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निर्मल गंगा: मार्च तक 200 घाट, श्मशानघाटों का काम पूरा करने पर जोर: गडकरी
भाषा, नई दिल्ली
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:17 PM IST
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गंगा को ‘निर्मल’ और ‘अविरल’ बनाने के सपने को पूरा करने के उद्देश्य से सरकार घाट और श्मशानघाट की करीब 200 परियोजनाओं को मार्च 2019 तक पूरा करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र गंगा के अलग-अलग हिस्सों में पानी की न्यूनतम मात्रा या पर्यावरणीय प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिये विभिन्न कदम उठा रही है।
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गडकरी ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा, "गंगा को स्वच्छ बनाने के लिये मलजल आधारभूत संचरना, घाट एवं शमशानघाट, नदी के किनारों का विकास, नदी के सतह की सफाई और जलीय जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिये कुल 227 परियोजनायें शुरू की गयी हैं।"
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उन्होंने कहा कि गंगा को ‘निर्मल’ (स्वच्छ) और ‘अविरल’ (मुक्त प्रवाह) बनाना उनका सपना है और उनके मंत्रालय इस दिशा में कई कदम उठा रहे हैं।
सरकार ने अक्टूबर महीने की शुरुआत में गंगा और उसकी सहायक नदियों में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह को अनिवार्य किया गया था। इसके तहत पानी की गुणवता को बनाये रखने और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ कायाकल्प को सुनिश्चित करने के लिये गंगा और उसकी सहायक नदियों के विभिन्न खंडों में साल भर जल का न्यूनतम प्रवाह अनिवार्य रूप से बनाये रखना होगा।
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गडकरी ने कहा, "सरकार की मार्च 2019 तक 151 घाट और 54 श्मशान घाट परियोजनाओं को पूरा करने की योजना है।"
उन्होंने कहा कि 138 जगहों पर पानी की गुणवता की निगरानी की जायेगी। इन स्थानों की बीच की दूरी 20 किलोमीटर होगी। इसके अलावा गंगा में ठोस कचड़े से बचाने के लिये वाराणसी, बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद, मथुरा, वृंदावन और हरिद्वार में 24 घंटे घाटों की सफाई के लिये परियोजनाएं शुरू की गयी हैं।
गडकरी ने कहा कि जैव-विविधता संरक्षण योजनाओं के तहत, गंगा में पायी जाने वाली स्वदेशी जलीय प्रजातियों जैसे डॉल्फिन, कछुए और जलीय पक्षियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए कई परियोजनाएं लागू की जा रही हैं।
गंगा नदी के न्यूनतम पर्यावरण प्रवाह को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन निर्देशों के कार्यान्वयन के बाद नदी कभी नहीं सुखेगी क्योंकि ये वैज्ञानिक अध्ययन के फलस्वरूप निकले निष्कर्ष हैं।