फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   No Money for Terror: Pakistan and Afghanistan will not attend NMFT conference

No Money for Terror: टेरर फंडिंग के खिलाफ सम्मेलन में नहीं आएंगे पाक-अफगानिस्तान, चीन को बुलाया मगर आया नहीं

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 17 Nov 2022 06:14 PM IST
सार

No Money for Terror: राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डीजी दिनकर गुप्ता ने कहा, देश में खालिस्तानी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग हो रही है। एनआईए के पास इसके पुख्ता सबूत हैं। कश्मीर के आतंकियों को भी टेरर फंडिंग होती है। एनआईए द्वारा इस मामले में जांच की जा रही है। देश में आतंकी घटनाएं भले ही कम हो रही हैं, लेकिन आतंक से जुड़ी फंडिंग पर अभी संपूर्ण वार करना अभी बाकी है...

विज्ञापन
No Money for Terror: Pakistan and Afghanistan will not attend NMFT conference
No Money for Terror: NMFT conference - फोटो : Agency

विस्तार

'आतंकी फंडिंग' पर अंकुश लगाने के लिए 18 और 19 नवंबर को नई दिल्ली में होने जा रही वैश्विक कॉन्फ्रेंस 'No Money for Terror' में पड़ोसी मुल्क शामिल नहीं होंगे। गुरुवार को एक प्रेसवार्ता में एनआईए के डीजी दिनकर गुप्ता ने बताया, टेरर फंडिंग रोकने के लिए ये कॉन्फ्रेंस बहुत अहम है। 72 देशों के प्रतिनिधि इस कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे। इसके अलावा 15 मल्टीनेशनल समूह एवं एनजीओ भी कॉन्फ्रेंस में शिरकत करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान, 'नो मनी फॉर टेरर फंडिंग' कॉन्फ्रेंस में नहीं होंगे। इसके अलावा चीन को आमंत्रित किया गया है, लेकिन अभी उसके प्रतिनिधि के भाग लेने की पुष्टि नहीं हो सकी है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान, को आमंत्रित नहीं किया गया है।

विज्ञापन

कॉन्फ्रेंस में होंगे चार सत्र

डीजी एनआईए ने कहा, आतंकियों को होने वाली टेरर फंडिंग को लेकर इस कॉन्फ्रेंस में चार सत्र आयोजित होंगे। पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह पहले सत्र का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शनिवार को कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित करेंगे। पहले सत्र में टेरर फंडिंग के नए-नए तौर तरीकों पर चर्चा होगी। दूसरे सत्र में औपचारिक और अनौपचारिक वित्तीय संगठन, चर्चा के केंद्र में रहेंगे। वित्त राज्य मंत्री भी एक सत्र में भाग लेंगे। 19 नवंबर के सत्र में टेरर फंडिंग को काउंटर करने वाली तकनीकों पर विचार किया जाएगा। दूसरे सत्र में टेरर फंडिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी। सोशल मीडिया के तौर तरीके भी आतंकी फंडिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने वाले संगठन सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर टेटर फंड जनरेट करने का प्रयास करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए विभिन्न देशों के मध्य आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।  

विज्ञापन

राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डीजी दिनकर गुप्ता ने कहा, देश में खालिस्तानी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग हो रही है। एनआईए के पास इसके पुख्ता सबूत हैं। कश्मीर के आतंकियों को भी टेरर फंडिंग होती है। एनआईए द्वारा इस मामले में जांच की जा रही है। देश में आतंकी घटनाएं भले ही कम हो रही हैं, लेकिन आतंक से जुड़ी फंडिंग पर अभी संपूर्ण वार करना अभी बाकी है। इसे भी रोका जाएगा। आतंकी एवं चरमपंथी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता का इंतजाम करना और उसे दशहतगर्दों तक पहुंचाना, ये बातें अधिकांश देशों के लिए एक चुनौती बनी हैं। इस काम में औपचारिक और अनौपचारिक, दोनों तरीके इस्तेमाल हो रहे हैं। टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तालमेल कैसे बढ़ाया जाए और नई टेक्नीक जैसे क्रिप्टो करेंसी व क्राउडफंडिंग का तोड़ कैसे निकले, 'नो मनी फॉर टेरर फंडिंग' कॉन्फ्रेंस में विस्तृत चर्चा होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्रिप्टो करेंसी और क्राउडफंडिंग कर रहे इस्तेमाल

