{"_id":"68bc4efc90c8cb58440a0eda","slug":"nitish-katara-murder-case-convict-vikas-yadav-son-of-bahubali-dp-yadav-married-after-23-years-in-jail-know-the-2025-09-06","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Vikas Yadav: 22 साल छोटी लड़की से शादी कर चर्चा में आया हत्यारा, 23 साल पहले हुई बेरहम हत्या की क्या है कहानी?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Vikas Yadav: 22 साल छोटी लड़की से शादी कर चर्चा में आया हत्यारा, 23 साल पहले हुई बेरहम हत्या की क्या है कहानी?
Sat, 06 Sep 2025 08:40 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 06 Sep 2025 08:40 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
Please wait...
नीतीश कटारा हत्याकांड में सजायाफ्ता विकास यादव ने की शादी।
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
2002 में एक आईएएस अफसर के बेटे नीतीश कटारा की हत्या के मामले ने पूरे देश को चौंका दिया था। एक बार फिर यह मामला चर्चा में है। दरअसल, इस मामले में सजायाफ्ता विकास यादव ने शादी कर ली है। विकास की शादी की खबर सामने आई तो चर्चा शुरू हुई कि आखिर कैसे बीमार मां की देखभाल का हवाला देकर जमानत लेने वाला कोई हत्यारा बाहर आकर शादी कर सकता है। विकास यादव के पिता डीपी यादव खुद एक बड़े नेता और बाहुबली रहे हैं, जिन पर एक समय अलग-अलग धाराओं में 25 मामले दर्ज थे।विकास यादव की शादी के साथ चर्चा नीतीश कटारा की हत्या के मामले की भी शुरू हो गई है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आज से 23 साल पहले 2002 में ऐसा क्या हुआ था कि एक प्रशासनिक अधिकारी के बेटे की नेता के बेटे ने हत्या कर दी? यह हत्या हुई कैसे थी और इस मामले में बाद में क्या-क्या हुआ? इसके अलावा विकास यादव कौन है और उसकी नीतीश की हत्या में क्या भूमिका थी? आइये जानते हैं...
पहले जानें- नीतीश कटारा हत्याकांड की पूरी कहानी?
पूरी कहानी जानने के लिए हमें चलना होगा साल 2002 में। गाजियाबाद का रहने वाले 25 साल के नीतीश कटारा, जो कि शहर से ही एमबीए कर चुके थे। बताया जाता है कि जिस कॉलेज से नीतीश ने एमबीए किया था, वहीं उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता धर्मपाल यादव (डीपी यादव) की बेटी भारती भी पढ़ रहीं थीं। नीतीश की पढ़ाई के दौरान ही भारती से दोस्ती हुई और बाद में दोनों में प्रेम हो गया।
नीतीश और भारती ने इसके बाद शादी करने का फैसला किया। दोनों ने कुछ समय लेने के बाद अपने माता-पिता से बात करने की ठानी। हालांकि, इससे पहले कि दोनों इस मामले में आगे बढ़ पाते, भारती के भाई और डीपी यादव के बेटे विकास यादव की नजर नीतीश पर पड़ गई। और फिर वह हुआ, जिसे आज नीतीश कटारा हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।
नीतीश कटारा हत्याकांड: दोषी डीपी यादव के बेटे विकास ने पैरोल लेकर की शादी, सामने आईं विवाह की तस्वीरें
पूरी कहानी जानने के लिए हमें चलना होगा साल 2002 में। गाजियाबाद का रहने वाले 25 साल के नीतीश कटारा, जो कि शहर से ही एमबीए कर चुके थे। बताया जाता है कि जिस कॉलेज से नीतीश ने एमबीए किया था, वहीं उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता धर्मपाल यादव (डीपी यादव) की बेटी भारती भी पढ़ रहीं थीं। नीतीश की पढ़ाई के दौरान ही भारती से दोस्ती हुई और बाद में दोनों में प्रेम हो गया।
