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Bihar Politics: नीतीश कुमार बिहार में बड़ा भाई बनना चाहते हैं, बढ़ा रहे हैं दबाव

Tue, 02 Jul 2024 10:58 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 02 Jul 2024 10:58 AM IST
सार

जद(यू) के प्रवक्ता कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए। ताकि बिहार को पिछड़े राज्य की श्रेणी से बाहर लाया जा सके। नीतीश के पुराने सहयोगी का कहना है कि नीतीश कुमार पिछले दशक से ही बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।

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Nitish Kumar wants to become the elder brother in Bihar, is increasing the pressure
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश की कुमार की पिछले सालों से तीन मंशा और केंद्र से तीन ही मांग है। मुख्यमंत्री पिछले साल से इसको लेकर कई बार केंद्र दबाव बना चुके हैं। वह चाहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले, महाराष्ट्र, झारखंड के साथ बिहार विधानसभा चुनाव हों और जातिगत आधार पर जनगणना हो। इसमें से पहली दो मांग सबसे अहम है और उन्हें बिहार में बड़ा भाजपा का बड़ा भाई बना देगी। नीतीश पहले चाहते थे कि लोकसभा के साथ ही बिहार विधानसभा का चुनाव हो, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे। अब सही समय देखकर वह अपने अंदाज में केन्द्र सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

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जद(यू) के प्रवक्ता कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए। ताकि बिहार को पिछड़े राज्य की श्रेणी से बाहर लाया जा सके। नीतीश के पुराने सहयोगी का कहना है कि नीतीश कुमार पिछले दशक से ही बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। बिहार में पटना के वरिष्ठ पत्रकार संजय वर्मा का कहना है कि नीतीश कुमार की मंशा विशेष राज्य का दर्जा के साथ महाराष्ट्र, झारखंड में विधानसभा चुनाव कराने की भी है। नीतीश का कभी खुद को छोटा भाई कहने वाले और लोकसभा चुनाव हार चुके नेता का कहना है कि नीतीश राज्य में विधानसभा चुनाव समय से पहले चाहते हैं। इसमें तो कोई संदेह नहीं है। रहा विशेष राज्य का दर्जा का सवाल तो यह बिहार का अधिकार है।
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विशेष राज्य का दर्जा मुश्किल लेकिन विशेष पैकेज तो मिले?
केंद्र सरकार के बिहार से आने वाले वरिष्ठ नौकरशाह का कहना है कि विशेष राज्य का दर्जा मिलना तो मुश्किल है, क्योंकि इसका एक पैरामीटर है। दूसरे लाइन में कई राज्य हैं। अकेले बिहार का मामला नहीं है,लेकिन बिहार को विशेष राज्य का पैकेज दिया जा सकता है। बिहार में उद्योग धंधे आदि के विशेष प्रयास हो सकते हैं। बिहार से आने वाले एक पूर्व मंत्री और भाजपा नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने जैसे विषय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संवेदनशील हैं, लेकिन इसमें कई तकनीकी पेंच हैं। केन्द्र सरकार को उड़ीसा  पर भी विशेष ध्यान देना है। वहां की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। समझा जा रहा है कि बिहार की तरह ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी अपने राज्य को अपने सपनों का रूप देना चाहते हैं। उनकी भी मांग विशेष राज्य का दर्जा देने जैसी है। इसलिए केन्द्र सरकार के लिए नीतीश कुमार की मांग को मान लेना बहुत आसान नहीं है। इसलिए नीतीश कुमार और एन चंद्रबाबू नायडू के दबाव पर केन्द्र सरकार विशेष पैकेज या किसी अन्य तकनीकी व्यवस्था का सहारा ले सकती है।
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जद(यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन की सुन लीजिए
राजीव रंजन कहते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा उनकी अस्मिता से जुड़ा मामला है। राजीव रंजन कहते हैं कि यह मांग बिहार के विकास की कुंजी है। यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसकी मांग हम चाहे एनडीए में रहें या एनडीए से बाहर लगातार करते रहे हैं। राजीव रंजन के वक्तव्य से साफ है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाना नीतीश कुमार की प्राथमिकता में है। माना जाता है कि अपनी इस मांग को मनवाने के लिए ही नीतीश कुमार ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल या केन्द्र सरकार में भागीदारी को लेकर कोई बड़ी मांग नहीं रखी। उन्होंने अभी तक कहीं भी पैर नहीं अड़ाए हैं। हालांकि जद(यू) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिन की बैठक का एजेंडा केवल विशेष राज्य का दर्जा ही नहीं है। समझा जा रहा है कि इस दौरान पार्टी अपना नया कार्यकारी अध्यक्ष चुन सकती है। पुराने नौकरशाह और नीतीश के करीबी मनीष वर्मा या संजय झा को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके साथ-साथ लोकसभा चुनाव के नतीजे, नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी की परफारमेंस, आगामी चुनाव में नेताओं को जिम्मेदारी उनकी भूमिका समेत अन्य विषयों पर विचार होगा।  


क्या बिहार में महाराष्ट्र और झारखंड के साथ होंगे विधानसभा चुनाव?
जद(यू) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी इस संदर्भ में अधिकारिक बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा। त्यागी के वक्तव्य से साफ है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में होंगे। जबकिं इंडिया घटक दल कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के नेता अभी से विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। पटना से राम अजोर यादव कहते हैं कि नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव चाहते थे। ऐसा नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री को बिहार में समय से पहले विधानसभा चुनाव कराकर अपने दल के विधायकों की संख्या बढ़ानी है। उन्हें बिहार में भाजपा का बड़ा भाई बनना है। अब देखना है, भाजपा और केन्द्र सरकार उनकी मांग को कैसे, किस तरह से मानती है।

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