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अब कॉलेजों के शुरुआती दिनों में नहीं होगी पढ़ाई, केंद्र सरकार ने लिया फैसला       

Sun, 06 May 2018 06:01 AM IST
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 06 May 2018 06:01 AM IST
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no classes in the beigning of college says central government

आईआईटी समेत देश के सभी विश्वविद्यालयों में अब सत्र की शुरुआत में छात्रों को पढ़ाई से दूर रखा जाएगा और किताबों की चर्चा तक नहीं होगी। इस दौरान छात्रों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला सिखाई जाएगी और उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया जाएगा। डिप्रेशन के कारण छात्रों द्वारा खुदकुशी करने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर केंद सरकार ने यह निर्णय लिया है।

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सरकार ने पाया है कि बोर्ड एग्जाम व प्रतियोगी परीक्षाओं का मानसिक दबाव, मनपंसद कोर्स या कॉलेज में दाखिला न मिल पाने की उलझन के बीच छात्र उच्च शिक्षण संस्थान में दाखिला तो ले लेते हैं, लेकिन तालमेल न बिठा पाने के कारण डिप्रेशन में आकर आत्महत्या तक कर लेते हैं। 
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लिहाजा केंद्र सरकार जुलाई 2018 सत्र से अनिवार्य तीन हफ्ते का इंडेक्शन प्रोग्राम की योजना ला रही है, ताकि पहले साल में हर छात्र को किताबों से दूर रखते हुए काउंसलिंग, एडवेंचर, स्पोट्र्स, अंग्रेजी की कोचिंग से जोड़कर उनका मार्गदर्शन कियार जा सके।  
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केंद्र सरकार ने आईआईटी के साथ यूजीसी और एआईसीटीई के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 21 जुलाई से इंडेक्शन प्रोग्राम शुरू करने का फैसला लिया है। पहले आईआईटी के लिए अनिवार्य इंडेक्शन प्रोग्राम शुरू करने की योजना थी, लेकिन पढ़ाई व असफलता के चलते देशभर में छात्रोक में आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ रहा है। इसी के तहत इसे सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में जोड़ा रहा है।

इंडेक्शन प्रोग्राम से छात्रों को मिलेगा मार्गदर्शन 

no classes in the beigning of college says central government

केंद्र ने आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. राजीव संगल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर की कमेटी गठित की है, जो कि 15 मई से 15 जुलाई तक देशभर में 65 वर्कशॉप कर हजार शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर मॉस्टर ट्रैनर बनाएगा। 

यह ट्रैनर आगे कालेजों में करीब दस हजार शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। इसमें 40 वर्कशाप तीन दिन और 25वर्कशाप सात दिन की होगी। जबकि 21 जुलाई से तीन या चार हफ्ते तक शिक्षक कक्षा में किताब पर चर्चा नहीं करेंगे।        
     
2016 में करीब दस हजार छात्रों ने दी जान       
संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल और कॉलेज में शिक्षा की प्रतिस्पर्धा के आगे युवा जिंदगी हार रही है। देशभर में वर्ष 2016 में 9474 छात्रों ने मौत को गले लगा लिया है, जिसमें से 2413 ने परीक्षा में फेल होने पर आत्महत्या की। जबकि आंकड़ा लगातर बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में 8068, वर्ष 2015 में 8934तो वर्ष 2016 में 9463 छात्रों ने पढ़ायी में असफलता के चलते जान दी थी।           

इंजीनियरिंग या मेडिकल के बाहर भी है जिंदगी 
आईआईटी या मेडिकल में दाखिला न मिलने के चलते छात्र खुद को असफल मान लेते हैं, लेकिन इंडेक्शन प्रोग्राम से उसे मानसिक तनाव से बाहर लाने के लिए काउंसलिंग करवायी जाएगी। इसके अलावा मनपसंद कोर्स, कॉलेज या स्ट्रीम न मिलने से जिंदगी खत्म नहीं समझना, छात्र की क्षमता के आधार पर आगे विभिन्न प्रोफेशन कोर्स से जोडना, स्टार्टअप, रिसर्च आदि के प्रति प्रेरित करना होगा।         
अनिल डी सहस्रबुद्धे, चेयरमैन, एआईसीटीई। 
      
इंडेक्शन प्रोग्राम से छात्रों को मिलेगा मार्गदर्शन 
भारत में बोर्ड एग्जाम एक हौव्वा है, जिसमें छात्र को 9वीं से 12वीं की परीक्षा तक घूमने-फिरने, दोस्तों, टीवी आदि से दूर रखा जाता है। बोर्ड के बाद प्रतियोगी परीक्षा के नाम पर पेरेंट्स अपने सपने पूरा करना चाहते हैं। जबकि छात्र मानसिक दबाव में रहता है। 

कैंपस में छात्र उलझन व डिप्रेशन में आकर आत्महत्या तक कर लेता  है। इसीलिए उच्च शिक्षण संस्थानों में पहले तीन हफ्ते इंडेक्शन प्रोग्राम लागू होगा, जिसमें किताब की जगह छात्र को उचित मार्गदर्शन मिलेगा। उसकी क्षमता के आधार पर आगे बढने की प्रेरण भी दी जाएगी।        
-प्रकाश जावडेकर, मानव संसाधन विकासमंत्री, केंद्र सरकार

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