नीतीश और भारती ने इसके बाद शादी करने का फैसला किया। दोनों ने कुछ समय लेने के बाद अपने माता-पिता से बात करने की ठानी। हालांकि, इससे पहले कि दोनों इस मामले में आगे बढ़ पाते, भारती के भाई और डीपी यादव के बेटे विकास यादव की नजर नीतीश पर पड़ गई। और फिर वह हुआ, जिसे आज नीतीश कटारा हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।
नीतीश कटारा हत्याकांड: दोषी डीपी यादव के बेटे विकास ने पैरोल लेकर की शादी, सामने आईं विवाह की तस्वीरें
(i) 16-17 फरवरी 2002: जब नीतीश कटारा की हुई हत्या
16 फरवरी, यही वह तारीख थी जब एक आईएएस के बेटे नीतीश कटारा की हत्या हुई। दरअसल, हुआ कुछ यूं कि नीतीश कटारा गाजियाबाद में अपनी क्लासमेट की शादी के समारोह में हिस्सा लेने गए थे। इस समारोह में भारती खुद भी पहुंची थीं। विकास और उसका चचेरा भाई विशाल भी समारोह में मौजूद थे। यहां नीतीश और भारती की मुलाकात हुई और दोनों के बीच करीबी भारती के भाई विकास को दिख गई। विकास को दोनों का मेलजोल पसंद नहीं आया।
कोर्ट में जो सुनवाइयां हुईं, उनके मुताबिक विकास ने चचेरे भाई विशाल को इस बारे में बताया। दोनों ने पार्टी से बाहर निकलकर शराब पी और इसके बाद हिस्ट्रीशीटर सुखदेव पहलवान को भी अपने साथ लिया। यहीं फैसला हुआ कि नीतीश को जान से मार देंगे।
16 फरवरी, यही वह तारीख थी जब एक आईएएस के बेटे नीतीश कटारा की हत्या हुई। दरअसल, हुआ कुछ यूं कि नीतीश कटारा गाजियाबाद में अपनी क्लासमेट की शादी के समारोह में हिस्सा लेने गए थे। इस समारोह में भारती खुद भी पहुंची थीं। विकास और उसका चचेरा भाई विशाल भी समारोह में मौजूद थे। यहां नीतीश और भारती की मुलाकात हुई और दोनों के बीच करीबी भारती के भाई विकास को दिख गई। विकास को दोनों का मेलजोल पसंद नहीं आया।
कोर्ट में जो सुनवाइयां हुईं, उनके मुताबिक विकास ने चचेरे भाई विशाल को इस बारे में बताया। दोनों ने पार्टी से बाहर निकलकर शराब पी और इसके बाद हिस्ट्रीशीटर सुखदेव पहलवान को भी अपने साथ लिया। यहीं फैसला हुआ कि नीतीश को जान से मार देंगे।
इसके बाद तीनों समारोह से वापस लौटे और नीतीश को बहला-फुसलाकर अपने साथ चलने को कहने लगे। नीतीश ने भी भारती के भाइयों की बात नहीं टाली और उनकी कार में सवार होकर साथ चल दिए। यही उनका सबसे गलत फैसला साबित हुआ। नीतीश के साथ तीनों ने पहले गाड़ी में मारपीट की। इसके बाद वे नीतीश को अपने घर ले गए और यहां से दोबारा गाड़ी में सवार होकर गाजियाबाद से दूर हापुड़ ले गए। यहां तीनों ने नीतीश कटारा को बुरी तरह मारा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश पर हथौड़े से कई वार किए गए और फिर उन पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी गई। तीनों ही आरोपी इसके बाद फरार हो गए।
उधर नीतीश के घर न लौटने के बाद के उसकी मां नीलम ने भारती को फोन लगाया। यहां से नीतीश की कोई जानकारी नहीं मिली। उधर भारती को अहसास हो गया कि कुछ गड़बड़ हुई है। उसने नीलम को फोन कर पुलिस के पास जाने को कहा। अगले दिन यानी 17 फरवरी को नीलम गाजियाबाद के कविनगर पुलिस स्टेशन पहुंचीं और यहां बाहुबली नेता डीपी यादव पर एफआईआर दर्ज करा दी। चूंकि केस एक नेता से जुड़ा था और एक आईएएस के बेटे की गुमशुदगी से जुड़ा था, इसलिए यह खबर तुरंत की फैल गई। पुलिस की कई टीमें नीतीश की खोज में लग गईं। उधर पुलिस जब डीपी यादव के परिवार से पूछताछ के लिए पहुंची तो विकास और विशाल दोनों ही गायब थे। इसके बाद मामले में जांच और तेज कर दी गई।
UP: जुलाई में डीपी यादव के बेटे और हर्षिका की सगाई, अब इसलिए साधारण तरीके से हुई शादी; पहले यहां होना था विवाह
UP: जुलाई में डीपी यादव के बेटे और हर्षिका की सगाई, अब इसलिए साधारण तरीके से हुई शादी; पहले यहां होना था विवाह
20 फरवरी 2002: भारती को लंदन भेजा गया
20 फरवरी को खुर्जा में हापुड़ क्रॉसिंग के पास पुलिस को एक जला हुआ शव मिलने की सूचना मिली। शव के बुरी तरह जलने की वजह से इसकी पहचान मुश्किल हो गई। हालांकि, बाद में पुलिस ने लाश का डीएनए टेस्ट कराया। इसके नीलम से मिलने के बाद पुलिस ने विकास और विशाल को ढूंढने के लिए कई टीमें गठित कर दीं। जिस दिन नीतीश का शव मिला, उसी दिन डीपी यादव ने अपनी बेटी को लंदन भेज दिया।
22 अप्रैल 2002: मध्य प्रदेश से पकड़े गए थे विकास और विशाल
विशाल और विकास लाश मिलने के बाद दो महीने तक फरार रहे। 22 अप्रैल को पुलिस ने दोनों को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पकड़ लिया। दोनों को गाजियाबाद की सीजेएम कोर्ट के सामने पेश किया गया और पुलिस कस्टडी में भेजा गया। यहां से पूरे सीन में एंट्री हुई डीपी यादव के रसूख की। यादव ने अलग-अलग मौकों पर न सिर्फ इस केस में सुनवाई को अटकाया, बल्कि इस मामले में अहम गवाह अपनी बेटी भारती को भी सामने आने से रोके रखा।
इस बीच नीलम कटारा को अंदाजा हो गया कि उत्तर प्रदेश में डीपी यादव और उनके परिवार को कोई छू भी नहीं सकता। ऐसे में उन्होंने इस मामले को यूपी से बाहर किसी और राज्य में ले जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। कोर्ट ने उनकी अपील मंजूर की और मामला दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट को ट्रांसफर हुआ।
20 फरवरी को खुर्जा में हापुड़ क्रॉसिंग के पास पुलिस को एक जला हुआ शव मिलने की सूचना मिली। शव के बुरी तरह जलने की वजह से इसकी पहचान मुश्किल हो गई। हालांकि, बाद में पुलिस ने लाश का डीएनए टेस्ट कराया। इसके नीलम से मिलने के बाद पुलिस ने विकास और विशाल को ढूंढने के लिए कई टीमें गठित कर दीं। जिस दिन नीतीश का शव मिला, उसी दिन डीपी यादव ने अपनी बेटी को लंदन भेज दिया।
22 अप्रैल 2002: मध्य प्रदेश से पकड़े गए थे विकास और विशाल
विशाल और विकास लाश मिलने के बाद दो महीने तक फरार रहे। 22 अप्रैल को पुलिस ने दोनों को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पकड़ लिया। दोनों को गाजियाबाद की सीजेएम कोर्ट के सामने पेश किया गया और पुलिस कस्टडी में भेजा गया। यहां से पूरे सीन में एंट्री हुई डीपी यादव के रसूख की। यादव ने अलग-अलग मौकों पर न सिर्फ इस केस में सुनवाई को अटकाया, बल्कि इस मामले में अहम गवाह अपनी बेटी भारती को भी सामने आने से रोके रखा।
इस बीच नीलम कटारा को अंदाजा हो गया कि उत्तर प्रदेश में डीपी यादव और उनके परिवार को कोई छू भी नहीं सकता। ऐसे में उन्होंने इस मामले को यूपी से बाहर किसी और राज्य में ले जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। कोर्ट ने उनकी अपील मंजूर की और मामला दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट को ट्रांसफर हुआ।
2002 से 2006: कोर्ट में पेशी से बची रही भारती यादव
