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Maharashtra: नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बंद की CBI जांच की निगरानी, कही ये बात

Tue, 18 Apr 2023 03:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 18 Apr 2023 03:58 PM IST
सार

न्यायमूर्ति ए.एस गडकरी और न्यायमूर्ति पी.डी नाइक की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सीबीआई के जांच अधिकारी ने जांच पूरी करने की रिपोर्ट एजेंसी के मुख्यालय को सौंप दी है। 

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No further court monitoring of CBI probe into killing of rationalist Narendra Dabholkar Bombay HC
बंबई उच्च न्यायालय - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में आरोप पत्र दाखिल हो चुका है और इसकी सुनवाई शुरू हो गई है। यह कहते हुए उच्च न्यायालय न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत की निगरानी में जांच बंद कर दी। 

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न्यायमूर्ति ए.एस गडकरी और न्यायमूर्ति पी.डी नाइक की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सीबीआई के जांच अधिकारी ने जांच पूरी करने की रिपोर्ट एजेंसी के मुख्यालय को सौंप दी है। 
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पीठ ने कहा, इस प्रकार यह स्पष्ट है कि वर्तमान अपराध की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और इसका मुकदमा लगातार आगे बढ़ रहा है। मार्च 2023 तक अभियोजन पक्ष पहले ही 18 गवाहों से पूछताछ कर चुका है। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक दाभोलकर (67 वर्षीय) की 20 अगस्त 2013 को उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह सुबह की सैर पर निकले थे। उन्हें कथित तौर सनातन संस्था नाम के संगठन से जुड़े दो लोगों ने गोली मार दी थी। 
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उच्च न्यायालय 2014 से जांच की निगरानी कर रहा था जब मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंपा गया था, एजेंसी अदालत को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करती थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि जांच में और निगरानी की जरूरत नहीं है और नरेंद्र दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर की याचिका का निस्तारण कर दिया गया है जिसमें अदालत की निगरानी जारी रखने की मांग की गई थी।

इस साल जनवरी में सीबीआई ने उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि मामले में उसकी जांच पूरी हो चुकी है और जांच अधिकारी ने मंजूरी के लिए अपने मुख्य कार्यालय को क्लोजर रिपोर्ट भेज दी है।हालांकि, आज तक सीबीआई मुख्यालय ने जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर कोई निर्णय नहीं लिया है।  

2014 में पुणे शहर पुलिस से इस मामले को अपने हाथ में लेने वाली सीबीआई ने अब तक इस मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है। उनके खिलाफ पुणे की सत्र अदालत में सुनवाई चल रही है।  उच्च न्यायालय ने सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर और बाद में मुक्ता दाभोलकर की याचिका पर 2014 में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।  तब से, उच्च न्यायालय मामले में हुई प्रगति की निगरानी कर रहा था। 


मुक्ता दाभोलकर के वकील अभय नेवागी ने दलील दी थी कि नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे, गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की चार हत्याओं के मामले एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और इन सभी मामलों के मास्टरमाइंड को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

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