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ताजा हकीकत बताएंगे नए रोजगार आंकड़े, शहरों के लिए तिमाही व गांवों के लिए सालाना आंकड़े होगें जारी

Mon, 01 Oct 2018 06:47 AM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 01 Oct 2018 06:47 AM IST
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niti aayog vice chairman rajiv kumar targeted the governments over delay employment data

रोजगार आंकड़ों आने में देरी होने को लेकर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने तत्कालीन सरकारों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ताजा स्थिति को बयां करने वाले आंकड़े इस साल देश के सामने होंगे। यह मौजूदा सरकार की एक बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि पिछले साठ साल में यह कदम किसी और सरकार ने नहीं उठाया। सभी ने इस मामले में ढीला रवैया अपनाया, जिससे हकीकत छुपाने की कवायद जारी रही।

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आयोग के उपाध्यक्ष कुमार ने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी विभाग (सीएसओ) इस व्यवस्था को लागू करने के लिए काम कर रहा है। पिछली पांच तिमाहियों का सर्वेक्षण किया जाना था, जो अपने अंतिम चरणों में है। इसके तहत हाउसहोल्ड सर्वे किए गए हैं, ताकि देश में रोजगार की हकीकत सबके सामने आ जाए। 
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उन्होंने आगे कहा कि नए आंकडे़ इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत तक आ जाएंगे। साथ ही शहरी क्षेत्रों के रोजगार से संबंधित आंकडे़ तिमाही आधार पर और ग्रामीण क्षेत्रों के आंकड़े सालाना आधार पर जारी होंगे, जिसमें कोई अटकल नहीं लगाई जा सकेगी। वहीं, परिवारों के सर्वे के आधार पर रोजगार आधारित आंकड़े निर्धारित अवधि में जारी किए जाएंगे। इससे सरकार आंकड़ों के मुताबिक नीतियां बना सकेगी और जरूरी कदम उठा सकेगी।

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आंकडे़ आने में देरी होने से नहीं बन पाती थी नीति

कुमार ने कहा कि यह बहुत अहम कदम है, जिसका फायदा भविष्य में लोगों के सामने स्पष्ट हो जाएगा। पहले यह आंकड़े हर पांच वर्ष में बनाए जाते थे, जो कि एक बहुत लंबा समय होता है। इस कारण से कोई स्पष्ट नीति नहीं बन पाती थी और अगर बनती भी थी, तो उसमें तमाम खामियां होती थीं। 

उनके अनुसार शहरी क्षेत्रों में पहले (पांच वर्षों में) होने वाले सर्वे और अब (तीन महीने में) होने वाले सर्वे में बड़ा फर्क होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह अंतर नजर आ जाएगा। हर तीन महीने व सालाना आधार पर आंकड़े आने से वास्तविक स्थिति समझ में आ जाएगी।

नई कवायद शुरू ताकि विपक्ष न उठाए उंगली

गौरतलब है कि सरकार ने पिछले साल नीति आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में एक कार्यबल को गठित किया था। इस समिति को रोजगार आंकडे़ में विसंगतियों से निपटने के साथ रोजगार सृजन को बढ़ाने के समाधानों से संबंधित सुझाव देने थे। 

मौजूदा सरकार लंबे समय से रोजगार के मुद्दे पर ध्यान दे रही है। हालांकि विपक्षी दलों द्वारा रोजगार में कमी आने के आधार पर सरकार को घेरने की कोशिश के बाद नए आंकड़े जुटाने की कवायद शुरू हुई।

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