इस बीच पुलिस को मामले में तीसरे आरोपी की मिलीभगत का भी इशारा मिला। 23 नवंबर 2002 को पुलिस ने सुखदेव पहलवान के खिलाफ अलग से केस दायर किया। हालांकि, इस केस की प्रमुख कड़ी भारती अब भी पुलिस और कोर्ट की पहुंच से बाहर थी। कोर्ट ने उसका बयान दर्ज करने के लिए समन जारी किया। हालांकि, डीपी यादव ने भारती को लौटने ही नहीं दिया। आखिरकार तीन साल बाद कोर्ट ने नोटिस और समन का जवाब न मिलने के बाद भारती को आखिरी मौका दिया और अगली बार पेश न होने पर उसे अपराधी घोषित करने और उसका पासपोर्ट रद्द करने की बात भी कही। कोर्ट की कार्रवाई के दबाव के चलते भारती 25 नवंबर 2006 को ब्रिटेन से भारत लौटी।
इस बीच पुलिस को मामले में तीसरे आरोपी की मिलीभगत का भी इशारा मिला। 23 नवंबर 2002 को पुलिस ने सुखदेव पहलवान के खिलाफ अलग से केस दायर किया। हालांकि, इस केस की प्रमुख कड़ी भारती अब भी पुलिस और कोर्ट की पहुंच से बाहर थी। कोर्ट ने उसका बयान दर्ज करने के लिए समन जारी किया। हालांकि, डीपी यादव ने भारती को लौटने ही नहीं दिया। आखिरकार तीन साल बाद कोर्ट ने नोटिस और समन का जवाब न मिलने के बाद भारती को आखिरी मौका दिया और अगली बार पेश न होने पर उसे अपराधी घोषित करने और उसका पासपोर्ट रद्द करने की बात भी कही। कोर्ट की कार्रवाई के दबाव के चलते भारती 25 नवंबर 2006 को ब्रिटेन से भारत लौटी।
इसके बाद मामले में सुनवाई जारी रही। नीतीश की मां नीलम ने बाद में एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि उन्हें इस केस में कई धमकियां मिलीं। यहां तक कि नीतीश के छोटे भाई अजय को भी मारने की कई कोशिशें हुईं। हालांकि, कोर्ट में नीलम की लड़ाई जारी रही। मामले में अगला अहम मोड़ आया दिसंबर 2007 में। अभियोजन पक्ष ने विकास और विशाल की हत्या के इरादे के पीछे नीतीश और भारती की करीबियों को वजह माना। यही मर्डर का मोटिव बना और कोर्ट ने इसे केंद्र में रखते हुए 2 अप्रैल 2008 से केस की रोजाना सुनवाई शुरू की।
2008: नीतीश कटारा की हत्या का दोषी साबित हुआ बाहुबली का बेटा
23 अप्रैल 2008: नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में सुनवाई पूरी हुई।30 मई 2008: विकास और विशाल दोषी करार। आजीवन कारावास की सजा हुई।
सजा से संतुष्ट नहीं हुईं नीतीश की मां, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचीं
इस बीच विकास यादव और विशाल यादव को उम्रकैद की सजा को लेकर नीलम कटारा असहमत रहीं और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में विकास-विशाल के लिए मौत की सजा की मांग करते हुए याचिका लगाई। इस बीच विकास-विशाल की तरफ से भी निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
खैर मामला अगले छह साल तक हाईकोर्ट में चला। 16 अप्रैल 2013 को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। एक साल बाद 2 अप्रैल 2014 को उच्च न्यायालय ने विकास, विशाल और हत्या में उनका साथ देने वाले सुखदेव को ऑनर किलिंग का दोषी पाया। कोर्ट ने फैसला 6 फरवरी 2015 को दिया और विकास-विशाल की सजा को उम्रकैद से बदल कर 25-25 साल कर दिया। हालांकि, सुखदेव पहलवान को 20 साल की सजा मिली।
...और फिर सुप्रीम कोर्ट भी गईं नीतीश की मां
इसी साल नीलम कटारा ने विकास-विशाल यादव की सजा को मौत की सजा में बदलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने भी तीनों को दोषी पाया, हालांकि नीलम कटारा की उस मांग को नकार दिया, जिसके तहत दोषियों के लिए मौत की सजा मांगी गई थी। 3 अक्तूबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने विकास-विशाल को 25-25 साल जेल और सुखदेव पहलवान को 20 साल की सजा को बरकरार रखा।
अब जानें- कौन है डीपी यादव और विकास यादव?