आतंकी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता का इंतजाम, इसके लिए अनियमित चैनल और 'यूज ऑफ कैश कूरियर' का उपयोग संभव है। पारंपरिक वित्तीय सेवाओं के लिए अनौपचारिक सिस्टम, कम खर्चीला है। इसके अलावा उसकी तेज स्पीड, भरोसा, उपभोक्ता पहचान चेक व ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड की कमी और टैक्स चोरी, आदि कारण भी इस्तेमाल को प्रोत्साहन दे सकते हैं। यही सब तरीके आतंकी फंडिंग और मनी लॉंड्रिंग में प्रयोग किए जाते हैं। दोनों तरह के मामलों में इन तरीकों के इस्तेमाल के पीछे एक ही मकसद होता है कि किसी भी तरीके से ट्रांजेक्शन को संबंधित राज्य की एजेंसियों की जांच से छिपा लिया जाए।

आतंकी फंडिंग (टीएफ) और मनी लॉंड्रिंग (एमएल), ऐसी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और ड्रग ट्रैफिकिंग में अधिक होने लगा है। वे इसे वित्त और कॉमर्स का वैद्य तरीका साबित करने का प्रयास करते हैं। इसके जरिए अपराधियों को गैर कानूनी तरीके से लाभ कमाने का मौका मिलता है। आतंकी एवं अन्य अपराधी, अब धन शोधन के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। आतंकी एवं चरमपंथी संगठन, नई टेक्नीक जैसे क्रिप्टो करेंसी और क्राउडफंडिंग का तरीका इस्तेमाल में ला रहे हैं। आतंकी फंडिंग व क्राउड सोर्स आदि के लिए 'डार्कवेब' प्रयोग किया जाने लगा है। अमेरिका ने डार्क वेब का 'फुल प्रूफ' सिस्टम अपनी सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के लिए तैयार किया था। जैसे ही यह सिस्टम इन एजेंसियों से बाहर गया, तो लोगों ने इसे अपने तरीके से इसे तोड़ दिया और मनमर्जी पूर्वक इस्तेमाल करने लगे। इसे 'टोर' और 'द ओनियन राउटर' भी कहा जाता है। इस नेटवर्क में 'यूजर' को छिपा दिया जाता है।

डार्क वेब पर नहीं चलता यूजर का पता

आतंक, नशा, हथियार और साइबर क्राइम, ऐसे अपराधों में अब यही तकनीक इस्तेमाल होने लगी है। कौन ले रहा है और कौन दे रहा है, 'द ओनियन राउटर' में यह कोई नहीं जान पाता। व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सोशल मीडिया के दूसरे माध्यम भी आतंकियों द्वारा प्रयोग किए जा रहे हैं। डार्क वेब या डार्क नेट, आतंकी गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग व ड्रग्स की बुकिंग और सप्लाई का बड़ा जरिया बन गया है। इसके इस्तेमाल से इंटरनेट पर असली यूजर सामने नहीं आता। यूजर कहां पर है, उसकी ट्रैकिंग और सर्विलांस, जांच एजेंसियों के लिए यह काम बहुत मुश्किल होता है। सूत्रों के मुताबिक, साइबर क्राइम को लेकर वैश्विक स्तर पर कानून और नियमों को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी है। बहुपक्षीय और बहु हितधारक अप्रोच, आतंक वित्त पोषण जैसे खतरों की पहचान और उससे निपटने में मददगार साबित हो सकती है। एक प्रभावी कानूनी फ्रेमवर्क, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे संस्थानों की मॉनीटरिंग, कंट्रोल और सुधार के लिए आवश्यक है।

कुछ वर्षों से डार्क वेब जैसी तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है। आतंकी एवं चरमपंथी समूह, अपनी गतिविधियों के लिए अब एनजीओ जैसी संस्थाओं का उपयोग भी करने लगे हैं। आतंकी फंडिंग को लेकर विश्व स्तर पर ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। ये सभी देशों के सामने एक बड़ी चुनौती है। विभिन्न देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय लेवल पर आपसी सहयोग होना बेहद जरूरी है। आतंकी गतिविधियों एवं मनी लांड्रिंग के बदलते तरीकों पर सभी देशों की कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों के बीच एकजुटता होनी चाहिए। प्राइवेट एवं सरकारी क्षेत्र के बीच सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान की व्यवस्था करनी होगी। विभिन्न देशों की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के बीच तालमेल बढ़ाना होगा। आतंकी फंडिंग को रोकने के लिए जो काम होना चाहिए और जो मौजूदा समय में हो रहा है, उसके बीच बड़ा अंतर है। विभिन्न देशों द्वारा जो कदम उठाए गए हैं, वे तय क्षमता से बहुत पीछे हैं। विकासशील राष्ट्रों को ऐसी बैठकों को प्राथमिकता देनी होगी। इन सबके लिए देशों में राजनीतिक इच्छाशक्ति का होना बहुत आवश्यक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed