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सियासत: ‘श्री राम के अस्तित्व का कोई एतिहासिक प्रमाण नहीं’, तमिलनाडु के मंत्री का विवादित बयान; BJP का पलटवार

Sat, 03 Aug 2024 06:30 PM IST
मिथिलेश नौटियाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Sat, 03 Aug 2024 06:30 PM IST
सार

डीएमके नेता एसएस शिवशंकर ने कहा, ‘भगवान राम के अस्तित्व को साबित करने के लिए हमारे इतिहास में किसी भी तरह का प्रमाण मौजूद नहीं है।’ अरियालुर में चोल वंश के राजा राजेन्द्र चोल के जन्मोत्सव के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। 

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No historic evidence of Lord Ram’s existence Tamil Nadu Minister Sivasankar sparks row BJP reacts
एस एस शिवशंकर - फोटो : एक्स @sivasankar1ss

विस्तार

तमिलनाडु के मंत्री एसएस शिवशंकर ने भगवान राम के अस्तित्व को लेकर विवादित बयान दिया है। इसे लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं होने लगीं हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता ने कहा, ‘भगवान राम के अस्तित्व को साबित करने के लिए हमारे इतिहास में किसी भी तरह का प्रमाण मौजूद नहीं है।’ अरियालुर में चोल वंश के राजा राजेन्द्र चोल के जन्मोत्सव के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। 

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एसएस शिवशंकर ने क्या कहा?
समारोह के दौरान शिवशंकर ने कहा, ‘हमें हमारे महान राजा राजेन्द्र चोल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाना चाहिए। राजेन्द्र चोल का अस्तित्व साबित करने के लिए यहां उनके द्वारा बनाए गए कुंए मौजूद हैं, जिन पर उनका नाम लिखा हुआ है। हमरा इतिहास में इस बात के सबूत हैं कि राजेन्द्र चोल का अस्तित्व था। लेकिन, भगवान राम के अस्तित्व को लेकर हमारे इतिहास में कोई मजबूत प्रमाण मौजूद नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि राम एक अवतार थे और एक अवतार कभी जन्म नहीं ले सकता। हमारे इतिहास को छिपाकर हमसे ये बातें तोड़-मरोड़कर पेश की जातीं हैं।’
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भाजपा का पलटवार 
उधर, एसएस शिवशंकर के बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उन पर निशाना साधा है। तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सोशल मीडिया मांच एक्स पर लिखा, ‘एक सप्ताह पहले ही डीएमके के कानून मंत्री रघुपति ने घोषणा की थी कि भगवान श्री राम सामाजिक न्याय के मामले में अद्भुत व्यक्ति थे। साथ ही भगवान राम धर्मनिरपेक्षता के प्रणेता और सभी के लिए समानता की की बात करते थे।’ के अन्नामलाई ने आगे कहा, ‘आज, घोटालों में फंसे हुए परिवहन मंत्री शिवशंकर भगवान राम के अस्तित्व को नकार रहे हैं। वे दावा कर रहे हैं कि यह सब चोल वंश के इतिहास को मिटाने की योजना है। यह साबिक करता है कि डीएमके के नेताओं की याददाश्त चली जाती है। ये वही नेता हैं, जिन्होंने पीएम मोदी द्वारा संसद परिसर में चोल वंश के प्रतीक सेंगोल को स्थापित करने का विरोध किया था।’
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अन्नामलाई ने आगे कहा, ‘अब डीएमके नेता रघुपति और शिव शंकर को एक जगह बैठकर आपस में बहस करनी चाहिए। उन्हें भगवान राम को लेकर आम सहमति बनानी चाहिए। हमें विश्वास है कि शिव शंकर अपने सहयोगी रघुपति से भगवान राम के बारे में एक-दो बातें सीखेंगे।’

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