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No Confidence Motion: पांच साल में दूसरी बार मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, जानें इसके बारे में सबकुछ
Tue, 08 Aug 2023 01:44 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 08 Aug 2023 01:44 PM IST
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अविश्वास प्रस्ताव
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AMAR UJALA
विस्तार
लोकसभा में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार को चर्चा शुरू हुई। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। मोदी सरकार को दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले 2018 में, एनडीए ने टीडीपी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया था।इस बार के अविश्वास प्रस्ताव में जिस नेता के बोलने का सबसे ज्यादा इंतजार किया जा रहा है उनमें राहुल गांधी का नाम सबसे ऊपर है। राहुल सांसदी बहाल होने के बाद पहली बार सदन में बोलेंगे। इससे पहले 2018 के अविश्वास प्रस्ताव के दौरान राहुल के भाषण से ज्यादा उनके द्वारा पीएम की झप्पी की तस्वीरों ने सुर्खियां बंटोरीं थीं। इस बीच आइये जानते हैं आखिर अविश्वास प्रस्ताव होता क्या है? मोदी सरकार के खिलाफ आए पहले अविश्वास प्रस्ताव के दौरान क्या हुआ था? अबकी बार संख्या बल क्या कहता है?
संविधान
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अमर उजाला
पहले जानते हैं अविश्वास प्रस्ताव होता क्या है?
संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन अनुच्छेद-118 के तहत हर सदन अपनी प्रक्रिया बना सकता है। वहीं, नियम 198 के तहत ऐसी व्यवस्था है जिसमें सदन के सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकते हैं।
26 विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' ने मोदी सरकार के खिलाफ 26 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया था। अगले दिन यानी 27 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने बहस की तिथि आज के लिए तय कर दी।
किस तरह पारित होता है प्रस्ताव?
प्रस्ताव पारित कराने के लिए सबसे पहले विपक्षी सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी लिखित सूचना देनी होती है। इसके बाद स्पीकर उस दल के किसी सांसद से इसे पेश करने के लिए कहते हैं। यह अविश्वास प्रस्ताव बहस के लिए तभी स्वीकार होता है जब कम से कम प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद के पास 50 सदस्यों का समर्थन हासिल हो। यानी, अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद के प्रस्ताव पर कुल 50 सांसदों का हस्ताक्षर होना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिलने के बाद 10 दिन के अंदर इस पर चर्चा कराई जाती है। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का समय लोकसभा अध्यक्ष तय करते हैं। आम तौर पर अधिक सांसदों वाली पार्टी को बोलने का ज्यादा समय दिया जाता है। विपक्ष के आरोपों पर सरकार जवाब देती है। चर्चा के बाद स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग कराते हैं या फिर कोई फैसला ले सकते हैं।
संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन अनुच्छेद-118 के तहत हर सदन अपनी प्रक्रिया बना सकता है। वहीं, नियम 198 के तहत ऐसी व्यवस्था है जिसमें सदन के सदस्य लोकसभा अध्यक्ष को सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे सकते हैं।
26 विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' ने मोदी सरकार के खिलाफ 26 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया था। अगले दिन यानी 27 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने बहस की तिथि आज के लिए तय कर दी।
किस तरह पारित होता है प्रस्ताव?
प्रस्ताव पारित कराने के लिए सबसे पहले विपक्षी सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी लिखित सूचना देनी होती है। इसके बाद स्पीकर उस दल के किसी सांसद से इसे पेश करने के लिए कहते हैं। यह अविश्वास प्रस्ताव बहस के लिए तभी स्वीकार होता है जब कम से कम प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद के पास 50 सदस्यों का समर्थन हासिल हो। यानी, अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले सांसद के प्रस्ताव पर कुल 50 सांसदों का हस्ताक्षर होना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिलने के बाद 10 दिन के अंदर इस पर चर्चा कराई जाती है। अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का समय लोकसभा अध्यक्ष तय करते हैं। आम तौर पर अधिक सांसदों वाली पार्टी को बोलने का ज्यादा समय दिया जाता है। विपक्ष के आरोपों पर सरकार जवाब देती है। चर्चा के बाद स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग कराते हैं या फिर कोई फैसला ले सकते हैं।
2018 में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो :
@BJP4India
पहली बार कब लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव?