डीपी यादव: बाहुबली जिस पर यूपी की कल्याण सिंह सरकार ने लगाया था एनएसएधर्मपाल यादव, जिन्हें डीपी यादव के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के बड़े बाहुबलियों में से एक रहे हैं। एक समय डीपी यादव का जोर कितना रहा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में उनके नाम की तूती बोलती थी। रिपोर्ट्स की मानें तो डीपी यादव को यूपी पुलिस ने 'बी' क्लास हिस्ट्रीशीटर के तौर पर रिकॉर्ड में रखा था। जहां 'ए' क्लास हिस्ट्रीशीटर वह माने जाते थे, जिन्हें कुछ समय बाद सुधारा जा सकता है, वहीं 'बी' क्लास को सुधारने की गुंजाइश नहीं होती।
2004 तक के पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक, डीपी यादव का नाम 1979 में पहली बार आपराधिक दुनिया में आया। उस पर पहला केस गाजियाबाद के कविनगर थाने में दर्ज हुआ। यादव को बाहुबली महेंद्र सिंह भाटी का चेला माना जाता था। 1989 में मुलायम सिंह यादव ने डीपी यादव को बुलंदशहर से विधायकी का टिकट दे दिया। वे न सिर्फ जीते, बल्कि मुलायम सिंह यादव की सरकार में पंचायती राज मंत्री भी बने।
अगले कुछ वर्षों में डीपी यादव का नाम उत्तर प्रदेश के माफियाओं में गिना जाने लगा। 1991 तक यादव पर करीब 25 केस दर्ज थे। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने यादव पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत केस दायर करवाया और जेल भिजवा दिया। बताया जाता है कि उन पर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, बुलंदशहर, मुरादाबाद और बदायूं जिले के साथ-साथ हरियाणा के जींद और सिरसा में भी मामले दर्ज थे।
विकास यादव: 23 साल बाद पैरोल पर निकलकर शादी करने वाला हत्यारा
विकास यादव की यूं तो अपनी व्यक्तिगत पहचान यही है कि वह डीपी यादव का बेटा है। नीतीश कटारा हत्याकांड के 23 साल बाद उसे 24 अप्रैल 2025 को 8 मई तक के लिए पैरोल मिल गई। विकास की यह याचिका कोर्ट ने बीमार मां की देखभाल के लिए मंजूर की थी। इस दौरान उस पर कोर्ट ने कई शर्तें लगाई थीं। बाद में उसकी पैरोल को बढ़ाया गया।
इसके बाद विकास ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका लगाई और अपील की कि उसे अपने ऊपर लगाए गए जुर्माने की 54 लाख रुपये की राशि जुटानी है और 5 सितंबर को शादी करनी है, इसलिए पैरोल दे दी जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को उसकी पैरोल को एक हफ्ते के लिए बढ़ाने का आदेश दिया।
अन्य वीडियो
विकास यादव की यूं तो अपनी व्यक्तिगत पहचान यही है कि वह डीपी यादव का बेटा है। नीतीश कटारा हत्याकांड के 23 साल बाद उसे 24 अप्रैल 2025 को 8 मई तक के लिए पैरोल मिल गई। विकास की यह याचिका कोर्ट ने बीमार मां की देखभाल के लिए मंजूर की थी। इस दौरान उस पर कोर्ट ने कई शर्तें लगाई थीं। बाद में उसकी पैरोल को बढ़ाया गया।
इसके बाद विकास ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका लगाई और अपील की कि उसे अपने ऊपर लगाए गए जुर्माने की 54 लाख रुपये की राशि जुटानी है और 5 सितंबर को शादी करनी है, इसलिए पैरोल दे दी जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को उसकी पैरोल को एक हफ्ते के लिए बढ़ाने का आदेश दिया।
अन्य वीडियो