{"_id":"68345263eb8edf3344003d50","slug":"no-impediment-in-raising-retirement-age-of-mp-district-court-judges-to-61-yrs-sc-2025-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: एमपी में जिला न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 61 साल करने में कोई कानूनी रुकावट नहीं, सुप्रीम कोर्ट का बयान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: एमपी में जिला न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 61 साल करने में कोई कानूनी रुकावट नहीं, सुप्रीम कोर्ट का बयान
Mon, 26 May 2025 05:07 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 26 May 2025 05:07 PM IST
सार
इस मामले में सीजेआई गवई ने सोमवार को कहा कि हाल ही में तेलंगाना सरकार की तरफ से दायर आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जिला न्यायाधीशों की उम्र 61 साल तक बढ़ाने में कोई कानूनी रोक नहीं है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने भी यही मांग रखी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी।
विज्ञापन
Supreme Court
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मध्यप्रदेश में जिला न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की उम्र 61 साल करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसे मध्यप्रदेश जजेस एसोसिएशन ने दाखिल किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या की टिप्पणी?
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा कि वह इस मुद्दे पर अगले दो महीनों के भीतर फैसला ले, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
यह भी पढ़ें - Karnataka: केंद्रीय मंत्री का सिद्धारमैया पर हमला, कहा- कांग्रेस सरकार तानाशाह से भी बदतर काम कर रही
विज्ञापन
क्या है याचिका?
2018 में, मध्यप्रदेश जजेस एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें जिला न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग की गई थी। इसके बाद में एसोसिएशन ने मांग में संशोधन कर इसे 61 वर्ष तक सीमित कर दिया, ताकि अन्य राज्यों के समान एकरूपता लाई जा सके।
पहले हाईकोर्ट ने क्यों किया था इनकार?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पहले इस मांग को साल 2002 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर खारिज कर दिया था। यह फैसला ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन केस में आया था, जिसे हाईकोर्ट ने उम्र बढ़ाने के खिलाफ माना था।
यह भी पढ़ें - Operation Sindoor: भारत शांति में विश्वास रखता है, दुनिया को आतंकवाद पर एक साथ बोलना चाहिए, रविशंकर का बयान
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
'इस आदेश को देखते हुए, हमें यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि मध्यप्रदेश सरकार जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 61 साल कर सकती है, बशर्ते हाईकोर्ट प्रशासनिक स्तर पर इसकी सहमति दे।' अब अगर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट प्रशासनिक तौर पर फैसला करता है कि उम्र बढ़ाई जानी चाहिए, तो राज्य सरकार को इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को सुझाव दिया है कि दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने क्या की टिप्पणी?
मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के प्रशासनिक निर्णय पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा कि वह इस मुद्दे पर अगले दो महीनों के भीतर फैसला ले, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - Karnataka: केंद्रीय मंत्री का सिद्धारमैया पर हमला, कहा- कांग्रेस सरकार तानाशाह से भी बदतर काम कर रही
विज्ञापन
क्या है याचिका?
2018 में, मध्यप्रदेश जजेस एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें जिला न्यायाधीशों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की मांग की गई थी। इसके बाद में एसोसिएशन ने मांग में संशोधन कर इसे 61 वर्ष तक सीमित कर दिया, ताकि अन्य राज्यों के समान एकरूपता लाई जा सके।
पहले हाईकोर्ट ने क्यों किया था इनकार?
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पहले इस मांग को साल 2002 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर खारिज कर दिया था। यह फैसला ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन केस में आया था, जिसे हाईकोर्ट ने उम्र बढ़ाने के खिलाफ माना था।
यह भी पढ़ें - Operation Sindoor: भारत शांति में विश्वास रखता है, दुनिया को आतंकवाद पर एक साथ बोलना चाहिए, रविशंकर का बयान
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
'इस आदेश को देखते हुए, हमें यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि मध्यप्रदेश सरकार जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 61 साल कर सकती है, बशर्ते हाईकोर्ट प्रशासनिक स्तर पर इसकी सहमति दे।' अब अगर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट प्रशासनिक तौर पर फैसला करता है कि उम्र बढ़ाई जानी चाहिए, तो राज्य सरकार को इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को सुझाव दिया है कि दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन