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No-Confidence Motion: कैसे आता है उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, विपक्ष का सफल होना क्यों मुश्किल?
Tue, 10 Dec 2024 08:04 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 10 Dec 2024 08:04 PM IST
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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
विपक्ष राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने मंगलवार को जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए उच्च सदन को नोटिस दिया। इसमें सभापति पर 'पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने' का आरोप लगाया गया है। नोटिस में विपक्षी समूह के 60 से ज्यादा सांसदों के हस्ताक्षर हैं।इस अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा ने नोटिस का विरोध जताया है। वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि सभापति धनखड़ ने आसन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।
आइये जानते हैं कि आखिर क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव? प्रस्ताव कब लाया जाता है? इसकी प्रक्रिया किया होती है? प्रस्ताव आने से क्या होगा? अभी जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव क्यों ला रहा है? विपक्ष ने क्या आरोप लगाए हैं? सत्ता पक्ष ने प्रस्ताव पर क्या कहा है?
पहले जानते हैं उपराष्ट्रपति पद के बारे में
हमारे देश में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति के कार्यकाल का जिक्र भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में किया गया है। वह पांच साल के कार्यकाल के लिए पद पर रहते हैं। हालांकि, कार्यकाल खत्म होने के बावजूद अगला उपराष्ट्रपति बनने तक वह पद पर बने रह सकते हैं। संविधान में प्रावधान है कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति कार्य करेंगे। उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपकर पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
अनुच्छेद 64 कहता है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष होंगे और वह किसी अन्य लाभ के पद पर नहीं होंगे। वहीं, अनुच्छेद 65 में जिक्र किया गया है कि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के पद पर मृत्यु, त्यागपत्र या निष्कासन या अन्य किसी कारण से होने वाली आकस्मिक रिक्ति के दौरान राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे।
हमारे देश में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति के कार्यकाल का जिक्र भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में किया गया है। वह पांच साल के कार्यकाल के लिए पद पर रहते हैं। हालांकि, कार्यकाल खत्म होने के बावजूद अगला उपराष्ट्रपति बनने तक वह पद पर बने रह सकते हैं। संविधान में प्रावधान है कि राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति कार्य करेंगे। उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपकर पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
अनुच्छेद 64 कहता है कि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष होंगे और वह किसी अन्य लाभ के पद पर नहीं होंगे। वहीं, अनुच्छेद 65 में जिक्र किया गया है कि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के पद पर मृत्यु, त्यागपत्र या निष्कासन या अन्य किसी कारण से होने वाली आकस्मिक रिक्ति के दौरान राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
- फोटो :
PTI
आखिर क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव?
पांच वर्ष के कार्यकाल से पहले ही उपराष्ट्रपति के पद से हटने की केवल दो ही स्थितियां होती हैं। पहली स्थिति तब होगी जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति खुद अपना त्यागपत्र दे दें और दूसरी स्थिति तब होगी जब उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। जिस प्रक्रिया के तहत उपराष्ट्रपति पद से हटा दिया जाएगा उसे अविश्वास प्रस्ताव कहते हैं।
पांच वर्ष के कार्यकाल से पहले ही उपराष्ट्रपति के पद से हटने की केवल दो ही स्थितियां होती हैं। पहली स्थिति तब होगी जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति खुद अपना त्यागपत्र दे दें और दूसरी स्थिति तब होगी जब उन्हें पद से हटा दिया जाएगा। जिस प्रक्रिया के तहत उपराष्ट्रपति पद से हटा दिया जाएगा उसे अविश्वास प्रस्ताव कहते हैं।
राज्यसभा
- फोटो :
X / @sansad_tv
