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नीतीश मंजूर नहीं, मुलायम ही दे सकते हैं मोदी को चुनौती

Wed, 20 Apr 2016 06:44 AM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, ललितपुर
संजय मिश्र/अमर उजाला, ललितपुर Updated Wed, 20 Apr 2016 06:44 AM IST
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nitish kumar is Not acceptable to cm Akhilesh yadav
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala

राष्ट्रीय राजनीति में 2019 में तीसरे विकल्प के लिए नीतीश कुमार की अभी से शुरू हुई दावेदारी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अगले लोकसभा में तीसरे विकल्प के रूप में मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में समाजवादी विचारधारा के लोगों की दावेदारी सबसे मजबूत होगी।

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यूपी में खराब कानून व्यवस्था को लेकर निशाने पर रहे मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में कोई दूसरा मुजफ्फरनगर दंगा नहीं दोहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोएडा-गाजियाबाद में लाखों की संख्या में मकान खरीदकर बिल्डरों के  चुंगल में फंसे लोगों को राहत दिलाने के लिए बिल्डरों पर कार्रवाई की जाएगी।
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बुंदेलखंड में सूखा प्रभावितों को राहत मुहैया कराने आए अखिलेश यादव ने अमर उजाला से ललितपुर में खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश-
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सवालः नरेंद्र मोदी को 2019 में चुनौती देने के लिए कांग्रेस की कमजोर हालत देख नीतीश कुमार ने मोर्चेबंदी शुरू कर दी है इसमें समाजवादी पार्टी कहां खड़ी है?

वैसे अभी यह जल्दबाजी है और सपा का पूरा फोकस 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव जीतना है। उसके बाद ही हम अगले लोकसभा चुनाव की दशा-दिशा तय करेंगे। समाजवादी विचाराधारा वाले दल एकजुट होकर अगली सरकार बनाएं यह हम भी चाहते हैं। पर यह भी साफ है कि मुलायम सिंह यादव से बेहतर तीसरे विकल्प का दूसरा समाजवादी चेहरा नहीं है और हमारी राजनीतिक ताकत भी इनमें सबसे ज्यादा है। 

सवालः आप केंद्र में अपनी सरकार की संभावनाएं देख रहे हैं पर 2012 के चुनाव के पहले डीपी यादव का टिकट काटने को जो दमखम आपने दिखाया उसकी झलक आपके शासन में नहीं दिखी है?

देखिए जो लोग सपा सरकार के अभूतपूर्व विकास कार्यों को पचा नहीं पा रहे वही लगातार कानून व्यवस्था का सवाल उठाते हैं। लूटपाट, आपसी जमीनी विवाद से लेकर तमाम तरह की छोटी घटनाओं को सरकार के माथे पर मढ़ दिया जाता है। कई घटनाओं को ऐसे बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया जैसे प्रशासन दोषी है मगर जांच में हकीकत दूसरी रही। लखनऊ के वकील की हत्या आपसी रंजिश का मामला था तो एनआईए अफसर तंजील अहमद का मामला भी दूसरी तरह का निकला।

सवालः पर मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर आपकी सरकार पर उठे सवाल तो अब भी मौजू हैं?

यूपी में अब कोई दूसरा मुजफ्फरनगर नहीं होने दूंगा। मुजफ्फरनगर को दोहराने की बहुत कोशिशें अब भी हो रही हैं पर ऐसा करने वालों की चाल पर हमारी पल-पल निगाहें हैं।
 

'सपा को चुनौती देने लायक नहीं है भाजपा'

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आईटी स‌िटी में सीएम अख‌िलेश - फोटो : Amar Ujala

सवालः भाजपा ने अत्यंत पिछड़े वर्ग का अध्यक्ष बनाकर यूपी के 2017 संग्राम के लिए आपके सामाजिक समीकरण को गड़बड़ नहीं कर दिया है?

भाजपा समीकरण नहीं जोड़ रही बल्कि वह खेल खेलने की उस्तादी दिखा रही है। पर इस खेल से यूपी में अब बात नहीं बनने वाली। जनता को विकास का मॉडल और जमीन पर काम चाहिए। सपा सरकार के कामकाज और नीतियों को भाजपा चुनौती देने के लायक नहीं है क्योंकि उसके प्रदेश नेतृत्व में वह दमखम और दृष्टिकोण दोनों नहीं हैं।

सवालः अपने शासन के मॉडल की बात तो आप कर रहे हैं पर यह भी हकीकत है कि नोएडा-गाजियाबद में लाखों आम लोगों से पैसा लेने के बाद भी बिल्डर फ्लैट नहीं दे रहे और अथॉरिटी कोई सख्ती नहीं दिखा रही?

निसंदेह यह गंभीर मुद्दा है और इस पर हमें मौका दीजिए। इतना भरोसा दिलाता हूं कि हर व्यक्ति को उसका मकान दिलाएंगे। जिन बिल्डरों ने लोगों को छला है उन पर हम सख्त कार्रवाई करेंगे। अथॉरिटी से कहा जाएगा कि वह बिल्डरों पर नकेल कसे और कार्रवाई करे। अथॉरिटी में भी जो चूक करेगा उसके खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी। मैं खुद इस मामले की समीक्षा कर रहा हूं। अधिकांश फंसे हुए फ्लैट बसपा सरकार के समय बिल्डरों को आवंटित जमीन पर हैं।

 सवालः सूखे में बुंदेलखंड की स्थिति सबसे चिंताजनक दिखाई दे रही है पर फौरी मदद तो स्थायी समाधान नहीं?

बुंदेलखंड में सूखे के गंभीर हालात हैं इससे तो कोई इनकार नहीं कर सकता। ललितपुर के इस राहत वितरण के लिए आई एक महिला से जब मैंने पूछा कि वह क्या खाकर आई है तो उसने बताया कि केवल सुबह चाय पीकर ही वह आ सकी है।

भरी दोपहर तक केवल चाय पर रहने जैसे हालात व्यथित करने वाले हैं। ऐसेे में खाद्यान्न सुरक्षा के तहत मुफ्त तीन महीने का अनाज ही नहीं राशन-पानी, जरूरी वस्तुएं मुहैया कराना तो हमारी प्राथमिकता बनती है।

ओलावृष्टि से हुए नुकसान और सूखे के दीर्घकालिक समाधान के लिए हमने केंद्र से 11 हजार करोड़ रुपये की मदद मांगी है पर मिले हैं केवल अभी 3000 करोड़। फिर भी बुंदेलखंड के संकट के स्थायी समाधान के लिए हमने अपने बजट से 4500 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च किए हैं। हम केंद्र से कोई अहसान नहीं मांग रहे बल्कि अपना हक मांग रहे हैं।

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