के अधीन ही रखना चाहिए।
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न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन हाल ही में जयमाला हथिनी को देखने पहुंचे थे। उस वक्त उन्होंने उसके शरीर पर चोटें पाईं थीं। उन्होंने विरुधुनगर के जिला कलेक्टर को पशुपालन विभाग की मदद से हाथी की देखभाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जयमाला को आजीवन देखभाल के लिए सरकारी हाथी पुनर्वास शिविर में स्थानांतरित कर दिया जाए क्योंकि हाथी की उम्र 60 साल से अधिक है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल पिछले साल सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो तमिलनाडु में रह रही एक हथिनी जयमाला का था। जिसमें कहा गया कि जयमाला को प्रताड़ित किया जा रहा है। उसे कई बार बुरी तरह से पीटा गया। वीडियो में जयमाला के माथे के पास घाव नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इसका विरोध शुरू किया। केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस वीडियो पर एक ट्वीट करके कहा कि हाथी पूरी तरह ठीक है और मारपीट का वीडियो बहुत पुराना है।
असम सरकार ने किया था दावा
हथिनी का वीडियो वायरल होने पर असम सरकार ने इसपर दावा किया था। असम का दावा है कि यह हाथी उनका है। उन्होंने तमिलनाडु को जयमाला सहित नौ हाथियों को लीज पर दिया था। असम के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एमके यादव ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट में दायर याचिका में हमने कहा है कि हाथी जयमाला हमारी है और हमने तमिलनाडु से इसे वापस करने को कहा है। हमने ये हाथी लीज पर तमिलनाडु को दिए थे। उन्होंने कहा कि गिफ्ट और लीज के मामले में कोई कानूनी बंधन नहीं होता है। हमने उनसे पहले भी अपने हाथी वापस मांगे थे। हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने हथिनी को वापस करने से इनकार कर दिया था। इसी के बाद मामला कोर्ट में पहुंचा।