अविश्वास प्रस्ताव कैसे लाया जाता है, इसकी प्रक्रिया क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 67बी में उपराष्ट्रपति को पद से हटाए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। उपराष्ट्रपति पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। संसद में प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 14 दिन पहले सदन को सूचित करना होता है। उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने के लिए न्यूनतम आवश्यक संख्या 50 है। वहीं अभी 60 विपक्षी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस प्रस्ताव को राज्यसभा द्वारा पारित किया जाना चाहिए और उन्हें हटाने के लिए लोकसभा द्वारा उस पर सहमति होनी चाहिए। इसलिए, यदि राज्यसभा के सभापति धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव ऊपरी सदन में पारित हो जाता है, तो सफल होने के लिए इसे लोकसभा में साधारण बहुमत से पारित होना चाहिए। नियमों के अनुसार, मतदान करने वाले राज्यसभा सांसदों द्वारा प्रस्ताव को साधारण बहुमत से पारित किया जाना चाहिए। फिर इसे निचले सदन में भी इसी बहुमत से पारित होना चाहिए। चूंकि विपक्ष के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, इसलिए धनखड़ को हटाया जाना मुश्किल है।
संविधान के अनुच्छेद 67बी में उपराष्ट्रपति को पद से हटाए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। उपराष्ट्रपति पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। संसद में प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 14 दिन पहले सदन को सूचित करना होता है। उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने के लिए न्यूनतम आवश्यक संख्या 50 है। वहीं अभी 60 विपक्षी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस प्रस्ताव को राज्यसभा द्वारा पारित किया जाना चाहिए और उन्हें हटाने के लिए लोकसभा द्वारा उस पर सहमति होनी चाहिए। इसलिए, यदि राज्यसभा के सभापति धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव ऊपरी सदन में पारित हो जाता है, तो सफल होने के लिए इसे लोकसभा में साधारण बहुमत से पारित होना चाहिए। नियमों के अनुसार, मतदान करने वाले राज्यसभा सांसदों द्वारा प्रस्ताव को साधारण बहुमत से पारित किया जाना चाहिए। फिर इसे निचले सदन में भी इसी बहुमत से पारित होना चाहिए। चूंकि विपक्ष के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, इसलिए धनखड़ को हटाया जाना मुश्किल है।
जगदीप धनखड़, राज्यसभा के सभापति
- फोटो :
X / @sansad_tv
अभी जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा है?
विपक्षी दलों ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए अनुच्छेद 67बी के तहत नोटिस दिया। नोटिस राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को सौंपा गया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच टकराव सोमवार को चरम पर पहुंच गया था। इस टकराव के बाद विपक्ष ने धनखड़ को उनके कार्यकाल से हटाने के लिए एक अविश्वास प्रस्ताव लाने फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, राजद, टीएमसी, सीपीआई, सीपीआई-एम, जेएमएम, आप, डीएमके समेत 60 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
दरअसल, विपक्ष कई मुद्दों को लेकर धनखड़ से नाराज है। इसमें सबसे ताजा मामला यह है कि उन्होंने उच्च सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों को कांग्रेस-सोरोस संबंध का मुद्दा उठाने की अनुमति दी। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था। इससे पहले इस साल अगस्त में भी विपक्षी गठबंधन की पार्टियों ने उपराष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस देने पर विचार किया था।
विपक्षी दलों ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए अनुच्छेद 67बी के तहत नोटिस दिया। नोटिस राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को सौंपा गया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच टकराव सोमवार को चरम पर पहुंच गया था। इस टकराव के बाद विपक्ष ने धनखड़ को उनके कार्यकाल से हटाने के लिए एक अविश्वास प्रस्ताव लाने फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, राजद, टीएमसी, सीपीआई, सीपीआई-एम, जेएमएम, आप, डीएमके समेत 60 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
दरअसल, विपक्ष कई मुद्दों को लेकर धनखड़ से नाराज है। इसमें सबसे ताजा मामला यह है कि उन्होंने उच्च सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों को कांग्रेस-सोरोस संबंध का मुद्दा उठाने की अनुमति दी। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था। इससे पहले इस साल अगस्त में भी विपक्षी गठबंधन की पार्टियों ने उपराष्ट्रपति को उनके पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस देने पर विचार किया था।
क्या पहले भी ऐसा हुआ है?
