बजट में नहीं होंगी चुनावी राज्यों से जुड़ी घोषणाएं
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विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद सरकार ने 1 फरवरी को हो केंद्रीय बजट पेश करने का फैसला किया है। हालांकि इसमें चुनावी राज्यों से संबंधित घोषणाएं नहीं होंगी।
सरकार ने चुनाव आयोग के सामने पारंपरिक तौर पर बजट पेश किए जाने के समय से एक महीने पहले ही बजट पेश करने के अपने फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि उसने सितंबर 2016 में ही इसका इरादा जता दिया था।
अपना इरादा इतना पहले जाहिर करने के पीछे उसका मकसद नए वित्त वर्ष के पहले दिन से शुरू होने वाले निवेश चक्र को बरकरार रखना था। एक शीर्ष आधिकारिक सूत्र ने कहा कि 1 फरवरी को बजट पेश करने का फैसला पहले ही हो चुका था। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि सरकार चुनावी राज्यों के लिए कोई खास घोषणा नहीं करने जा रही है।
सरकार ने अपने कदम का जोरदार बचाव किया
गौरतलब है कि कांग्रेस और तृणमूल समेत तमाम विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से चार फरवरी को शुरू होने वाले पांच राज्यों में से एक में चुनाव से पहले आम बजट पेश किए जाने की शिकायत की थी। लेकिन सरकार ने अपने इस कदम का जोरदार बचाव किया।
सूत्रों ने बताया कि आदर्श आचारसंहिता लागू होने के मद्देनजर बजट में पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर से जुड़ी कोई घोषणा नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि 31 जनवरी को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण के साथ ही सदन में आर्थिक सर्वे रखा जाएगा। 1 फरवरी को बजट पेश होगा।
कैबिनेट ने पिछले साल सितंबर में ही फैसला किया था कि रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश करने की एक सदी पुरानी परंपरा खत्म कर दी जाए। अब आम बजट में ही रेलवे के लिए बजट प्रावधान शामिल रहेंगे। साथ ही आयोजना व्यय और गैर आयोजना व्यय के अंतर को भी खत्म करने का फैसला किया गया था।