संसद के गठन के बाद से अब तक लोकसभा में कुल 27 अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। ये दूसरी बार है जब मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इससे पहले भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को 20 जुलाई 2018 को अपने पहले 'अविश्वास' प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। यह अविश्वास प्रस्ताव चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी द्वारा लाया गया था। कभी एनडीए की सहयोगी रही टीडीपी ने तब अविश्वास प्रस्ताव लाने की वजह बताते हुए कहा था कि केंद्र आंध्र प्रदेश को पर्याप्त धन उपलब्ध कराने में विफल रहा है।
संसद के गठन के बाद से अब तक लोकसभा में कुल 27 अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। ये दूसरी बार है जब मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इससे पहले भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को 20 जुलाई 2018 को अपने पहले 'अविश्वास' प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। यह अविश्वास प्रस्ताव चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी द्वारा लाया गया था। कभी एनडीए की सहयोगी रही टीडीपी ने तब अविश्वास प्रस्ताव लाने की वजह बताते हुए कहा था कि केंद्र आंध्र प्रदेश को पर्याप्त धन उपलब्ध कराने में विफल रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते पीएम मोदी
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SOCIAL MEDIA
2018 में आए अविश्वास प्रस्ताव में क्या हुआ था?
प्रस्ताव को कई विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था लेकिन शिवसेना कार्यवाही से दूर रही और नवीन पटनायक की बीजेडी सदन से बाहर चली गई थी। बहस के दौरान विपक्ष ने कृषि संकट, आर्थिक नीति, मॉब लिंचिंग सहित कई मामलों को उठाते हुए सरकार की जमकर आलोचना की थी।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बहस के बाद लोकसभा में प्रस्ताव को हरा दिया। 126 सांसदों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, लेकिन 325 सांसद इसके खिलाफ थे। इस तरह से अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह हार गया।
प्रस्ताव को कई विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त था लेकिन शिवसेना कार्यवाही से दूर रही और नवीन पटनायक की बीजेडी सदन से बाहर चली गई थी। बहस के दौरान विपक्ष ने कृषि संकट, आर्थिक नीति, मॉब लिंचिंग सहित कई मामलों को उठाते हुए सरकार की जमकर आलोचना की थी।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बहस के बाद लोकसभा में प्रस्ताव को हरा दिया। 126 सांसदों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, लेकिन 325 सांसद इसके खिलाफ थे। इस तरह से अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह हार गया।
2018 में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पीएम मोदी और राहुल गांधी
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
इन तस्वीरों की वजह से चर्चा में रहा 2018 का अविश्वास प्रस्ताव
पिछली बार आए अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे की बहस हुई थी। इसमें प्रधानमंत्री का डेढ़ घंटे से अधिक का संबोधन भी शामिल था। बहस के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पीएम मोदी के बीच नोकझोंक भी देखने को मिली थी। चर्चा के दौरान अपने संबोधन के समापन पर राहुल प्रधानमंत्री के पास पहुंचे और उन्हें गले लगाया था। वापसी के बाद अन्य कांग्रेस नेताओं को आंख मारकर देखा था जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।
बाद में अपने भाषण के दौरान, पीएम मोदी ने सभी दलों से इस कदम को नजरअंदाज करने का आह्वान किया और कांग्रेस पर मोदी हटाओ की मानसिकता के साथ काम करने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही पीएम ने अपनी सरकार के खिलाफ अविश्वास मत को विपक्ष के अहंकार का परिणाम भी बताया था।
पिछली बार आए अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे की बहस हुई थी। इसमें प्रधानमंत्री का डेढ़ घंटे से अधिक का संबोधन भी शामिल था। बहस के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पीएम मोदी के बीच नोकझोंक भी देखने को मिली थी। चर्चा के दौरान अपने संबोधन के समापन पर राहुल प्रधानमंत्री के पास पहुंचे और उन्हें गले लगाया था। वापसी के बाद अन्य कांग्रेस नेताओं को आंख मारकर देखा था जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।
बाद में अपने भाषण के दौरान, पीएम मोदी ने सभी दलों से इस कदम को नजरअंदाज करने का आह्वान किया और कांग्रेस पर मोदी हटाओ की मानसिकता के साथ काम करने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही पीएम ने अपनी सरकार के खिलाफ अविश्वास मत को विपक्ष के अहंकार का परिणाम भी बताया था।
Rahul Gandhi in Parliament
- फोटो :
ANI
2023 में आए अविश्वास प्रस्ताव का क्या होगा?
मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में पहले अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही है। चूंकि, चंद महीने बाद लोकसभा चुनाव है और संख्याबल की दृष्टि से सरकार को कोई खतरा नहीं है, ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा चुनावी होगी।
इस दौरान सरकार विपक्ष पर हमले के साथ अपनी उपलब्धियां गिनाएगी। वहीं, विपक्ष सरकार की खामियां गिना कर उसे कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगी। विपक्ष संसद में मणिपुर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा जिसको लेकर इन दलों का दावा है कि प्रधानमंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने वाले गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की। दोपहर 12 बजे इस अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। तीन दिन बहस होगी। वहीं, पीएम मोदी 10 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देंगे। वहीं, निशिकांत दुबे भाजपा की ओर से पहले वक्ता होंगे।
मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में पहले अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही है। चूंकि, चंद महीने बाद लोकसभा चुनाव है और संख्याबल की दृष्टि से सरकार को कोई खतरा नहीं है, ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा चुनावी होगी।
इस दौरान सरकार विपक्ष पर हमले के साथ अपनी उपलब्धियां गिनाएगी। वहीं, विपक्ष सरकार की खामियां गिना कर उसे कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगी। विपक्ष संसद में मणिपुर के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा जिसको लेकर इन दलों का दावा है कि प्रधानमंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने वाले गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की। दोपहर 12 बजे इस अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। तीन दिन बहस होगी। वहीं, पीएम मोदी 10 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देंगे। वहीं, निशिकांत दुबे भाजपा की ओर से पहले वक्ता होंगे।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला
- फोटो :
संसद टीवी
इस बार के अविश्वास प्रस्ताव पर संख्याबल क्या कहता है?
भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार के पास अभी लोकसभा में 330 से ज्यादा सांसदों का समर्थन है। फिलहाल भाजपा के 300 लोकसभा सांसद हैं। इसके साथ ही ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल और आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने भी अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला किया है। लोकसभा में बीजद के 12 तो वाईएसआर के 22 सांसद हैं।
वहीं, विपक्षी खेमे यानी इंडिया गठबंधन के पास लोकसभा में 142 सांसद हैं। संख्याबल के हिसाब से निचले सदन में विपक्ष की तुलना में सत्ता पक्ष काफी मजबूत है।
भाजपा की अगुआई वाली एनडीए सरकार के पास अभी लोकसभा में 330 से ज्यादा सांसदों का समर्थन है। फिलहाल भाजपा के 300 लोकसभा सांसद हैं। इसके साथ ही ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल और आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने भी अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करने का फैसला किया है। लोकसभा में बीजद के 12 तो वाईएसआर के 22 सांसद हैं।
वहीं, विपक्षी खेमे यानी इंडिया गठबंधन के पास लोकसभा में 142 सांसद हैं। संख्याबल के हिसाब से निचले सदन में विपक्ष की तुलना में सत्ता पक्ष काफी मजबूत है।