यह पहली बार होगा जब राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। हालांकि, इससे पहले अगस्त 2024 में विपक्षी गठबंधन प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में था। प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर की जरूरत थी, लेकिन उस समय वे आगे नहीं बढ़े। सोमवार को विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया।
यह पहली बार होगा जब राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। हालांकि, इससे पहले अगस्त 2024 में विपक्षी गठबंधन प्रस्ताव पेश करने की तैयारी में था। प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर की जरूरत थी, लेकिन उस समय वे आगे नहीं बढ़े। सोमवार को विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया।
कौन-कौन समर्थन में कौन विरोध में?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी गठबंधन के कई सदस्य इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए साथ हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के रुख पर अब भी संशय नहीं बना हुआ है। इस बीच बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि उनकी पार्टी राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के इंडिया ब्लॉक के कदम पर सोच-समझकर ही फैसला करेगी। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अविश्वास प्रस्ताव का बीजद समर्थन करेगी या नहीं? संसद के उच्च सदन में बीजद के सात सदस्य हैं। राज्यसभा में बीजद इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्षी दलों के पास सदन में प्रस्ताव को पारित कराने के लिए अपेक्षित संख्या नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी गठबंधन के कई सदस्य इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए साथ हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के रुख पर अब भी संशय नहीं बना हुआ है। इस बीच बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि उनकी पार्टी राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के इंडिया ब्लॉक के कदम पर सोच-समझकर ही फैसला करेगी। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अविश्वास प्रस्ताव का बीजद समर्थन करेगी या नहीं? संसद के उच्च सदन में बीजद के सात सदस्य हैं। राज्यसभा में बीजद इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्षी दलों के पास सदन में प्रस्ताव को पारित कराने के लिए अपेक्षित संख्या नहीं है।
कांग्रेस संचार प्रभारी जयराम रमेश
- फोटो :
एएनआई
विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव क्या कहा है?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को कहा कि पिछले 72 साल में यह पहली बार है जब विपक्षी दल राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्थिति कितनी खराब हो चुकी है। जिस तरीके से राज्यसभा सभापति ने सदन को चलाया, उसने हमें यह अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर किया। सभी विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कहा गया है कि वह पक्षपाती हैं।
सांसद ने कहा कि यह व्यक्तिगत मामला नहीं है। कांग्रेस ने केवल विपक्षी सदस्यों के अपमान के खिलाफ आवाज उठाई है। विपक्षी दलों के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को कहा कि पिछले 72 साल में यह पहली बार है जब विपक्षी दल राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्थिति कितनी खराब हो चुकी है। जिस तरीके से राज्यसभा सभापति ने सदन को चलाया, उसने हमें यह अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर किया। सभी विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कहा गया है कि वह पक्षपाती हैं।
सांसद ने कहा कि यह व्यक्तिगत मामला नहीं है। कांग्रेस ने केवल विपक्षी सदस्यों के अपमान के खिलाफ आवाज उठाई है। विपक्षी दलों के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
किरेन रिजिजू
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एएनआई
सत्ता पक्ष ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
भाजपा समेत एनडीए के दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'विपक्ष ने आसन की गरिमा का अनादर किया है, चाहे वह राज्यसभा हो या लोकसभा। कांग्रेस पार्टी और उनके गठबंधन ने लगातार आसन के निर्देशों का पालन न करके गलत व्यवहार किया है। उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। वह संसद के अंदर और बाहर हमेशा किसानों और लोगों के कल्याण की बात करते हैं।
भाजपा समेत एनडीए के दलों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। इस मामले पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'विपक्ष ने आसन की गरिमा का अनादर किया है, चाहे वह राज्यसभा हो या लोकसभा। कांग्रेस पार्टी और उनके गठबंधन ने लगातार आसन के निर्देशों का पालन न करके गलत व्यवहार किया है। उपाध्यक्ष जगदीप धनखड़ एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। वह संसद के अंदर और बाहर हमेशा किसानों और लोगों के कल्याण की बात करते हैं।